लेंस न्यूज। दिल्ली पुलिस की ओर से करीब नौ घंटे की पूछताछ के बाद रिहा किए गए रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट और पूर्व संचार नियंत्रक आशीष जोशी (Ashish Joshi)ने सोशल मीडिया पर दो चर्चित कविताएं साझा कीं। उन्होंने पहले फैज अहमद फैज की मशहूर क्रांतिकारी नज्म ‘हम देखेंगे’ और रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की चर्चित कविता ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ साझा की। पुलिस के करीब नौ घंटे पूछताछ के बाद आशीष जोशी ने करीब चार पोस्ट किए।
उन्होंने सबसे पहले लिखा- ’अभी-अभी घर वापस आया हूं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल मुझे घर छोड़कर गई है। पूरी जानकारी बाद में दूंगा।‘
इसके बाद उन्होंने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को संबोधित करते हुए परिवार को पूछताछ की जानकारी देने के अधिकार और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए।
आशीष जोशी ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा कि किसी व्यक्ति को पूछताछ या हिरासत में लिए जाने की स्थिति में उसके परिवार को जानकारी देना कानूनी दायित्व है, कोई वैकल्पिक शिष्टाचार नहीं। उन्होंने कहा किया कि उन्हें सुबह की सैर के बाद यह कहकर पूछताछ के लिए ले जाया गया था कि इसमें बहुत कम समय लगेगा, लेकिन घंटे बीतते गए।
उन्होंने आगे लिखा, ‘उन्होंने बार-बार अपनी पत्नी को अपने ठिकाने की जानकारी देने का अनुरोध किया, लेकिन संबंधित पुलिस अधिकारियों ने केवल इतना कहा कि वे आदेश का पालन कर रहे हैं।‘
आशीष जोशी ने लिखा कि उन्हें शाम 6:38 बजे ही फोन करने की अनुमति दी गई। उनका कहना है कि इस दौरान उनका परिवार और दोस्त पूरे दिन चिंता और घबराहट में रहे।
आशीष जोशी ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से सभी पुलिस इकाइयों को स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की कि पूछताछ के लिए किसी व्यक्ति को ले जाने पर उसके परिवार को तत्काल सूचना देने की कानूनी जिम्मेदारी का सख्ती से पालन किया जाए, ताकि किसी दूसरे परिवार को उस परेशानी से न गुजरना पड़े, जिसका सामना उनके परिवार ने किया।
वरिष्ठ पत्रकार ने कहा- इसे जोशी का पहला वक्तव्य माना जा सकता है
आशीष जोशी की पोस्ट को कवि, कथाकार और पत्रकार विष्णु नागर ने शेयर करते हुए लिखा कि ‘इसे आशीष जोशी का नौ घंटे की पुलिसिया पूछताछ के बाद दिया गया पहला वक्तव्य माना जा सकता है।’

उन्होंने जोशी की ओर से फैज की ‘हम देखेंगे’ साझा किए जाने को इस कार्रवाई के आगे नहीं झुकने के संकल्प के तौर पर देखा। वरिष्ठ पत्रकार ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भारत सरकार के दूरसंचार विभाग में संचार नियंत्रक रह चुके जोशी को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चाणक्यपुरी से उस समय ले जाया था, जब वे सुबह की सैर के लिए निकले थे।
उन्होंने ने यह भी कहा कि जोशी के परिवार को काफी देर तक उनके बारे में कोई जानकारी नहीं थी और उनकी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर पुलिस कार्रवाई की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला है तो पूछताछ के लिए उसे इस तरह ले जाने की प्रक्रिया कितनी उचित है।
हालांकि, आशीष जोशी की अपनी पोस्ट में फिलहाल पुलिस पूछताछ के मूल मामले या किस सोशल मीडिया पोस्ट के संबंध में उनसे पूछताछ की गई, इसका विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।








