रायपुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग का करीब 400 करोड़ रुपये के प्रिंटिंग काम से जुड़ा विवादित टेंडर (Government Printing Tender) निरस्त कर दिया गया है। विभाग ने 7 अगस्त 2026 को जारी ऑनलाइन टेंडर नंबर 469 को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का नोटिस जारी किया है। हालांकि, टेंडर रद्द करने की वजह के तौर पर विभाग ने केवल ’कुछ अपरिहार्य कारण’बताए हैं।
यह टेंडर उस समय विवादों में आया था, जब प्रदेश की प्रिंटिंग फर्मों ने इसकी प्रक्रिया और पात्रता शर्तों को लेकर मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। स्थानीय मुद्रण कारोबारियों ने आरोप लगाया था कि सरकारी प्रिंटिंग के करोड़ों रुपये के काम में सीमित फर्मों को लगातार अवसर मिल रहा है और टेंडर की कुछ शर्तें छोटे और मध्यम प्रिंटिंग कारोबारियों के लिए मुश्किल हैं।
स्थानीय प्रिंटिंग फर्मों की ओर से की गई शिकायत में पिछले कुछ वर्षों में शासकीय मुद्रणालय के जरिए हुए करीब 400 करोड़ रुपये के प्रिंटिंग कार्यों का जिक्र किया गया था।
शिकायतकर्ताओं ने पिछले टेंडरों, वर्क ऑर्डर, L-1 दरों और भुगतान की जांच कराने की मांग की थी। उनका आरोप था कि कुछ चुनिंदा फर्मों को लगातार सरकारी प्रिंटिंग के काम मिलते रहे हैं।
मुद्रण कारोबारियों ने इस पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की थी।
प्रिंटिंग फर्मों ने नए टेंडर की पात्रता शर्तों को लेकर भी आपत्ति जताई थी। शिकायत के मुताबिक टेंडर में शामिल होने के लिए 5 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर, वेब ऑफसेट मशीन समेत कई मशीनों और करीब 20 हजार वर्गफुट की अधोसंरचना जैसी शर्तें रखी गई थीं।
स्थानीय मुद्रकों का कहना था कि ऐसी शर्तों के कारण छोटे और मध्यम स्तर की प्रिंटिंग फर्मों के लिए टेंडर में भाग लेना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने सरकार से मांग की थी कि पात्रता शर्तों को इस तरह बनाया जाए, जिससे स्थानीय और सक्षम प्रिंटिंग फर्मों को भी समान अवसर मिल सके।
इसी विवाद के बीच शासकीय मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग के निदेशक कार्यालय ने 1 सितंबर 2026 को टेंडर कैंसिलेशन नोटिस जारी किया।
नोटिस में कहा गया है कि ऑनलाइन टेंडर नंबर 469, दिनांक 07/08/2026, जिसे विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित किया गया था और सरकारी वेबसाइट पर अपलोड किया गया था, उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है।









