नई दिल्ली। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में रेड चिल्ली लाइव की पत्रकार पूजा माथुर के खिलाफ दर्ज एफआईआर के विरोध मे एकता दिखाई है। यह एफआईआर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर(Saharanpur) में मस्जिद तोड़े जाने की उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग के बाद दर्ज की गई थी।
बैठक में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ) और नेटवर्क ऑफ वुमन इन मीडिया, इंडिया (NWMI) के पत्रकार और प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें प्रेस की स्वतंत्रता, महिला पत्रकारों की सुरक्षा और मैदानी रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर कानूनी-संस्थागत दबाव पर चर्चा हुई।
पूजा माथुर ने सहारनपुर रिपोर्टिंग का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने सहारनपुर में मस्जिद तोड़े जाने वाली जगह का दौरा किया, वहां मौजूद लोगों से बात की और मस्जिद के इमाम से इंटरव्यू लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी रिपोर्टिंग के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
बैठक में बोलते हुए माथुर ने कहा कि मैदानी रिपोर्टिंग के लिए पत्रकारों को डराना नहीं चाहिए।उन्होंने कहा कि दो की जगह 100 केस दर्ज कर दो। हम डरने वाले नहीं हैं। केस और दबाव से हमारी पत्रकारिता की आवाज कमजोर नहीं हो सकती। सच्चाई दिखाने और सवाल पूछने की जिम्मेदारी से हम पीछे नहीं हटेंगे।”उन्होंने स्वतंत्र पत्रकारों को सिर्फ यूट्यूबर कहकर खारिज करने की बात भी खारिज की।हमें सिर्फ यूट्यूबर मत समझिए।
हम गंभीर पत्रकार हैं, योग्य हैं और ऑनलाइन जाने से पहले रिसर्च करते हैं।”“उन्होंने कहा कि उनकी रिपोर्टिंग का मकसद वहां की स्थिति दिखाना और लोगों की बात जनता तक पहुंचाना था।
बैठक में पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव ने भी बात रखी। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछने की कोशिश के बाद ऑनलाइन ट्रोलिंग और धमकियों का जिक्र किया।उन्होंने कहा, “सवाल पूछना कोई पाप नहीं है। यह मेरी पत्रकार के रूप में जिम्मेदारी है।”अन्य महिला पत्रकारों ने भी देश के अलग-अलग हिस्सों में रिपोर्टिंग के दौरान उत्पीड़न और दबाव के अनुभव साझा किए।
स्वतंत्र पत्रकार बिंदु रोमी गुज्जर और मोनिका सिंह ने मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी बच्चों की मौतों पर अपनी रिपोर्टिंग का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी गांवों और सरकारी अस्पतालों की स्थिति दिखाने के बाद उन्हें दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ा।शाहीन और नफीसा ने पुलिस हिरासत का जिक्र किया।4PM न्यूज की पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान ने 3 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के दौरे की कवरेज के दौरान साकेत पुलिस स्टेशन में कथित हिरासत और हमले का जिक्र किया।
आरोप लगाया कि सवाल पूछने की कोशिश के बाद उन्हें पुलिस स्टेशन ले जाया गया और हिरासत में उन पर हमला हुआ। उन्होंने पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग भी की है।
पत्रकार संगठनों ने दिया समर्थन
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की अध्यक्ष संगीता बरुआ पिशारोटी, महासचिव अफजाल इमाम, DUJ की अध्यक्ष सुजाता मधोक, NWMI की प्रतिनिधि दिव्या आर्या, पत्रकार खुशबू अख्तर और कैरवान के संपादक हर्तोश सिंह बाल समेत कई लोगों ने पत्रकारों के साथ एकजुटता जताई।माथुर ने पत्रकार संगठनों और समर्थकों का आभार जताया।
उन्होंने कहा, “केस और दबाव बावजूद हम सवाल पूछते रहेंगे और मैदान से सच्चाई दिखाते रहेंगे। हम सच्चाई की आवाज उठाते और दिखाते रहेंगे।”बैठक में रिपोर्टिंग के कारण दबाव या कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे पत्रकारों के लिए कानूनी और संस्थागत समर्थन बढ़ाने की मांग की गई।









