नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने कोडीन युक्त cough syrupकी तस्करी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों की जमानत याचिकाओं की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने कहा कि पक्षकारों की ओर से जज से सीधे संपर्क करने की कोशिश की गई, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला है।न्यायमूर्ति पहल भोला प्रसाद की जमानत याचिका सुन रहे थे।
भोला प्रसाद कोडीन कफ सिरप गिरोह के मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के पिता हैं। शुभम फरार हैं। मामले में लगभग 75-80 जुड़ी जमानत याचिकाएं लंबित थीं।अदालत ने नोट किया कि सभी संबंधित मामलों में दलीलें पूरी हो चुकी थीं और आदेश सुरक्षित रख लिया गया था। इसके बाद आरोपी की ओर से पीठासीन न्यायाधीश से सीधे संपर्क करने और प्रभावित करने का कथित प्रयास किया गया।
न्यायमूर्ति पहल ने मजबूत शब्दों में कहा कि यह घटना “न्यायालय के इतिहास का काला दिन” है। उन्होंने दोहराया कि “न्याय होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होते हुए भी दिखना चाहिए”। अदालत ने कहा कि न्यायिक निर्णय प्रक्रिया में हस्तक्षेप या प्रभाव डालने का कोई भी प्रयास, चाहे कितना भी सूक्ष्म हो, कानून के शासन पर सीधा हमला है। अगर ऐसी हरकतों को नजरअंदाज किया जाए तो न्यायिक स्वतंत्रता की जड़ें कमजोर होंगी और आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास डगमगाएगा।
न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता, गरिमा और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए न्यायमूर्ति पहल ने इन मामलों से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने लगभग 80 जुड़ी जमानत याचिकाओं को मुख्य न्यायमूर्ति के समक्ष रखने का निर्देश दिया, ताकि उन्हें किसी उपयुक्त पीठ को सौंपा जा सके। अगली सुनवाई 7 अगस्त को मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा नामित पीठ के समक्ष होनी है।अदालत ने इसे न्यायिक शालीनता पर आघात और हाईकोर्ट परिसर में पूरी तरह असहनीय बताया।








