भूपेश बघेल का सरकार पर हमला: बोले- खनिज संशोधन कानून छत्तीसगढ़ के हितों के खिलाफ, स्कूलों की बदहाली पर सरकार को घेरा

Bhupesh Baghel

रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने मिनरल संशोधन अधिनियम 2026 को छत्तीसगढ़ के हितों के खिलाफ बताते हुए साय सरकार से सवाल पूछा है। भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि नए कानून से खनिज संपदा वाले छत्तीसगढ़ को भारी राजस्व नुकसान हो सकता है और राज्यों के वित्तीय अधिकार भी सीमित होंगे। उन्होंने सवाल किया कि जब दूसरे खनिज संपदा वाले राज्य इस कानून का विरोध कर रहे हैं, तो छत्तीसगढ़ की साय सरकार इस मुद्दे पर चुप क्यों है?

इसके अलावा स्कूलों की जर्जर स्थिति और प्रधानमंत्री आवास योजना के आंकड़ों को लेकर सरकार से जवाब मांगा। वहीं, वंदे मातरम को लेकर चल रहे विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को बिना टेलीप्रॉम्प्टर के पूरा वंदे मातरम गाने की चुनौती दी।

भूपेश बघेल ने कहा कि संसद के हालिया सत्र में बिना पर्याप्त चर्चा के खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 पारित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून राज्यों के वित्तीय अधिकारों को सीमित करता है और देश के संघीय ढांचे को कमजोर करता है।

कांग्रेस महासचिव के मुताबिक, कानून के लागू होने के बाद राज्य सरकारें अपने यहां निकलने वाले खनिजों पर उपकर (सेस) नहीं लगा सकेंगी। उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले के प्रभाव को निष्प्रभावी करने की कोशिश बताया।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, टिन और जिंक जैसे खनिजों से समृद्ध राज्य है। ऐसे में नए कानून का प्रदेश के आर्थिक हितों पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि केरल, झारखंड, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्य इस कानून के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार इस मुद्दे पर मौन क्यों है?

बघेल ने तंज कसते हुए कहा, ‘डबल इंजन की सरकार का यही फायदा है?’

जर्जर स्कूलों को लेकर ‘जेन अल्फा’ के सड़कों पर उतर रहे

पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश में स्कूल भवनों की खराब स्थिति को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत की मांग को लेकर बच्चे और युवा आंदोलन करने को मजबूर हैं।

उन्होंने धमतरी के बारना, धमधा, रायगढ़, मोहला-मानपुर, बलौदाबाजार, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ सहित कई इलाकों का जिक्र किया।

भूपेश बघेल ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ‘मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना’ के तहत करीब 30 हजार स्कूलों में मरम्मत और निर्माण कार्यों के लिए 1,807.68 करोड़ रुपये का प्रावधान और आवंटन किया गया था, जिसमें से करीब 1,191 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बाद भाजपा सरकार ने इस योजना को खत्म कर दिया और शेष आवंटन भी निरस्त कर दिया।

बघेल ने कहा कि स्कूल भवनों का रखरखाव नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन सरकार की कथित लापरवाही के कारण कई स्कूलों की छतें टपक रही हैं, शौचालय खराब हैं और कक्षाएं बच्चों के बैठने लायक नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि 10,463 स्कूल बंद किए जाने के बाद भी सरकार शेष स्कूलों की मरम्मत नहीं करा पा रही है।

प्रधानमंत्री आवास के आंकड़ों पर सरकार से जवाब मांगा

भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री आवास योजना के आंकड़ों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने 9 जून 2026 को मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में 18.5 लाख प्रधानमंत्री आवास पूर्ण होने की जानकारी दी थी।

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री के मुताबिक रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने 11 अगस्त 2026 को लोकसभा से मिली जानकारी का हवाला देते हुए प्रदेश में 9.81 लाख प्रधानमंत्री आवास पूरे होने की बात कही।

भूपेश बघेल ने कहा कि लोकसभा में मिली जानकारी के अनुसार पिछले पांच वर्षों में प्रदेश के लिए 15.45 लाख आवासों का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें 13.55 लाख आवास स्वीकृत हुए।

उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर सही कौन है और गलत कौन? बघेल ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि विजय शर्मा ने मुख्यमंत्री को गलत जानकारी दी या लोकसभा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल को गलत जानकारी दी गई।

‘मोदी और शाह बिना टेलीप्रॉम्प्टर के पूरा वंदे मातरम गाकर बताएं’

वंदे मातरम को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर भी भूपेश बघेल ने भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वंदे मातरम गाते हुए लाठियां और गोलियां खाईं।

उन्होंने कहा कि 1896 में कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार वंदे मातरम गाया गया था और उस समय भी इसके शुरुआती दो पद ही गाए गए थे। बघेल के मुताबिक इन शुरुआती पदों में मातृभूमि की वंदना है और वर्षों से इन्हें स्वीकार किया जाता रहा है।

बघेल ने कहा कि 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं ने वंदे मातरम के शुरुआती दो अंतरों को गाने का फैसला लिया था।

उन्होंने भाजपा पर वंदे मातरम के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और कहा कि इतने वर्षों बाद अचानक पूरे छह अंतरे गाने का दबाव क्यों बनाया जा रहा है?

पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चुनौती देते हुए कहा कि ‘बिना टेलीप्रॉम्प्टर के पूरा वंदे मातरम गाकर सुनाएं।’

बघेल ने कहा कि वंदे मातरम को लेकर नया विवाद खड़ा करने के बजाय देश को स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास और उस समय लिए गए निर्णयों को समझना चाहिए।

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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