लीक ई मेल से बड़ा खुलासा, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर ऑटो कंपनियां भारी बाव में पलटी


नेशनल ब्यूरो,नई दिल्ली। भारत सरकार और सड़क एवं राजमार्ग परिवह मंत्री नितिन गडकरी ने जब सार्वजनिक रूप से आश्वासन दिया कि उसका इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (ethanol-blended petrol) सुरक्षित है। इसके कुछ घंटों बाद ही देश के मुख्य ऑटो लॉबी ने एक सप्ताह पहले सरकार को भेजी गई ईंधन के मिलावट से संबंधी शिकायत वापस ले ली। समूह ने कहा कि कुछ आंकड़ों की और जांच की जरूरत है।लेकिन उद्योग के अधिकारियों के बीच अलग-अलग हुई बातचीत को लेकर न्यूज आउटलेट रॉयटर्स ने चौंकाने वाली जानकारी दी है।

समाचार एजेंसी रायटर्स के अनुसार कार निर्माताओं के आपसी ईमेल पहली बार दिखाते हैं कि वे निजी तौर पर E20 में क्लोराइड और नमी को लेकर चिंतित हैं, जो उनके अनुसार वाहनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जबकि सार्वजनिक रूप से वे सरकार के ईंधन रोलआउट का समर्थन करते हैं।

हैरतअंगेज नतीजे आए सामने

रायटर्स का दावा है कि शिकायत वापस लेने से पहले के दिनों में शीर्ष ऑटोमेकर्स मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा ने 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के संदूषण को लेकर अपनी चिंताएं साझा की थीं।उनके डेटा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा पिछले साल प्रदूषण कम करने और तेल आयात घटाने के लिए देशभर में E20 लागू करने के बाद उद्योग द्वारा किया गया अब तक का सबसे व्यापक ईंधन टेस्टिंग डाटा कलेक्ट किया था । जिसमें हैरतअंगेज नतीजे सामने आए।

पेट्रोल में मिली क्लोराइड और नमी

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने 28 जुलाई के ईंधन संदूषण संबंधी पत्र को सरकार और सार्वजनिक हंगामे के बाद वापस ले लिया। उन्होंने कहा कि कुछ आंकड़ों की प्रमाणिकता की जरूरत है।रॉयटर्स द्वारा समीक्षित पहले डेटा और ईमेल दिखाते हैं कि कई ऑटोमेकर्स पहले ही व्यापक परीक्षण कर चुके थे। उन्होंने एक साल में भारत के 36 राज्यों और क्षेत्रों में से 21 से 250 से अधिक ईंधन नमूने पंपों से एकत्र किए। उन्होंने 18 राज्यों में कई नमूनों में उच्च क्लोराइड संदूषण पाया, साथ ही उच्च नमी सामग्री भी।अधिकारियों के ईमेल में डेटा की प्रमाणिकता को लेकर कोई चिंता नहीं जताई गई।

मारुति, टाटा और महिंद्रा की थी चिंताएं

निजी ईमेल पर टिप्पणी के लिए पूछे जाने पर SIAM ने रॉयटर्स को बताया कि डेटा केवल इंटरनल ऑपरेशन, चर्चा और सत्यापन के लिए था, और इसे बहुत कम ऑटोमेकर्स ने एकत्र किया था।मारुति, टाटा और महिंद्रा, जो रॉयटर्स द्वारा देखे गए SIAM आंतरिक ईमेल का हिस्सा थे, भारत के कार बाजार का 67 फीसदी हिस्सा रखते हैं। SIAM ने कहा कि ‘परीक्षण आधार और नमूना आकार निश्चित निष्कर्षों का समर्थन करने के लिए अपर्याप्त थे, इसलिए पत्र वापस ले लिया गया क्योंकि यह अनजाने में भेजा गया था। उन्होंने जोड़ा कि वे उचित वैज्ञानिक अध्ययन करने का इरादा रखते हैं।

पेट्रोलियम मंत्रालय खामोश

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया। मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि SIAM का पत्र मिलने से दो सप्ताह पहले ही भारत की तेल विपणन कंपनियों ने खुदरा आउटलेट्स पर संदूषण जांच के लिए सख्त परीक्षण शुरू कर दिया था।उन्होंने कहा कि केवल चार संदूषण के मामले मिले। महिंद्रा ने कहा कि उसके अधिकारी के ईमेल से निकाले गए निष्कर्ष पूरी तरह आधारहीन और गलत हैं, उद्योग डेटा सीमित और प्रारंभिक है, और वह E20 में कोई समस्या नहीं देखता।

मारुति और टाटा अपने बयानों से पलटे

मारुति और टाटा ने अपनी टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया।ऑटो उद्योग ने क्लोराइड चिंताओं को लेकर सरकार से मुलाकात कीE20 ने मोटर चालकों को नाराज किया है। सैकड़ों लोगों का आरोप है कि इससे माइलेज कम हुआ और कारों में घिसावट बढ़ी, तथा कम से कम एक अदालती चुनौती भी सामने आई।SIAM ने पहले कहा था कि क्लोराइड के उच्च स्तर ऑटो पार्ट्स के लिए संक्षारक हैं जबकि ईंधन में उच्च नमी स्तर ईंधन भरने के तुरंत बाद वाहन को स्थिर कर सकता है।

मारुति ने पेट्रोलियम मंत्रालय से की थी बातचीत

मारुति, टाटा, महिंद्रा और SIAM के बीच ग्रुप ईमेल में मारुति के वरिष्ठ अधिकारी अनूप भट्ट ने उच्च क्लोराइड निष्कर्षों पर चिंता जताई और कहा कि इस पर 26 जुलाई को पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ निजी चर्चा हुई थी।उद्योग द्वारा ग्रुप ईमेल में साझा किए गए राज्य-वार निष्कर्षों में राजस्थान में क्लोराइड स्तर 6 से 570 पार्ट्स प्रति मिलियन (ppm), राजधानी नई दिल्ली में 1.4 से 420 ppm और महाराष्ट्र में 10 से 357 ppm दर्ज किए गए।भारतीय सरकार कहती है कि अनुमेय सीमा 3 ppm है।

E20 पेट्रोल में जबरदस्त नमी का खुलासा

डेटा तालिकाओं में नमी स्तर आंध्र प्रदेश में 13,000 ppm और उत्तर प्रदेश में 12,500 ppm तक पहुंचा, जबकि सरकार का अनुमेय बेंचमार्क 3,000 ppm है।संदूषण का कारण ज्ञात नहीं है, लेकिन SIAM ने अपने अब वापस लिए गए पत्र में कहा कि E20 रोलआउट के बाद क्लोराइड स्तर में वृद्धि देखी गई है और सरकार से तेल विपणन कंपनियों को मूल कारण खोजने का निर्देश देने का अनुरोध किया।

200 किमी चलाने पर ही वहां खराब होने का अंदेशा

महिंद्रा के फ्लूइड्स टेक्नोलॉजी के वरिष्ठ प्रमुख इंजीनियर आर. रामप्रभु ने ईमेल में कहा कि ऑर्गेनिक क्लोराइड वह संदूषक है जो उद्योग द्वारा देखी जा रही बहुत तेजी से वाहन विफलताओं के लिए जिम्मेदार है और इंजन को 200 किमी के भीतर खराब कर सकता है।अधिकांश मामले ईंधन भरने के तुरंत बाद रिपोर्ट किए गए.ऑर्गेनिक क्लोराइड के कारण हैं। उन्होंने लिखा और जोड़ा कि महिंद्रा के पास खुदरा आउटलेट्स से ईंधन नमूना डेटा के मजबूत सबूत हैं।महिंद्रा के रामप्रभु और मारुति के भट्ट ने रॉयटर्स के प्रश्नों का जवाब नहीं दिया।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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