एक साल बाद पलटा हैदराबाद यूनिवर्सिटी का छात्रसंघ चुनाव, वाम-आंबेडकरवादी गठबंधन की वापसी

हैदराबाद। यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद (Hyderabad University) के छात्रसंघ चुनाव में एक साल बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। 2025 में जहां ABVP-SLVD गठबंधन ने छात्रसंघ के सभी छह प्रमुख पदों पर जीत दर्ज कर क्लीन स्वीप किया था, वहीं 2026 के चुनाव में AISA-ASA-DSU-SFI-TSF के गठबंधन ने पांच प्रमुख पदों पर कब्जा जमाया है। अध्यक्ष पद पर दिलशादा रेहान की जीत इस चुनाव का सबसे बड़ा नतीजा रही। उन्होंने ABVP-SLVD के नरेश पोडिशेट्टी को 451 वोटों से हराया।

पहली मुस्लिम महिला बनीं छात्रसंघ अध्यक्ष

दिलशादा रेहान को अध्यक्ष पद पर कुल 2,178 वोट मिले, जबकि नरेश पोडिशेट्टी के खाते में 1,727 वोट आए। तीसरे उम्मीदवार के. नवीन कुमार को 340 वोट मिले। इस जीत के साथ दिलशादा यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद छात्रसंघ की पहली मुस्लिम महिला अध्यक्ष बनी हैं। चुनाव के दौरान उन्होंने मेस फीस में बढ़ोतरी, छात्राओं के लिए मेंस्ट्रुअल लीव, गंभीर रूप से बीमार छात्रों के लिए अटेंडेंस रिलैक्सेशन, दिव्यांग-अनुकूल कैंपस और ट्रांसजेंडर पॉलिसी लागू करने जैसे मुद्दे उठाए थे।

पांच बड़े पद गठबंधन के खाते में

अध्यक्ष पद के अलावा उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव और सांस्कृतिक सचिव के पद भी इसी गठबंधन के उम्मीदवारों ने जीते। उपाध्यक्ष पद पर TSF के कोरा नितिन चौहान को 1,608 वोट मिले। उन्होंने ABVP-SLVD की बरशरानी बेहरा को हराया, जिन्हें 1,321 वोट मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर 287 वोट रहा।

महासचिव पद पर ASA के प्रतीक ने जीत दर्ज की। संयुक्त सचिव पद AISA के सिद्धांत के खाते में गया। वहीं सांस्कृतिक सचिव पद पर ASA के अभिनाश कुमार ने बेहद करीबी मुकाबले में जीत हासिल की। यह मुकाबला सिर्फ पांच वोटों के अंतर से तय हुआ।

खेल सचिव पद ABVP-SLVD के पास

छह प्रमुख पदों में सिर्फ खेल सचिव का पद ABVP-SLVD के खाते में गया। इस पद पर बनोथ साई ने जीत दर्ज की। इस तरह छात्रसंघ के छह बड़े पदों में पांच पद AISA-ASA-DSU-SFI-TSF गठबंधन और एक पद ABVP-SLVD के पास गया।

2025 में ABVP ने किया था क्लीन स्वीप

इस चुनाव को समझने के लिए पिछले साल का नतीजा भी अहम है। सितंबर 2025 में ABVP-SLVD ने यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद छात्रसंघ के सभी छह प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की थी। सात साल के अंतराल के बाद ABVP ने कैंपस में यह वापसी की थी। अध्यक्ष पद पर शिवा पालिपु ने जीत दर्ज की थी और बाकी पांच प्रमुख पद भी ABVP नेतृत्व वाले पैनल के खाते में गए थे।

इस बार करीब 80 फीसदी मतदान

2026 के चुनाव में करीब 5,900 छात्र मतदान के लिए पात्र थे और करीब 80 फीसदी मतदान हुआ। चुनाव में कुल 220 उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें नौ केंद्रीय पदों के साथ 13 स्कूलों में 59 स्कूल बोर्ड काउंसलर पद भी शामिल थे। चुनाव की मतगणना मंगलवार दोपहर शुरू हुई और बुधवार सुबह तक चलती रही।

59 में से 32 स्कूल पद भी गठबंधन के खाते में

केंद्रीय पदों के अलावा स्कूल स्तर पर भी गठबंधन को बढ़त मिली। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक AISA-ASA-DSU-SFI-TSF गठबंधन ने 13 स्कूलों में 59 स्कूल काउंसलर और बोर्ड सदस्य पदों में से 32 पर जीत दर्ज की। यानी चुनाव का असर सिर्फ छह प्रमुख पदों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्कूल स्तर के प्रतिनिधित्व में भी गठबंधन आगे रहा।

छात्र मुद्दों पर रहा जोर

इस चुनाव में कैंपस से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख रहे। मेस फीस, उपस्थिति में राहत, छात्राओं के लिए मेंस्ट्रुअल लीव, दिव्यांग छात्रों के लिए सुविधाएं और ट्रांसजेंडर पॉलिसी जैसे मुद्दों को चुनाव प्रचार में जगह मिली। गठबंधन ने छात्र कल्याण, कैंपस में लोकतांत्रिक भागीदारी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवालों को अपने एजेंडे का हिस्सा बनाया।

एक साल पहले जहां ABVP-SLVD ने सभी छह प्रमुख पद जीतकर छात्रसंघ पर पूरा नियंत्रण हासिल किया था, वहीं इस बार चुनावी नतीजों ने कैंपस का समीकरण बदल दिया है। अध्यक्ष से लेकर सांस्कृतिक सचिव तक पांच बड़े पद वाम-आंबेडकरवादी गठबंधन के खाते में गए हैं, जबकि ABVP-SLVD को खेल सचिव के पद से संतोष करना पड़ा।

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