स्टेशनों का पानी पीने लायक नहीं,CAG रिपोर्ट में खुलासा, कई स्टेशनों पर मिला खतरनाक E-Coli

नई दिल्ली। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए उपलब्ध पीने के पानी और बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संसद में 12 अगस्त को पेश इस रिपोर्ट में 512 गैर-उपनगरीय स्टेशनों की जांच की गई। कई जगहों पर पानी की गुणवत्ता में खामियां मिलीं और दर्जनों स्टेशनों पर जरूरी सुविधाएं मानकों से कम पाई गईं।

पानी में मिला खतरनाक बैक्टीरिया

सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई स्टेशनों के वाटर कूलर के पानी में E-Coli बैक्टीरिया पाया गया। दक्षिण रेलवे के कोयंबटूर और पालक्काड जंक्शन, दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद स्टेशन, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला तथा पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन के पानी के सैंपल में E-Coli की पुष्टि हुई।

रिपोर्ट के अनुसार छह रेलवे जोन के 59 स्टेशनों पर पीने के पानी की बैक्टीरियोलॉजिकल जांच ही नहीं कराई गई। प्लेटफॉर्म के नलों से लिए गए सैंपलों में भी कई जगह खतरनाक बैक्टीरिया मिले। 2022-23 में आठ जोन के 49 स्टेशनों और 2023-24 में नौ जोन के 56 स्टेशनों के पानी में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए, जिनमें E-Coli भी शामिल हो सकता है।

89 फीसदी स्टेशनों पर जरूरी सुविधाओं की कमी

CAG ने पाया कि 512 चयनित स्टेशनों में से 458 यानी 89 फीसदी से ज्यादा पर न्यूनतम जरूरी यात्री सुविधाएं रेलवे बोर्ड के अप्रैल 2018 के मानकों के मुताबिक नहीं थीं। इनमें पीने का पानी, वेटिंग हॉल, बैठने की व्यवस्था, प्लेटफॉर्म शेल्टर, यूरिनल, शौचालय, पंखे, फुट ओवरब्रिज, डस्टबिन और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम शामिल हैं।

यहां तक कि NSG-1 श्रेणी के बड़े स्टेशन भी नहीं बचे। CSMT, हावड़ा, सियालदह, नई दिल्ली और मुंबई सेंट्रल जैसे स्टेशनों पर बैठने की जगह, यूरिनल, शौचालय, डस्टबिन और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन इंडिकेटर बोर्ड में कमी मिली। 12 बड़े स्टेशनों पर पानी के नलों की कमी, आठ-आठ पर पंखे और वाटर कूलर की कमी सामने आई।
कुल मिलाकर 201 स्टेशनों पर शौचालय, 403 पर यूरिनल और 2,035 स्टेशनों पर पानी के नलों की कमी दर्ज की गई।

CAG की सिफारिशें

CAG ने रेलवे को पानी की सप्लाई और गुणवत्ता की नियमित जांच के प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की सलाह दी है। ऑडिटर ने कहा कि पीने के पानी की पूरी और एक समान मानकों के तहत जांच होनी चाहिए।

यह रिपोर्ट 2019-20 से 2023-24 के दौरान किए गए ऑडिट पर आधारित है। NSG श्रेणी के करीब 5,908 स्टेशनों से 2023-24 में रोजाना हजारों ट्रेनें चलीं और करोड़ों यात्रियों ने सफर किया। रिपोर्ट ने रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं और साफ-सफाई की स्थिति को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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