बागी सांसदों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगी ममता

Mamata Banerjee

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में टीएमसी के बागी सांसदों के नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी में शामिल होने और एनडीए को समर्थन देने के फैसले पर विवाद बढ़ गया है। टीएमसी नेता मदन मित्रा ने इसे जनादेश के साथ विश्वासघात बताया और कहा कि ममता बनर्जी (Mamata banerjee) कानूनी कार्रवाई पर फैसला लेंगी।

तृणमूल कांग्रेस के कई बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया है। बागी सांसदों ने दावा किया है कि 20 सांसदों का समर्थन उनके पास है। नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी में शामिल होने के साथ ही केंद्र में सत्तारूढ़ बीजेपी नेतृत्व वाली एनडीए को समर्थन देने की घोषणा भी कर दी है। बागी सांसदों के इस एक्शन के बाद टीएमसी का बयान भी आ गया है। टीएमसी नेता मदन मित्रा ने लीगल एक्शन लेने की बात कही है।

बागी सांसदों के नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी में शामिल होने पर टीएमसी विधायक मदन मित्रा ने कहा कि सभी सांसदों ने टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ा था। उसके बाद दूसरी पार्टी में शामिल होना बेईमानी और चरित्रहीनता दिखाता है। इतनी छोटी संख्या के साथ अलग पार्टी बनाने के लिए जरूरी संख्या नहीं जुटाई जा सकती। अभी लंबी प्रक्रिया बाकी है। देखते हैं आगे क्या होता है।

उन्होंने आगे जोड़ा कि टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला करेंगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात के बाद सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने मीडिया से बातचीत में बताया कि टीएमसी के 20 सांसदों ने अलग समूह के रूप में मान्यता दिए जाने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने औपचारिक रूप से पत्र भी सौंप दिया है। उनका दावा है कि यह संख्या पार्टी के कुल लोकसभा सांसदों के दो-तिहाई से अधिक है, इसलिए उनका विलय संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप माना जाना चाहिए।

काकोली घोष दस्तिदार ने कहा कि सभी सांसदों ने मिलकर नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी का हिस्सा बनने का फैसला किया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आगे चलकर वे प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ समन्वय बनाकर काम करेंगे।इस बड़े फैसले से पहले बागी सांसदों की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ भी महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। बताया जा रहा है कि इस चर्चा में त्रिपुरा के भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब भी मौजूद थे। बैठक के दौरान संभावित विलय, संसदीय रणनीति और भविष्य की राजनीतिक दिशा पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

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