लोकायुक्त की कार्रवाई की अनुशंसा के बाद भी ऊंचे पदों पर नियुक्ति! डॉ. जोशी को लेकर PM मोदी से सांसद ने पूछा बड़ा सवाल

Dr Sachchidanand Joshi

नई दिल्ली। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के करीब 10 साल तक कुलपति रहे Dr Sachchidanand Joshi की हालिया नियुक्तियों को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में सदस्य-सचिव और भारतीय विरासत संस्थान, नोएडा के कुलपति जैसे महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. जोशी को लेकर बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शिकायत भेजी है।

सांसद ने आरोप लगाया है कि रायपुर विश्वविद्यालय में उनके कार्यकाल के दौरान हुई शिक्षक भर्ती में अनियमितताओं को लेकर लोकायुक्त ने कार्रवाई की अनुशंसा की थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इन पुराने मामलों के बावजूद उन्हें केंद्र के महत्वपूर्ण संस्थानों में जिम्मेदारी देने से पहले क्या पर्याप्त जांच की गई थी?

डॉ. सच्चिदानंद जोशी कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति रहे हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) की आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने विश्वविद्यालय में दो कार्यकाल यानी करीब 10 वर्ष तक कुलपति के रूप में काम किया। 2013 और 2014 के उपलब्ध रिकॉर्ड में भी वे विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में दर्ज हैं।

क्या है नियुक्तियों का पूरा मामला?

सांसद की शिकायत के मुताबिक विवाद विश्वविद्यालय में शिक्षकों की भर्ती से जुड़ा है। उस समय डॉ. सच्चिदानंद जोशी कुलपति होने के साथ-साथ भर्ती के लिए गठित चयन समिति के अध्यक्ष भी थे।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान कुछ ऐसे अभ्यर्थियों को भी इंटरव्यू के लिए बुलाया गया, जिन्हें विश्वविद्यालय की स्क्रूटिनी समिति ने पात्र नहीं माना था। इसके अलावा कुछ अभ्यर्थियों को अकादमिक योग्यता और अनुभव के आधार पर निर्धारित मानकों से अधिक अंक देने तथा कुछ को अपेक्षाकृत कम अंक देने के आरोप भी लगाए गए।

शिकायत में आशुतोष मंडावी के मामले का उदाहरण दिया गया है। आरोप के मुताबिक उन्हें एक श्रेणी में निर्धारित 5 अंकों के बजाय 8 अंक दिए गए। इसी तरह अनुभव के अंकों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

पंकज नयन पाण्डेय के मामले में शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें स्क्रूटिनी में अयोग्य पाए जाने के बावजूद इंटरव्यू के लिए बुलाया गया और बाद में उनका चयन हुआ। शैलेन्द्र खंडेलवाल के अनुभव और अकादमिक उपलब्धियों के लिए दिए गए अंकों पर भी सवाल उठाए गए। वहीं विभाष झा को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था, लेकिन उनका चयन नहीं हुआ।

इनमें से कुछ नाम आज भी विश्वविद्यालय से जुड़े रहे हैं। विश्वविद्यालय के हालिया रिकॉर्ड में पंकज नयन पाण्डेय और आशुतोष मंडावी को शैक्षणिक जिम्मेदारियों में दर्ज किया गया है।

लोकायुक्त जांच में क्या सामने आया?

सांसद की ओर से प्रधानमंत्री को भेजी गई शिकायत के अनुसार, मामले में छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग से तथ्यात्मक रिपोर्ट मंगाई गई थी। इसके बाद प्रकरण लोकायुक्त के सामने भी गया।

शिकायत में उद्धृत लोकायुक्त की अनुशंसा के मुताबिक भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित चयन मापदंडों के पालन और अयोग्य पाए गए अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में शामिल करने को लेकर गंभीर सवाल उठे। लोकायुक्त ने कथित तौर पर अकादमिक योग्यता और अनुभव के आधार पर दिए गए 80 प्रतिशत अंकों का पुनर्मूल्यांकन करने तथा इंटरव्यू के अंकों को जोड़कर मेरिट दोबारा तैयार करने की अनुशंसा की।

साथ ही, यदि पुनर्मूल्यांकन के बाद कोई अभ्यर्थी अयोग्य पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की बात भी कही गई है।

फिर ऊंचे पदों पर नियुक्ति क्यों?

सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री के सामने इसी सवाल को प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि जब डॉ. जोशी के पूर्व कार्यकाल से जुड़े मामले में प्रतिकूल टिप्पणियां और कार्रवाई की अनुशंसा मौजूद थीं, तो केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति से पहले उनकी सत्यनिष्ठा और सतर्कता जांच किस स्तर पर की गई?

डॉ. जोशी को 2016 में IGNCA का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया था। IGNCA की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक उनकी नियुक्ति को कैबिनेट की नियुक्ति समिति यानी ACC की मंजूरी मिली थी। वे वर्तमान में भी IGNCA के सदस्य सचिव के रूप में आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज हैं।

सांसद ने प्रधानमंत्री से उनके IGNCA कार्यकाल से जुड़े नियुक्तियों, संविदा नियुक्तियों, पद सृजन, खरीद, टेंडर, निर्माण, किराया, परामर्श सेवाओं और वित्तीय फैसलों की भी जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा वाराणसी में संविदा नियुक्तियों में आरक्षण रोस्टर के कथित उल्लंघन की जांच की मांग भी पत्र में की गई है।

भारतीय विरासत संस्थान की जिम्मेदारी पर भी सवाल

शिकायत में डॉ. जोशी को भारतीय विरासत संस्थान, नोएडा के कुलपति पद की जिम्मेदारी दिए जाने का भी उल्लेख है। सांसद ने मांग की है कि दोनों महत्वपूर्ण पदों पर उनकी नियुक्ति से पहले हुई सतर्कता जांच और उपलब्ध प्रतिकूल रिकॉर्ड की समीक्षा की जाए।

उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि यदि जांच में कोई नियुक्ति नियमों के विरुद्ध पाई जाती है तो उसे रद्द किया जाए और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

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