नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने गुरुवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक के बेलागवी में फॉर्म 7 आवेदनों की अचानक बाढ़ के जरिए मतदाता सूची से करीब 15,000 मतदाताओं के नाम हटाने की संगठित कोशिश की गई। उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में गांधी ने आरोप लगाया कि ये आवेदन तीन दिनों— 22, 23 और 24 सितंबर— में बड़ी संख्या में दाखिल किए गए। उन्होंने दावा किया कि मुसलमानों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों को खासतौर पर निशाना बनाया जा रहा है। उनका आरोप था कि इन समूहों को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि, उनके मुताबिक, इनके सदस्यों का बड़ा हिस्सा भाजपा के खिलाफ वोट करता है।
गांधी ने कहा, ‘पूरा देश वोट चोरी के खिलाफ गुस्से में है—मगर फिर भी भाजपा-चुनाव आयोग की बेशर्मी देखिए, कैसे खुलेआम वही किए जा रहे हैं।’ उन्होंने आरोप लगाया कि बेलागवी में ‘एक झटके में’ करीब 15,000 नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की गई।
गांधी ने बेलागवी विवाद को अपने पहले के आरोपों से जोड़ा, जिसमें उन्होंने कहा था कि मतदाता सूचियों में हेरफेर के लिए तकनीक और केंद्रीकृत प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म 7 आवेदनों को थोक में दाखिल करके ‘चुनिंदा’ मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है और दावा किया कि यह प्रक्रिया स्वचालित प्रणालियों और केंद्रीकृत नियंत्रण के तहत चलाई जा रही है।
चुनाव आयोग का फॉर्म 7 वह निर्धारित प्रपत्र है, जिसके जरिए मतदाता सूची में किसी नाम के शामिल होने पर आपत्ति दर्ज की जा सकती है या मृत्यु, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर चले जाना, दोहरी नामांकन या भारतीय नागरिकता न होने जैसे निर्धारित आधारों पर नाम हटाने की मांग की जा सकती है। हालांकि, फॉर्म 7 आवेदन खुद में किसी मतदाता का नाम स्वतः हटाना नहीं है। निर्वाचन अधिकारी को फैसला लेने से पहले आपत्तियों की जांच और सत्यापन करना होता है।
ये आरोप ऐसे समय में आए हैं, जब कर्नाटक में मतदाता सूचियों के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान फॉर्म 7 आवेदनों के थोक में दाखिल होने को लेकर विवाद बढ़ रहा है। बेलागवी में कांग्रेस नेताओं ने हाल ही में आरोप लगाया था कि मतदाताओं के नाम हटाने की मांग वाले करीब 200 फॉर्म 7 आवेदन एक मतदान केंद्र पर लाए गए और दो लोगों ने बूथ लेवल ऑफिसर पर उन पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाने की कोशिश की। BLO ने reportedly मना कर दिया और कहा कि उसने संबंधित मतदाताओं की मैपिंग पहले ही पूरी कर ली है।
बेलागवी के उपायुक्त मोहम्मद रोशन ने कहा कि उन आपत्तियों के आधार पर किसी मतदाता का नाम नहीं हटाया गया है और थोक आपत्तियों से जुड़ी शिकायतों की जांच की जाएगी।
इस मुद्दे में भाजपा विधायक अभय पाटिल भी शामिल रहे हैं, जिन्होंने बेलागवी नॉर्थ में करीब 2,598 संदिग्ध मतदाताओं की जांच की मांग की थी। निर्वाचन अधिकारियों ने थोक जांच या नाम हटाने की मांग खारिज कर दी और स्पष्ट किया कि बूथ लेवल एजेंट निर्धारित प्रक्रिया के तहत व्यक्तिगत आपत्तियां दाखिल कर सकते हैं। पाटिल ने थोक में नाम हटाने की मांग से इनकार किया है और कहा कि उन्होंने केवल उन मतदाताओं के सत्यापन की मांग की थी जिन्हें वे संदिग्ध मानते थे।
यह विवाद और तेज हो गया जब बेलागवी मार्केट पुलिस ने 30 सितंबर को भाजपा पदाधिकारी रवि पाटिल और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की। आरोप है कि फॉर्म 7 आवेदनों के जरिए 198 मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई, जिनमें कथित रूप से जाली दस्तावेज और गलत जानकारी थी। ये आरोप जांच के अधीन हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि कर्नाटक कांग्रेस के नेता इस समय मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में उन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं जो कथित रूप से जिम्मेदार हैं, और सवाल किया कि CEO ऐसी मांग से इनकार क्यों कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने पूछा, ‘CEO इस FIR से मना क्यों कर रहे हैं?’
उन्होंने SIR की अपनी व्यापक आलोचना भी दोहराई और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार SIR प्रक्रिया के जरिए मिलकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने कथित आचरण को “देशद्रोह” बताया और मोदी व शाह की जांच की मांग की।
राहुल ने यह मांग भी दोहराई कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और ‘अप्रूवर’ बनें, साथ ही मोदी और शाह के खिलाफ जांच की मांग की। ये आरोप SIR प्रक्रिया और मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता को लेकर व्यापक राजनीतिक टकराव का हिस्सा हैं।
विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि थोक आपत्तियों और नाम हटाने से असली मतदाता मताधिकार से वंचित हो सकते हैं, जबकि निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में नाम हटाने से पहले सत्यापन और निर्धारित प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। कर्नाटक में आधिकारिक आंकड़ों के अलग-अलग सेटों में फॉर्म 7 आवेदनों की संख्या में भी विसंगतियां बताई गई हैं, जिससे प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग बढ़ी है।









