नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में महिला सुरक्षा को लेकर छात्राओं का विरोध-प्रदर्शन लगातार चर्चा में है। ‘हम औरतें आजाद हैं’ के बैनर तले चल रहे इन प्रदर्शनों की शुरुआत दक्षिणी दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित गैंगरेप की घटना के बाद हुई। इसके बाद मिरांडा हाउस, लेडी श्रीराम कॉलेज, गार्गी, कमला नेहरू, श्यामा प्रसाद मुखर्जी समेत कई कॉलेजों की छात्राएं प्रदर्शन में शामिल हुईं। 28 और 29 सितंबर को नॉर्थ कैंपस में बारिश के बीच भी मार्च निकाला गया। छात्राओं का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उनकी आवाजाही पर पाबंदी या कर्फ्यू लगाने के बजाय सुरक्षित सड़कें, बेहतर परिवहन, पर्याप्त रोशनी और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। 29 सितंबर के प्रदर्शन में “Rapist ko andar karo, ladkiyon ko nahi” और “Girls just wanna have fundamental rights” जैसे नारे भी सुनाई दिए।
छात्राओं की प्रमुख मांगें
छात्राओं की ओर से उठाई जा रही प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- कॉलेज, सड़क और पार्कों के आसपास बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग
- ज्यादा DTC बसें और विशेष शटल सेवाएं
- CCTV कैमरों की नियमित निगरानी और पुलिस पेट्रोलिंग
- कॉलेजों और मेट्रो स्टेशनों के आसपास पिंक बूथ
- ई-रिक्शा और ऑटो के लिए सुरक्षित पिकअप-ड्रॉप पॉइंट
- महिलाओं की आवाजाही पर सुरक्षा के नाम पर पाबंदी खत्म करना
- यौन हिंसा के मामलों में तेज कार्रवाई
- सुरक्षित सार्वजनिक शौचालय और बेहतर आखिरी छोर तक परिवहन सुविधा
नारे और पोस्टरों ने खींचा ध्यान
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं के पोस्टर और नारे सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहे। इनमें “1 कचौड़ी, 2 समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा”, “बेटी की लोकेशन नहीं, बेटे का इंटेंट चेक करो”, “Cute नहीं, Kranti है हम”, “Hum azaad hain sirf panno par”, “Pinjra todna nahi chhodenge”, “Girls just wanna have fundamental rights” और “We should not need a protest to feel safe” जैसे संदेश शामिल रहे। इन नारों के जरिए प्रदर्शनकारी महिलाओं की सुरक्षा को उनकी स्वतंत्रता और सार्वजनिक जगहों पर बराबर अधिकार से जोड़ रही हैं।
LG की बैठक में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
प्रदर्शनों के बीच 30 सितंबर को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने DU के महिला कॉलेजों की सुरक्षा को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें DU प्रशासन, महिला कॉलेजों के प्राचार्य, दिल्ली पुलिस और परिवहन समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में कॉलेजों और मेट्रो स्टेशनों के आसपास पुलिस पेट्रोलिंग और PCR बढ़ाने, पिंक बूथ बढ़ाने, अंधेरे इलाकों में स्ट्रीट लाइट और CCTV लगाने, सुरक्षित ऑटो-ई-रिक्शा पिकअप पॉइंट बनाने और शाम के समय शटल बसों की व्यवस्था मजबूत करने जैसे कदमों पर जोर दिया गया। छात्र सुरक्षा ऐप, इंटर-कॉलेज महिला सुरक्षा समिति, सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग और नियमित समीक्षा की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है।
फिलहाल DU में छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा प्रदर्शन से आगे बढ़कर प्रशासनिक स्तर पर भी पहुंच गया है। छात्राओं का मूल संदेश है कि सुरक्षा का मतलब महिलाओं की आजादी सीमित करना नहीं, बल्कि ऐसा माहौल बनाना है जहां वे बिना डर के सड़क, कॉलेज और सार्वजनिक जगहों का इस्तेमाल कर सकें।










