वोट चोरी पर कांग्रेस कार्यसमिति ने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग

नई दिल्ली। कांग्रेस (Congress) कार्यसमिति ने मंगलवार को वोट चोरी के मुद्दे पर प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। साथ ही एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत निलंबित करने और मतदाता सूचियों से हटाए गए करीब 13 करोड़ 30 लाख नामों को दोबारा जोड़ने की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई है।

कांग्रेस कार्यसमिति ने राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी दौरे के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया तथा फाइनल ड्राफ्ट सूची के बालाघाट में 45 बच्चों की मौत पर दुख जताते हुए सरकार के फेल होने की बात कही।

इंदिरा भवन में ढाई घंटे तक चली इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की, जिसमें कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव प्रियंका गांधी, पार्टी के चारों मुख्यमंत्रियों समेत 68 सदस्य शामिल हुए।

बैठक के उपरांत पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने कार्यसमिति के निर्णयों एवं पार्टी की आगे की रणनीति के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान पार्टी के मीडिया एवं प्रचार (संचार विभाग) अध्यक्ष पवन खेड़ा भी मौजूद थे।

वेणुगोपाल ने बताया कि बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त की मोदी सरकार के साथ मिलीभगत, वोट चोरी और एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर व्यापक चर्चा की गई।

वेणुगोपाल ने कहा कि चुनाव आयोग के जरिए भाजपा-आरएसएस ने संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया पर कब्जा कर लिया है। मोदी सरकार के इशारे पर एसआईआर प्रक्रिया के जरिए देशभर में मतदाता सूचियों से करीब 13 करोड़ 30 लाख नाम अवैध रूप से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह धांधली मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा सीधे तौर पर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के दिशानिर्देशों पर की जा रही है। इसलिए पार्टी उन दोनों से भी नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग करती है। उन्होंने बताया कि कार्यसमिति ने बीते दो वर्षों से वोट चोरी का मुद्दा उठाने के लिए राहुल गांधी को बधाई भी दी है।

वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि पार्टी देश के 800 से अधिक जिलों और राज्य स्तर पर अपना आंदोलन चला चुकी है और अब इस लड़ाई को बूथ स्तर तक ले जाया जाएगा। पार्टी मतदाता सूची से बाहर किए गए 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं तक पहुंचेगी। भविष्य के संयुक्त आंदोलन और विस्तृत एक्शन प्लान की रूपरेखा 30 सितंबर को होने वाली इंडिया गठबंधन की बैठक में सहयोगी दलों के साथ विचार-विमर्श के बाद तय की जाएगी।

वहीं, जयराम रमेश ने कहा कि राहुल गांधी पिछले दो वर्षों से 2024 के लोकसभा चुनावों तथा महाराष्ट्र और हरियाणा चुनावों में वोट चोरी का मुद्दा उठा रहे हैं। शुरू में कई लोगों ने विश्वास नहीं किया, लेकिन अब साबित हो गया है कि देश में हो रहे चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं हैं। यह नरेंद्र मोदी, अमित शाह और ज्ञानेश कुमार के बीच मैच-फिक्सिंग वाले चुनाव हैं।

जयराम रमेश ने बताया कि कार्यसमिति की बैठक के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस की वजह से ये खुलासे हो रहे हैं और वह लगातार वोट चोरी का पर्दाफाश कर रहे हैं। राहुल गांधी ने यह भी कहा है कि कांग्रेस पार्टी की राजनीति सिर्फ विरोध की नहीं, बल्कि प्रतिरोध की भी है। कांग्रेस संसद के भीतर विरोध करती है, सड़कों पर प्रतिरोध करती है और पार्टी आगे भी यह करती रहेगी। उन्होंने कहा कि वोट चोरी की सरकार द्वारा जो कानून पारित किए गए और अधिनियम बनाए गए हैं, वे सभी गैरकानूनी हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह से मोदी सरकार की कठपुतली बने-खरगे

इससे पहले बैठक के अपने शुरुआती वक्तव्य में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाए जाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार पर धांधली करने के लिए दबाव डालने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।

हालिया खुलासों का हवाला देते हुए खरगे ने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने खुद मुख्य चुनाव आयुक्त की गतिविधियों को मनमाना और अनुचित करार दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के इशारे पर मतदाता सूचियों से नागरिकों के नाम हटाए जा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह से सरकार की कठपुतली बनकर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जेन-जी से इतने नाराज हैं कि उन्होंने युवाओं को मताधिकार से बेदखल करने के लिए फॉर्म-6 के नियमों में गैरकानूनी तरीके से बदलाव करवा दिया।

खरगे ने मांग की कि मतदाता सूची में होने वाले हर बड़े बदलाव का पूरा डेटा सार्वजनिक हो, हटाए गए मतदाताओं को पूरी सूचना और अपील का अवसर मिले, राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और उससे संबंधित आवश्यक डेटा आसान प्रारूप में समय पर उपलब्ध हो, सभी गंभीर विसंगतियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच हो तथा चुनाव प्रक्रिया से जुड़े डेटा और निर्णयों में पारदर्शिता हो।

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