ममता बनर्जी दिल्ली पहुंचीं, इंडिया ब्लॉक बैठक में EC और SIR विवाद पर होगी चर्चा

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंगलवार को नई दिल्ली (Delhi) पहुंचीं। वे 30 सितंबर को होने वाली इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होंगी। बैठक में भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई), मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की विपक्षी मांगों पर चर्चा होने की संभावना है।

दिल्ली पहुंचने के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि बुधवार की बैठक में वे जो कुछ कहना चाहती हैं, वह सब रखेंगी। उन्होंने दोहराया कि विपक्ष का मुख्य ध्यान चुनाव आयोग पर है। ज्ञानेश कुमार का जिक्र करते हुए उन्होंने फिर “वैनिश जी” शब्द का इस्तेमाल किया और कहा कि वे शुरू से ही उन्हें “वैनिश” कहती आ रही हैं। बनर्जी ने कहा कि वे बैठक में चुनाव सॉफ्टवेयर और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे भी उठाएंगी, जिनके कारण विपक्ष के अनुसार मतदाता प्रभावित हुए हैं।

30 सितंबर की यह बैठक विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच एसआईआर प्रक्रिया को लेकर बढ़ते राजनीतिक विवाद के बीच हो रही है। विपक्षी दलों का आरोप है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया से वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से कट सकते हैं या उन्हें अतिरिक्त सत्यापन का सामना करना पड़ सकता है। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि पुनरीक्षण निर्धारित कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार हो रहा है।

SIR विवाद और ईसीआई के अंदर कथित मतभेद

यह विवाद 23 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के बाद और तेज हुआ। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर विभिन्न निर्णयों और कार्यवाहियों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की थी। इनमें मतदाता सूची, एसआईआर और प्रशासनिक मुद्दे शामिल थे।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के कामकाज और एसआईआर प्रक्रिया की वैधता से संबंधित एक याचिका को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दी है। मामले की सुनवाई अगले सप्ताह तीन न्यायाधीशों की पीठ करेगी। हालांकि, अदालत ने चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अभी तक सिद्ध नहीं माना है।

विपक्ष नई बर्खास्तगी प्रस्ताव की तैयारी में

ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी की मांग नई नहीं है। मार्च 2026 में विपक्षी सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में उनकी बर्खास्तगी के नोटिस दिए थे। रिपोर्टों के अनुसार, इन नोटिसों पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सांसदों के हस्ताक्षर थे। लेकिन लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति ने इन नोटिसों को स्वीकार नहीं किया।

विपक्षी दल अब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने का एक और प्रयास कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, मसौदे की कानूनी जांच के बाद दोनों सदनों में नया प्रस्ताव पेश किया जा सकता है।

संसदीय प्रस्ताव अपने आप मुख्य चुनाव आयुक्त को नहीं हटाता। संवैधानिक व्यवस्था के तहत बर्खास्तगी के लिए निर्धारित संसदीय प्रक्रिया जरूरी है और यह सिद्ध कदाचार या अक्षमता जैसे आधारों से जुड़ी होती है।

ममता की मौजूदगी के मायने

ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज पर बार-बार आपत्ति जताती रही हैं। इंडिया ब्लॉक की बैठक में इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित संसदीय कार्रवाई और अन्य राजनीतिक व कानूनी कदम शामिल हो सकते हैं।

यह बैठक ऐसे राजनीतिक समय में हो रही है, जब तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, वाम दल और अन्य विपक्षी समूह चुनाव आयोग के मुद्दे पर अधिक समन्वय चाहते हैं।

विपक्ष ने चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों पर चिंता जताई है, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि उसके फैसले और एसआईआर प्रक्रिया लागू कानूनी ढांचे पर आधारित हैं। ये मुद्दे राजनीतिक रूप से विवादित बने हुए हैं और कुछ पहलू न्यायिक विचार के अधीन भी हैं।

ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग

1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त बने। इससे पहले वे 15 मार्च 2024 को चुनाव आयोग में शामिल होने के बाद चुनाव आयुक्त रह चुके थे।

चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जो लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं तथा राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है।

संवैधानिक ढांचे के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, होता है। मुख्य चुनाव आयुक्त की बर्खास्तगी की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की बर्खास्तगी के समान है।

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