दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग की विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने छह साल की बच्ची से रेप और उसकी हत्या के मामले में 24 साल के सोमेश यादव को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को “दुर्लभतम से दुर्लभ” (rarest of rare) मामलों में माना। सुप्रीम कोर्ट ने 1973, 1979 और 1980 में मृत्युदंड की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था।
कोर्ट ने कहा था कि अगर कानून में मृत्युदंड का प्रावधान है और कानूनी प्रक्रिया निष्पक्ष, न्यायपूर्ण और उचित है, तो यह सजा दी जा सकती है, लेकिन केवल “दुर्लभतम से दुर्लभ” मामलों में। ऐसे मामलों में अदालत को मृत्युदंड देने के लिए विशेष कारण भी दर्ज करने होते हैं।
विशेष अदालत ने गुरुवार को सोमेश यादव को पॉक्सो एक्ट की धारा 6(1) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत दोषी ठहराया। ये धाराएं गंभीर यौन हमला और हत्या से जुड़ी हैं। दोनों धाराओं के तहत उस पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा BNS की धारा 238(a) के तहत भी उसे दोषी पाया गया।
यह धारा सबूत मिटाने या गलत जानकारी देने से संबंधित है। इस मामले में उसे पांच साल के कठोर कारावास और 1,000 रुपये के जुर्माने की सजा दी गई। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। अदालत ने राज्य सरकार की पीड़ित मुआवजा योजना के तहत बच्ची के परिवार को 7 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।
यह मामला अप्रैल 2025 का है, जब छह साल की बच्ची के लापता होने की सूचना दी गई थी। बाद में बच्ची एक वाहन में मिली और अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। जांच के दौरान मिले भौतिक और जैविक सबूतों, CCTV फुटेज और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर सोमेश यादव को दोषी ठहराया गया। अदालत ने इन साक्ष्यों के आधार पर उसे बच्ची से रेप और हत्या का दोषी माना और मामले को “दुर्लभतम से दुर्लभ” श्रेणी में रखते हुए मौत की सजा सुनाई।








