नई दिल्ली। Lok Sabha में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर मंगलवार को दिनभर चली लंबी चर्चा के बावजूद विधेयक पारित नहीं हो सका। दोपहर 2 बजे शुरू हुई बहस रात करीब 11 बजे तक चली, लेकिन कई सांसदों के बोलने के लिए समय बाकी रहने के कारण स्पीकर ने सदन की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी। अब इस विधेयक पर बुधवार को फिर चर्चा होगी। इसके बाद विधेयक को राज्यसभा में भी पेश किया जाएगा।
चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके, एनसीपी (शरद पवार) समेत विपक्षी दलों ने सरकार को पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली और छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर घेरा। वहीं भाजपा और एनडीए के सहयोगी दलों ने विधेयक का समर्थन करते हुए इसे परीक्षा माफिया पर सख्त कार्रवाई की दिशा में बड़ा कदम बताया।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार बताएं बच्चों पर लाठीचार्ज क्यों कराया गया। आखिर में उन्होंने कहा कि GenZ का दिल जीतना है तो प्रधानमंत्री को कैमरे का नहीं दिल का एंगल बदलना चाहिए।
दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस विधेयक पर चर्चा के लिए 6 घंटे का समय तय किया था। हालांकि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि सभी दलों की सहमति से बहस का समय बढ़ाकर 8 घंटे कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो सरकार 10 घंटे तक चर्चा कराने के लिए भी तैयार है।
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि हाल के घटनाक्रम को देखते हुए 2024 में बने कानून को और मजबूत करने की जरूरत महसूस हुई। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य से कोई समझौता नहीं करेगी और संशोधित कानून परीक्षा माफियाओं पर और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि परीक्षा सुधार के लिए गठित राधाकृष्णन समिति की 40 में से 35 सिफारिशें लागू की जा चुकी हैं।
कांग्रेस का हमला– कानून नहीं, सरकार फेल हुई
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 2024 में कानून बनने के बावजूद 2026 में भी पेपर लीक की घटनाएं हुईं, जिससे साबित होता है कि समस्या कानून की नहीं बल्कि सरकार की नाकामी की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के बजाय केवल नए कानून लाकर अपनी जिम्मेदारी से बच रही है। गोगोई ने सवाल उठाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया। उन्होंने यह भी पूछा कि एनटीए के महानिदेशक को बदला गया, लेकिन चेयरमैन को क्यों नहीं हटाया गया।
गोगोई ने दावा किया कि 2024 के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार 45 आरोपियों में से 44 को जमानत मिल चुकी है, जबकि कथित मास्टरमाइंड भी बाद में जमानत पर बाहर आ गया।
अखिलेश यादव बोले– सरकार वचन नहीं, जुमले देती है
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सरकार वादे नहीं, केवल जुमले देती है। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन के दबाव में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा और यह युवाओं की जीत है।
अखिलेश ने कहा कि देश में लगातार परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं और कई मामलों में अदालत के हस्तक्षेप के बाद ही परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं। उन्होंने सरकार पर युवाओं की उम्मीदों से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।
अपने भाषण के दौरान उन्होंने हाल के छात्र आंदोलन, किसानों के आंदोलन और उभरी नई राजनीतिक ताकतों का भी जिक्र करते हुए सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
अभिषेक बनर्जी बोले– गवर्नेंस फेल हो तो कानून बदल दिया जाता है
तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि सही परीक्षा हर छात्र का अधिकार है, लेकिन सरकार हर विफलता के बाद केवल नया कानून या नई समिति बना देती है।
उन्होंने कहा कि “गवर्नेंस फेल हो तो कानून बदल दो” सरकार की कार्यशैली बन गई है। उनके भाषण के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा भी हुआ।
भाजपा का पक्ष– समय की जरूरत है नया संशोधन
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि आज परीक्षा माफिया संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहे हैं। ऐसे में संशोधित कानून समय की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित संशोधन के तहत केंद्र सरकार विशेष टास्क फोर्स बना सकेगी। जांच एजेंसियों को दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी, जबकि तीन महीने के भीतर मुकदमे का फैसला करने का लक्ष्य रखा गया है।
विपक्ष ने स्पष्ट किया कि वह पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज और कथित पैलेट गन के इस्तेमाल पर सरकार को जवाब देना होगा।
क्या है संशोधन विधेयक?
यह संशोधन 2024 में लागू पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम को और सख्त बनाने के लिए लाया गया है। मौजूदा कानून में पेपर लीक, नकल कराने, फर्जी वेबसाइट बनाने, OMR शीट से छेड़छाड़ और परीक्षा प्रक्रिया में बाधा डालने जैसे अपराध गैर-जमानती हैं। संशोधन के जरिए जांच, अभियोजन और दंड प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।









