रायपुर। गणेश उत्सव और आने वाले त्योहारों (festivals) को लेकर रायपुर के बाजारों में रौनक तो दिखाई दी, लेकिन इस रौनक के पीछे महंगाई की चिंता भी साफ नजर आई। द लेंस की ग्राउंड रिपोर्ट में जब बाजार में दुकानदारों और ग्राहकों से बात की गई तो ज्यादातर लोगों ने बढ़ती कीमतों का असर अपने रोजमर्रा के बजट और त्योहार की खरीदारी पर पड़ने की बात कही।
बाजार में बातचीत की शुरुआत दुकानदारों से हुई। दुकानदारों ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस साल कई सामान महंगे हुए थे। खासकर त्योहारों में इस्तेमाल होने वाली चीनी, पूजा सामग्री, फूल, फल, मिठाई और मूर्तियों की कीमतों में बढ़ोतरी की बात सामने आई। उनका कहना था कि लागत बढ़ने का सीधा असर बिक्री पर पड़ा था।
एक दुकानदार ने बताया कि ग्राहक पहले की तरह आसानी से सामान नहीं खरीद रहे थे। छोटी-छोटी खरीदारी में भी लोग कीमत पूछने के बाद मोलभाव कर रहे थे। उनके मुताबिक, पहले जिन चीजों की बिक्री आसानी से हो जाती थी, इस बार उनमें भी कमी दिखाई दे रही थी।
मूर्तियों की कीमत बढ़ने से कारोबार पर असर

त्योहार के दौरान गणेश प्रतिमाओं की बिक्री करने वाले दुकानदारों ने भी बढ़ी हुई लागत की बात कही। एक दुकानदार ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस साल मूर्तियां महंगी थीं। उनके अनुसार, प्रतिमा तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, सजावट और अन्य खर्च बढ़ने से लागत बढ़ गई थी।
एक दुकानदार ने कहा कि पहले जो प्रतिमा करीब 1200 रुपये में तैयार या बेची जाती थी, उसमें इस साल लगभग 500 रुपये तक का अंतर आया था। ग्राहकों को जब नई कीमत बताई जाती थी तो वे भी इसे लेकर सवाल करते थे।
दुकानदारों ने यह भी बताया कि सिर्फ मूर्ति ही नहीं, बल्कि पूजा में इस्तेमाल होने वाले फूल, फल, नारियल, तेल, शक्कर और दूसरी सामग्री के दाम बढ़ने से ग्राहकों का पूरा बजट प्रभावित हुआ था।
गरीब और छोटे कारोबारियों पर ज्यादा दबाव
ग्राउंड रिपोर्ट में छोटे दुकानदारों और सड़क किनारे सामान बेचने वालों ने मोलभाव को लेकर भी अपनी परेशानी बताई। उनका कहना था कि छोटे कारोबारियों से ग्राहक काफी कम कीमत में सामान लेने की कोशिश करते थे, जबकि बड़े शोरूम में तय कीमत पर खरीदारी कर लेते थे।
एक दुकानदार ने बताया कि जिस सामान की कीमत 500 रुपये बताई जाती थी, ग्राहक कई बार 150 से 200 रुपये तक की कीमत लगाने लगते थे। दुकानदारों का कहना था कि उनकी अपनी लागत भी बढ़ी थी, इसलिए बहुत कम कीमत पर सामान बेचना उनके लिए मुश्किल था।
एक अन्य दुकानदार ने कहा कि पिछले साल त्योहार के दौरान जहां एक दिन में 7 से 8 हजार रुपये तक का सामान बिक जाता था, इस बार कई बार 500-600 रुपये की बिक्री भी मुश्किल हो रही थी। उनके मुताबिक, इसका सबसे ज्यादा असर छोटे और गरीब कारोबारियों पर पड़ा था।
ग्राहकों ने कहा- त्योहार का बजट बिगड़ा
बाजार में खरीदारी करने पहुंचे लोगों ने भी महंगाई को लेकर चिंता जताई। लोगों ने कहा कि त्योहार के समय पहले से ही घर का खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में पूजा सामग्री और दूसरी जरूरी चीजों के दाम बढ़ने से अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था।
एक ग्राहक ने कहा कि 100 या 150 रुपये की छोटी चीज खरीदने के लिए भी लोग कई बार सोच रहे थे। उनका कहना था कि पहले जितनी खरीदारी त्योहारों के दौरान होती थी, इस बार उतनी नहीं हो पा रही थी।
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि त्योहार अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि परिवार और समाज के साथ खुशियां बांटने का मौका भी होता है। लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण कई परिवारों को अपनी खरीदारी सीमित करनी पड़ रही थी।
बिजली बिल और रोजमर्रा के खर्च का भी उठा मुद्दा

बाजार में बातचीत के दौरान बिजली के बिल और रोजमर्रा के खर्च को लेकर भी लोगों ने अपनी परेशानी बताई। एक व्यक्ति ने कहा कि पहले जिन खर्चों को वे किसी तरह संभाल लेते थे, अब उनका असर घरेलू बजट पर ज्यादा पड़ रहा था।
एक अन्य दुकानदार ने इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने पेट्रोल का खर्च कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन लिया था, लेकिन उनके अनुसार बिजली के बिल में बढ़ोतरी के कारण अपेक्षित बचत नहीं हो पाई।
हालांकि, ये सभी बातें बाजार में बातचीत के दौरान लोगों और दुकानदारों ने अपने अनुभव के आधार पर कहीं थीं।
मिठाई कारोबारियों पर भी पड़ा असर
मिठाई कारोबार से जुड़े एक कारोबारी ने बताया कि कच्चे माल की कीमत बढ़ने से कारोबार पर असर पड़ा था। उनके अनुसार, बाजार में कारोबार में करीब 50 प्रतिशत तक का फर्क महसूस हुआ था।
उन्होंने कहा कि कच्चे माल के दाम बढ़ने के बावजूद उन्होंने अपनी कीमतों को यथासंभव नियंत्रित रखने की कोशिश की थी। उनका कहना था कि इससे मुनाफे पर असर पड़ा था, लेकिन ग्राहकों को राहत देने के लिए कीमतों को तुरंत बढ़ाना उचित नहीं समझा गया।
कारोबारियों ने यह भी कहा कि त्योहार से ठीक पहले कीमतों में बढ़ोतरी का असर ज्यादा दिखाई देता था, क्योंकि इसी समय लोगों को त्योहार की खरीदारी करनी होती थी।
सरकार से कीमतों पर नियंत्रण की मांग
ग्राउंड रिपोर्ट में लोगों से जब सरकार के लिए संदेश पूछा गया तो कई लोगों ने महंगाई को नियंत्रित करने की मांग की। कुछ लोगों ने सरकार की आर्थिक नीतियों और बढ़ती कीमतों को लेकर नाराजगी जताई। एक महिला ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अपनी राजनीतिक राय भी व्यक्त की और सरकार बदलने की बात कही। यह उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक प्रतिक्रिया थी।
वहीं, कुछ अन्य लोगों ने राजनीतिक टिप्पणी करने के बजाय सरकार से त्योहारों के आसपास जरूरी सामान की कीमतों पर ध्यान देने की मांग की। दुकानदारों का कहना था कि सरकार को कीमतों से जुड़े फैसले लेते समय त्योहारों के समय और छोटे कारोबारियों की स्थिति को भी ध्यान में रखना चाहिए।
त्योहार की खुशी और महंगाई के बीच बढ़ता अंतर
रायपुर के बाजार में हुई बातचीत से एक बात सामने आई कि महंगाई का असर केवल खरीदारों तक सीमित नहीं था। छोटे दुकानदार, मूर्ति विक्रेता, पूजा सामग्री बेचने वाले और मिठाई कारोबारी भी बढ़ी हुई लागत और कम बिक्री के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे थे।
ग्राउंड रिपोर्ट में लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि त्योहार मनाने की इच्छा पहले जैसी थी, लेकिन खर्च का हिसाब पहले से ज्यादा कठिन हो गया था। कई लोगों ने कहा कि उन्हें खरीदारी में कटौती करनी पड़ रही थी और जरूरी सामान को प्राथमिकता देनी पड़ रही थी।
रायपुर के बाजार की यह तस्वीर त्योहारों की भीड़ के बीच महंगाई के उस असर को दिखा रही थी, जो छोटे कारोबारियों से लेकर आम परिवारों तक दिखाई दे रहा था। लोगों की शिकायतों में अलग-अलग मुद्दे थे, लेकिन एक बात लगभग समान थी—त्योहार का बजट इस बार पहले से ज्यादा दबाव में था।












