नई दिल्ली | मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग के साथ-साथ SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर मुंबई (Mumbai) में रविवार को ‘गर्जना मोर्चा’ निकाला गया। शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने इसका नेतृत्व किया। इस मोर्चे में सभी दलों से शामिल होने की अपील की गई थी। अपील थी कि मार्च में किसी पार्टी विशेष का झंडा न लाया जाए, इसकी जगह तिरंगा लेकर लोग शामिल हों। बताया जाता है कि इस मार्च में तकरीबन पचास हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया।
रविवार सुबह दस बजे से इस मोर्चे में कई वोटर भी शामिल हुए, जिनके नाम को लेकर एसआईआर की प्रक्रिया में समस्याएं पैदा हुई थीं। मुंबई के मेट्रो सिनेमा इलाक़े में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे इस मोर्चे के लिए इलाक़े के एक होटल में पहुंचे थे। इसके अलावा कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट, राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेताओं के साथ महाविकास अघाड़ी के कुछ अन्य नेता भी मौजूद थे।
राज ठाकरे ने की चुनाव बहिष्कार की अपील
प्रदर्शन में पहुंचे राज ठाकरे ने कहा, “मैं 2017-18 से बता रहा हूं कि वोट चोरी हो रही है। चुनाव आयोग को ईवीएम और मतदाता सूचियों में गड़बड़ी को लेकर कदम उठाना चाहिए। मैं कह रहा था कि इसके लिए चुनावों का बहिष्कार किए बिना दूध का दूध और पानी का पानी नहीं होगा।”उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में बीजेपी की जीत हुई, तब लोगों में कोई उत्साह नहीं था। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा चुनाव तक छह महीने में 40 से 60 लाख मतदाता बढ़ा दिए गए। सत्ता में और विपक्ष में किसे बैठाना है, यह मतदाताओं को तय करना है, चुनाव आयोग को नहीं।”
राज ठाकरे ने आरोप लगाया, “सत्ता जाने पर क्या होगा, इसका डर ही उनमें दिखाई नहीं देता। सभी अदालतों, मीडिया और चुनाव आयोग को अपने क़ब्जे में ले लिया गया है। आपके सत्ता से जाने के बाद जो सत्ता में आएंगे, अगर वे भी ऐसा ही व्यवहार करें तो क्या करेंगे?”राज ठाकरे ने मांग की कि महाराष्ट्र में अब तक हुए एसआईआर को पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “वोटिंग मशीन बंद होनी चाहिए और चुनाव बैलेट पेपर पर होने चाहिए। तभी दूध का दूध और पानी का पानी होगा। फिर किसी की भी सत्ता आए, कोई आपत्ति नहीं है।”
उद्धव ठाकरे ने हिटलर से की तुलना
मुख्य चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ इस प्रदर्शन में शामिल महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा, “यह लड़ाई देश की यानी आज़ादी की लड़ाई है। देशभर के 13 करोड़ मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट से हटाने के ख़िलाफ़ ये लड़ाई है।”उन्होंने कहा, “यह लड़ाई किसी एक पार्टी, व्यक्ति या जाति की नहीं है। ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पक्षपातपूर्ण तरीके से हुई है। राहुल गांधी ने नियुक्ति का विरोध किया था।”
उद्धव ठाकरे ने इस मंच से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा, “सरदार वल्लभभाई पटेल ने मराठवाड़ा को देश में शामिल करने के लिए सेना भेजी थी। अमित शाह ने बंगाल में एक महिला के ख़िलाफ़ अपनी पार्टी को जिताने के लिए सेना भेजी।”उद्धव ठाकरे ने कहा, “वोट की चोरी की ही, लेकिन राम मंदिर की दानपेटी और पार्टियों की भी चोरी की। महाराष्ट्र से हटाए गए दो करोड़ मतदाताओं में कितने बांग्लादेशी हैं, यह सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। अगर बांग्लादेशियों के नाम पर मतदाताओं का अधिकार छीना जा रहा है तो आवाज़ उठानी पड़ेगी।उद्धव ठाकरे ने कहा, “हिटलर के जाने के बाद उसके साथ पाप करने वालों को ढूंढ-ढूंढकर सज़ा दी गई। बीजेपी और उनके साथ के अधिकारियों को यह याद रखना चाहिए।”
ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ बढ़ता असंतोष
अंग्रेज़ी अख़बार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में सामने आई कुछ बातों के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार लगातार विपक्षी दलों के निशाने पर हैं। विपक्षी दल उनके इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं। हालाँकि, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लंबे समय से ‘वोट चोरी’ जैसे आरोप लगाते रहे हैं।’द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट में कहा गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मुख्य रूप से तीन मुद्दे उठाए गए थे।पहला, एसआईआर के तहत मतदाताओं के नाम शामिल करने और हटाने को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की ओर से उठाई गई आपत्ति। दूसरा, फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को लेकर दर्ज की गई आपत्ति।
तीसरा, ईसीआईनेट (ECINet) के केंद्रीकरण को लेकर आपत्ति। रिपोर्ट के मुताबिक़, इसकी वजह से स्थानीय चुनाव अधिकारियों को इसका एक्सेस नहीं मिल रहा था।हालाँकि चुनाव आयोग (ईसी) ने SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर उठे विवाद के बीच बीते शनिवार को बैठक की। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हुए।बैठक के बाद ईसी ने कहा कि SIR से जुड़े सभी बड़े फ़ैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने एसआईआर की प्रक्रिया में कुछ बदलावों का भी एलान किया। लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के सवाल ख़त्म नहीं हुए हैं।
अभिजीत दीपके और अन्य के ख़िलाफ़ मुक़दमा
शुक्रवार को मुंबई के शिवाजी पार्क मैदान इलाक़े में प्रदर्शन करने वाले कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके समेत 400 से 500 अज्ञात सीजेपी समर्थकों के ख़िलाफ़ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन लोगों के ख़िलाफ़ बिना अनुमति ग़ैरक़ानूनी तरीके से भीड़ जमा करने, लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने, भीड़ जमा करके नारेबाज़ी करने, यातायात में बाधा डालने और पुलिस के आदेश का उल्लंघन करने के आरोप में केस दर्ज किया गया है।महाराष्ट्र में किसी मुद्दे को लेकर ठाकरे बंधुओं का एक साथ आना सियासी तौर पर अहम घटना मानी जाती है। इससे पहले भी शिक्षा मंत्री रह चुके धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े और कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के समर्थन में ठाकरे बंधु एक साथ आकर आंदोलन कर चुके हैंअब इंडिया गठबंधन की ओर से 6 अक्तूबर को सभी विपक्षी दलों के नेता और सांसद चुनाव आयोग तक मार्च निकालेंगे









