कोसा में दलित युवक अमित भंडारी की मौत पर फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट, प्रेम संबंध और पुलिस जांच को लेकर उठे गंभीर सवाल

जांजगीर-चांपा। मुलमुला थाना क्षेत्र के ग्राम कोसा में 25 वर्षीय दलित(Dalit) युवक अमित भंडारी की मौत के मामले में एक स्वतंत्र फैक्ट फाइंडिंग टीम ने पुलिस जांच की प्रक्रिया और अब तक की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 4 सितंबर 2026 को तैयार की गई रिपोर्ट में ग्रामीणों और परिजनों के बयान दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट में घटना को कथित तौर पर प्रेम संबंध और जातीय तनाव से जोड़कर देखा गया है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

27 जून की रात लापता हुआ अमित, दो दिन बाद मिला शव

रिपोर्ट के मुताबिक अमित भंडारी 27 जून 2026 की रात घर से बाहर गया था। परिजनों के अनुसार देर रात तक उसके घर नहीं लौटने पर तलाश शुरू की गई। परिवार ने मुलमुला थाने में गुमशुदगी की सूचना दी। 29 जून की सुबह अमहा तालाब के पास एक शव मिलने की सूचना मिली, जिसकी पहचान अमित भंडारी के रूप में हुई। परिवार के मुताबिक शव के हाथ और पैर पर चोट व बांधे जाने के निशान दिखाई दिए थे। छाती, चेहरे और सिर पर भी चोट के निशान होने का दावा किया गया है। इन परिस्थितियों को लेकर परिवार ने हत्या की आशंका जताई और पुलिस से आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की।

प्रेम संबंध को लेकर गांव में थी चर्चा

फैक्ट फाइंडिंग टीम को ग्रामीणों ने बताया कि अमित भंडारी और गांव की ही संतोषी सिंह के बीच कई वर्षों से कथित प्रेम संबंध था। ग्रामीणों के अनुसार संतोषी की शादी दूसरे गांव में हो चुकी थी और उसके बच्चे भी हैं, लेकिन वह पिछले कुछ समय से अपने मायके में रह रही थी। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि दोनों परिवारों के बीच इस संबंध को लेकर तनाव और अमित को कथित तौर पर चेतावनी दिए जाने की चर्चा गांव में थी। हालांकि फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में दर्ज ये बातें ग्रामीणों और परिजनों के बयानों पर आधारित हैं, इन्हें पुलिस जांच या न्यायिक प्रक्रिया में साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।

परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

रिपोर्ट में अमित के भाई अमृत लाल भंडारी, भाभी लक्ष्मी भंडारी और उसके मित्र विनोद घृतलहरे समेत अन्य ग्रामीणों के बयान शामिल हैं। इन बयानों में पुलिस पूछताछ के दौरान कथित मारपीट, दबाव और अपराध कबूल कराने की कोशिश के आरोप लगाए गए हैं। विनोद ने फैक्ट फाइंडिंग टीम को बताया कि पुलिस ने उससे अमित की हत्या में शामिल होने की बात स्वीकार करने का दबाव बनाया और मारपीट की। वहीं लक्ष्मी भंडारी ने भी पूछताछ के दौरान मारपीट और बिजली का करंट देने की धमकी का आरोप लगाया। ये सभी आरोप पीड़ित पक्ष और ग्रामीणों के बयान हैं; रिपोर्ट में पुलिस की ओर से इन आरोपों की कोई विस्तृत प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।

डॉग स्क्वायड की कार्रवाई पर भी रिपोर्ट में सवाल

परिवार के बयान के अनुसार 29 जून को शव मिलने के बाद पुलिस ने डॉग स्क्वायड बुलाया था। रिपोर्ट में दावा है कि खोजी कुत्ता शव मिलने की जगह से होते हुए संतोषी सिंह के घर तक गया और वहां एक फावड़े के पास भी रुका। घर के पीछे दीवार पर खून जैसे छींटे, टूटी प्लास्टिक कुर्सी और धुले हुए कपड़े मिलने का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने कपड़ों को जब्त किया, लेकिन पूजा स्थल पर मिली तलवार को जब्त नहीं किया गया। इन तथ्यों को लेकर फैक्ट फाइंडिंग टीम ने जांच की दिशा और साक्ष्यों के संरक्षण पर सवाल उठाए हैं।

नई जांच टीम गठित, परिवार की सुरक्षा का दावा

फैक्ट फाइंडिंग टीम जब मुलमुला थाने पहुंची तो उसकी मुलाकात नए थाना प्रभारी शिवानंद सिंह से हुई। रिपोर्ट के अनुसार थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की त्वरित जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जिला स्तर पर पुलिस टीम गठित की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि कोसा गांव में मृतक के परिवार की सुरक्षा के लिए चेक पोस्ट स्थापित किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एफआईआर 30 जून 2026 को दर्ज की गई थी और 9 सितंबर तक मामले में खुलासा नहीं हुआ था। फैक्ट फाइंडिंग टीम ने एफआईआर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराएं जोड़े जाने की जरूरत भी बताई है।

रिपोर्ट में मुलमुला थाना क्षेत्र में दलितों के खिलाफ पूर्व में हुई कुछ घटनाओं का भी उल्लेख करते हुए सम्मान आधारित अपराधों के लिए अलग कानूनी प्रावधान, ऐसे मामलों की अलग से रिकॉर्डिंग, विशेष या फास्ट ट्रैक अदालतों और पीड़ितों को पुलिस सुरक्षा व कानूनी सहायता देने जैसी सिफारिशें की गई हैं। साथ ही रिपोर्ट ने पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और कथित सम्मान आधारित हिंसा के मामलों में त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

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