लेंस न्यूज़ । ओडिशा के बालासोर जिले के एक छोटे से जंगल से शुरू हुई यह खबर अब दो देशों के बीच कूटनीतिक मुद्दा बन गई है। बालासोर के बिचित्रपुर जंगल में 5 दुर्लभ ओरंगुटान (orangutan) के बच्चे मिले हैं। ये जीव भारत में मूल रूप से नहीं पाए जाते। इंडोनेशिया ने इन्हें वापस मांग लिया है, जबकि ओडिशा सरकार इन्हें अपने पास रखना चाहती है। आखिर ये बच्चे कहां से आए और अब इनका भविष्य क्या होगा?
5 ओरंगुटान बच्चों की रेस्क्यू कैसे हुई?
8 सितंबर 2026 को बालासोर जिले के भोगराई स्थित बिचित्रपुर-कैसुआरिना जंगल में वन विभाग की टीम को 5 ओरंगुटान के बच्चे झाड़ियों में सहमे हुए मिले। इनमें तीन नर और दो मादा हैं। उम्र 6 महीने से 1 साल के बीच और लंबाई 1 से 1.5 फीट बताई गई है।
फिलहाल इन बच्चों को भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में रखा गया है। पार्क के डिप्टी डायरेक्टर प्रदीप मिरासे के अनुसार, इन्हें तापमान-नियंत्रित क्वारंटीन वार्ड में रखा गया है। डिहाइड्रेशन के लिए ORS और उचित आहार दिया जा रहा है। विशेषज्ञों की सलाह पर तनाव कम करने के लिए सॉफ्ट टॉयज दिए गए हैं और हल्का संगीत भी चलाया जा रहा है।
ओडिशा के वन मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने कहा कि ओरंगुटान ओडिशा की जलवायु में रह सकते हैं और उनके लिए इंडोनेशिया जैसा माहौल तैयार किया गया है। नंदनकानन में इनके लिए पहले से एक विशेष बाड़ा मौजूद है, जो 2019 में 41 वर्षीय मादा ओरंगुटान की मौत के बाद से खाली पड़ा था।
इंडोनेशिया की मांग और ओडिशा सरकार का रुख
इस मामले में अब पेंच फंस गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंडोनेशिया ने भारत सरकार से संपर्क किया है और इन 5 बच्चों को वापस सौंपने की मांग की है, क्योंकि ओरंगुटान उनका संरक्षित वन्यजीव है।
दूसरी तरफ, ओडिशा सरकार ने Central Zoo Authority (CZA) को पत्र लिखकर इन बच्चों को नंदनकानन में ही रखने की अनुमति मांगी है। अभी तक CZA की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। बिना CZA की मंजूरी के राज्य सरकार न तो इन्हें अपने पास रख सकती है और न ही किसी दूसरे देश को सौंप सकती है।
ये बच्चे ओडिशा कैसे पहुंचे? तस्करी का शक
सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये बच्चे ओडिशा के जंगल में कैसे पहुंचे, क्योंकि ओरंगुटान भारत का मूल जीव नहीं है। ओडिशा पुलिस की STF और Wildlife Crime Control Bureau (WCCB) संयुक्त जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का शक जताया जा रहा है।
जांच एजेंसियां एक बंगाली पिता-पुत्र की जोड़ी की तलाश कर रही हैं, जो कथित तौर पर बालासोर में इन बच्चों के साथ देखे गए थे और अब कोलकाता भाग गए हैं। हावड़ा स्थित उनके संभावित ठिकानों पर तलाश जारी है। आशंका है कि ये बच्चे म्यांमार या बांग्लादेश बॉर्डर के रास्ते भारत लाए गए और फिर यहां छोड़ दिए गए।
इंडोनेशिया में जंगल की आग और ओरंगुटान रेस्क्यू
इस केस को समझने के लिए इंडोनेशिया की मौजूदा स्थिति भी महत्वपूर्ण है। पश्चिम कालीमंतन में इस साल El Niño के कारण भीषण जंगल की आग लगी है, जिसे वहां ‘करहुतला’ कहा जाता है।
YIARI की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त अंत तक केतापांग में 7 और कुल मिलाकर 15 ओरंगुटान आग के कारण बचाए गए हैं। एक वयस्क नर सम्पूर्ण की धुएं से मौत भी हो गई है और सितंबर में भी आग जारी है।
अभी बाकी हैं कई बड़े सवाल
इस पूरे मामले के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
- क्या बालासोर में मिले 5 बच्चे इंडोनेशिया के उन्हीं जलते जंगलों से तस्करी होकर लाए गए हैं?
- भारत में वन्यजीव तस्करी का नेटवर्क कितना बड़ा है?
- क्या बंगाल-बांग्लादेश-म्यांमार रूट से लगातार ऐसे दुर्लभ जीव लाए जा रहे हैं?
- CZA क्या फैसला लेगा?
- क्या CITES कानून के तहत भारत को ये बच्चे इंडोनेशिया को लौटाने होंगे, या इन्हें भारतीय चिड़ियाघर में रखा जाएगा?
- अगर इन्हें भारत में रखा जाता है तो क्या नंदनकानन इनकी सही देखभाल कर पाएगा? ओरंगुटान को बहुत खास देखभाल और ह्यूमिड माहौल की जरूरत होती है।
- तस्करों को पकड़ने में देरी क्यों हो रही है? क्या स्थानीय स्तर पर भी कोई मिलीभगत है?
फिलहाल सभी की नजर CZA के जवाब और STF-WCCB की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।









