उमरिया। मध्यप्रदेश के उमरिया जिले से स्कूली बच्चों का नदी पार करते हुए वीडियो सामने आया है। बच्चों का आधा शरीर पानी में डूबा हुआ है और स्कूल ड्रेस भी गीली हो चुकी है। अब इसी हाल में विद्यार्थी स्कूल जाते हैं। स्कूली बच्चों का यह वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो के बाद कलेक्टर ने कार्रवाई करते हुए प्राचार्य को निलंबित कर दिया है। लेकिन, सवाल उठता है कि यदि पुलिया नहीं बनी है तो उसका जिम्मेदार प्रशासन है या फिर प्राचार्य?
दरअसल, वायरल वीडियो उमरिया जिले के करकेली ब्लॉक अंतर्गत ग्राम मानिकपुर और बिलासपुर के बीच बड़की नदी का है। वीडियो में कुछ स्कूली बच्चों को उफनती नदी पार करते देखा जा सकता है। ये छात्र-छात्राएं अपने भविष्य को संवारने के लिए जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हुए नजर आ रहें हैं और रोजाना ही हायर सेकेंडरी स्कूल बिलासपुर जाते हैं।
कमर तक पानी के बीच स्कूल जा रहे छात्र
जानकारी के मुताबिक हर साल बारिश के कारण क्षेत्र की नदी-नाले उफान पर होते हैं और बच्चे तेज बहाव के बीच भी नदी पार कर स्कूल जाते हैं। आधा शरीर पानी में डूबने के बावजूद स्कूली बच्चे शॉर्टकट के चक्कर में बड़की नदी को पार करते हैं। यह वायरल वीडियो ना केवल बच्चों की परेशानी को उजागर कर करता है बल्कि ग्रामीण इलाकों के विकास की पोल भी खोलता है।
दस किलोमीटर की दूरी से बचने जोखिम में जान
मुख्य सड़क मार्ग से जाने के लिए बच्चों को दस किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। नदी पार करने के बाद यह दूरी बच जाती है इसलिए बच्चे इस शॉर्टकट का उपयोग करते हैं। मामले के सामने आने के बाद बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ अभिभावकों की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठ रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा लगातार लोगों से अपील की जा रही है कि बारिश के दौरान नदी-नालों के किनारे न जाएं और अपनी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। इसके बावजूद बच्चों का इस तरह उफनती नदी पार करना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
वर्षों से पुल का इंतजार
ग्रामीणों के मुताबिक बड़की नदी पर पुल की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। गांव के लोगों की ओर से कई बार पुल निर्माण की मांग उठाई गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका। पिछले वर्ष भी बच्चों के नदी पार कर स्कूल जाने का वीडियो सामने आया था। उस समय मामला सामने आने के बाद उम्मीद जगी थी, कि जल्द रास्ते की समस्या दूर होगी, लेकिन स्थिति में खास बदलाव नहीं आया। एक साल बाद फिर वही तस्वीर सामने है। बच्चे स्कूल जाने के लिए नदी के पानी में उतर रहे हैं और उनके हाथों में चप्पल और सिर में किताबों से भरे बस्ते हैं। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर यही रास्ता बच्चों के लिए और जोखिम भरा हो जाता
स्कूल प्राचार्य निलंबित
इस मामले में स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए प्राचार्य को निलंबित किया है, लेकिन सवाल यह है कि बच्चों को ऐसे खतरनाक रास्ते से जाने से रोकने के लिए अभिभावकों और स्थानीय लोगों की भूमिका क्या रही? साथ ही आखिर जब स्कूल इतना पास है तो घूम कर जाने से बेहतर एक पुलिया का निर्माण करवाकर बच्चों के समय को बचाया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा। वहीं प्राचार्य के निलंबन की जगह यदि उचित कदम उठाए गए होते तो यह दिन नहीं देखना पड़ता।
(उमरिया से सहयोगी विकाश शुक्ला)









