छत्तीसगढ़ में 21 सितंबर से स्वास्थ्य व्यवस्था होगी ठप्प, 5 हजार सरकारी डॉक्टरों के हड़ताल का ऐलान

रायपुर। छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। राज्य में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन के मुताबिक, मांगों को लेकर करीब छह महीने से सरकार के समक्ष लगातार पत्राचार और ज्ञापन दिए जा रहे हैं लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद अब आंदोलन का रास्ता अपनाया जा रहा है। इस आंदोलन में करीब 5 हजार डॉक्टरों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। इस हड़ताल में CIDA (छत्तीसगढ़ इन्सर्विस डॉक्टर एसोसिएशन) और CGDF (छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन) ने भी समर्थन का ऐलान किया है। इस आंदोलन के अंर्तगत प्रदेश के सभी CHC, PHC और स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत रेजिडेंट डॉक्टर्स, इंटर्न्स और बॉण्डेड डॉक्टर्स हड़ताल में रहेंगे।

JDA छत्तीसगढ़ ने द लेंस को बताया कि आंदोलन का पहला चरण 21 सितंबर 2026 से शुरू होगा। इस दौरान OPD सेवाओं के कार्य बहिष्कार के साथ IPD से जुड़ी नियमित/निर्धारित सेवाओं और अन्य elective एवं non-emergency कार्यों के बहिष्कार का निर्णय लिया गया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार की ओर से उनकी मांगों पर सकारात्मक और समाधानकारी पहल नहीं होती है तो आंदोलन को अगले चरण में और विस्तारित किया जाएगा।

एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा है कि विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से सरकार और संबंधित विभागों के समक्ष अपनी बात रखी जा रही है। संगठन के अनुसार, 17 सूत्रीय मांगों को लेकर पूर्व में 15 दिन का समय भी दिया गया था लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। JDA ने इसे अपने सदस्यों के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैया बताते हुए आंदोलन को अंतिम विकल्प के रूप में पेश किया है।

23 सितंबर से बढ़ सकता है आंदोलन का दायरा

JDA के प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, यदि 21 सितंबर के आंदोलन के बाद भी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है तो 23 सितंबर 2026 से आंदोलन का दूसरा चरण शुरू किया जाएगा। संगठन ने कहा है कि इस चरण में सेवाओं के बहिष्कार का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, JDA ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि आपातकालीन सेवाओं और मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक चिकित्सा सेवाओं को लेकर स्थिति के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।

एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, अधिकारी, मेडिकल कॉलेज, जिला प्रशासन या शासन के खिलाफ जाना नहीं है। संगठन के मुताबिक आंदोलन का उद्देश्य चिकित्सकों की न्यायसंगत एवं नीतिगत मांगों, सेवा व्यवस्था में समानता और चिकित्सकों के भविष्य एवं करियर की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान कराना है।

17 सूत्रीय मांगों पर सरकार से कार्रवाई की मांग

JDA ने शासन से 17 सूत्रीय मांगों पर तत्काल उच्चस्तरीय बैठक बुलाने और समाधान की दिशा में ठोस निर्णय लेने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि मांगों पर स्पष्ट निर्णय और रोडमैप तैयार होने से आंदोलन को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि यदि सरकार की ओर से सकारात्मक पहल होती है तो प्रस्तावित आंदोलन को आगे बढ़ाने के बजाय समाधान की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी।

डॉक्टरों के प्रस्तावित आंदोलन से राज्य की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। खासतौर पर OPD और गैर-आपातकालीन सेवाओं के प्रभावित होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, आंदोलन के दौरान आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं को किस स्तर तक संचालित रखा जाएगा, यह संगठन और संबंधित संस्थानों की आगामी व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now