कार्यकर्ताओं की नाराजगी क्या निकम्मे मंत्रियों की बिदाई करवाएगी… क्या भाजपा के अगले कोषाध्यक्ष छत्तीसगढ़ से होंगे?

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रायपुर। हाल ही में हुए नगर पंचायत चुनावों में BJP को कांग्रेस से मिली लगभग बराबरी की चुनौती के बाद छत्तीसगढ़ की साय सरकार में मंत्रिमंडल फेरबदल की सुगबुगाहटें तेज हो गईं हैं। कहा जा रहा है कि पार्टी के भीतर से ही यह मांग उठ रही है कि कुछ निकम्मे मंत्रियों की बिदाई की जाए।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मंगलवार शाम दिल्ली जा रहे हैं। इनके इस कार्यक्रम ने भी इन चर्चाओं को हवा दे दी है।

भाजपा की एक बैठक का नजारा जानिए।

बैठक के बीच जब लंच ब्रेक हुआ तब एक वरिष्ठ विधायक ने एक मंत्री को कई पार्टी नेताओं के बीच शर्मसार कर देने वाले अन्दाज में फटकारा और कहा – ‘कम से कम पार्टी कार्यकर्ताओं से तो पैसे मत खाओ !! हम किसी कार्यकर्ता को भेजते हैं तो उससे भी पैसे ले लेते हो!! कुछ तो शर्म करो!!’ ये विधायक कभी छत्तीसगढ़ सरकार में प्रभावशाली मंत्री रह चुके हैं लेकिन उनके समर्थक आज भी आश्वस्त नहीं हैं कि उन्हें किसी प्रस्तावित फेरबदल में जगह मिलेगी या नहीं।

भाजपा के जानकार सूत्र बताते हैं कि हाल ही में पार्टी के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव दिल्ली गए थे। वहां अजय जामवाल और पवन साय की मुलाकात राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से हुई। बताते हैं कि इस मुलाकात में छत्तीसगढ़ से जुड़े विभिन्न सांगठनिक मसलों के अलावा साय मंत्रिमंडल को लेकर भी चर्चा हुई।

मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में शामिल मंत्रीमंडल के सदस्य।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी के भीतर से ही यह दबाव बनने लगा है कि कुछ मंत्रियों को हटाया जाए। नाम ना देने की शर्त पर एक नेता ने तो यहां तक कहा कि अधिकांश मंत्रियों को लेकर यह शिकायत है कि वो कार्यकर्ताओं से सीधे मुंह बात नहीं करते और अभी नगर पंचायत चुनाव में कार्यकर्ताओं की नाराजगी ही उभर कर आई है। इसी का नतीजा है कि 5 नगर पंचायतों में से 3 पर बीजेपी के अध्यक्ष चुन कर आए हैं तो 2 पर कांग्रेस के।

इससे पहले नगर निगमों और नगर पालिकाओं के चुनाव में तो कांग्रेस का सफाया हो गया था। अभी तो यह आलम था कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव अपनी विधानसभा सीट पर भाजपा का पार्षद नहीं जितवा पाए! ऐसा भी नहीं था कि पार्टी ने ताकत नहीं लगाई लेकिन पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की नाराजगी की आंच को महसूस किया जा रहा है। बताते चलें कि श्री सिंहदेव खुद भी मंत्री पद के आकांक्षी हैं।

दरअसल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद स्थानीय निकायों के चुनावों में कांग्रेस की दुर्दशा देख कर भाजपा को लगने लगा था कि कांग्रेस तो साफ हो गई लेकिन नगर पंचायत चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने जैसी वापसी की है उस पर मंथन करते हुए पार्टी के नेता इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि कांग्रेस ने इस जीत के लिए भले ही मेहनत की हो पर सच यह भी है कि भाजपा का कार्यकर्ता भी नाराज़ था।

लता उसेंडी।

भाजपा ने पिछले दिनों अपने कोर ग्रुप में जिस तरह का फेरबदल किया वह भी संगठन को दुरुस्त करने की कवायद का नतीजा था। पहली बार बृजमोहन अग्रवाल जैसे दिग्गज को कोर ग्रुप से हटाया गया और पहली बार के विधायकों को इसमें शामिल किया गया।

कोर ग्रुप में दिग्गज नेताओं बृजमोहन अग्रवाल, पुन्नूलाल मोहले, रामविचार नेताम, गौरी शंकर अग्रवाल, विक्रम उसेंडी और रेणुका सिंह को हटाकर जिन नए लोगों को शामिल किया गया, उनमें उप मुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, विधायक अमर अग्रवाल, लता उसेंडी और शिवरतन शर्मा के नाम शामिल हैं।

मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा है कि पहले राष्ट्रीय कार्यकारिणी आएगी उसके बाद छत्तीसगढ़ में पार्टी यह सर्जरी करेगी।

चर्चा है कि दो मंत्री तो पार्टी के निशाने पर हैं ही।इनके हर तरह के व्यवहार के किस्से पार्टी में ऊपर तक पहुंचाये गए हैं।

अगले राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष क्या छत्तीसगढ़ से होंगे?

अमर अग्रवाल।

यह भी चर्चा है कि पूर्व मंत्री और विधायक अमर अग्रवाल तथा विधायक लता उसेंडी संगठन अथवा मंत्रिमंडल में बेहतर जगह पाएंगे। अमर अग्रवाल के बारे में यह कहा जाता है कि मंत्री नहीं बनाए जाने के बावजूद उन्होंने धैर्य धरा।वे छत्तीसगढ़ में भाजपा का संगठन खड़ा करने वाले दिग्गज नेता लखीराम अग्रवाल के बेटे भी हैं और इस नाते दिल्ली तक उनकी अच्छी पहुंच भी है।

अगर एक पार्टी नेता की जानकारी पर यकीन किया जाए तो दिल्ली में यह चर्चा है कि भाजपा के अगले राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष का नाम अमर अग्रवाल भी हो सकता है।हालांकि इस चर्चा की भी पुष्टि नहीं हुई है।

मंत्री पद के दावेदारों में अजय चंद्राकर और राजेश मूणत का भी नाम लिया जाता है।

राजेश मूणत की पहचान संगठन के नेता की ही है। वे पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह के करीबी हैं ही।

अजय चंद्राकर अभी भले ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ समधी भेंट की तस्वीरें खिंचवाते नजर आए हों लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता का सवाल था कि जिनके करीबी संबंधी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय – ईडी ने अभी अभी भ्रष्टाचार विरोधी बड़ी कार्रवाई की हो क्या पार्टी उन्हें मंत्री बनाएगी ? हो सकता है बना दे।

पार्टी के इस नेता ने एक और जिस बात की ओर ध्यान आकृष्ट किया वो थी आदिवासी मुख्यमंत्री के होते हुए भी आदिवासी इलाकों से आने वाली असंतोष की खबरें। इस नेता का दावा था कि दिल्ली इस बात को लेकर भी चिंतित है।

हिसाब की किताब का क्या चक्कर है ?

मंत्रिमंडल फेरबदल की इन चर्चाओं के बीच एक दिलचस्प अटकल भी सुनाई दे रही है।

यह अटकल पार्टी में हिसाब किताब को लेकर उच्च स्तर पर मचे कथित घमासान की है।

यह बात अभी सिर्फ अटकलों के स्तर की ही है लेकिन दावा यहाँ तक किया जा रहा है कि हिसाब किताब के लिए जिम्मेदार नए पदाधिकारी को यह शिकायत है कि उन्हें पूरा हिसाब नहीं दिया गया है।हालांकि ऐसे किसी विवाद पर किसी वरिष्ठ नेता की टिप्पणी नहीं मिल पाई पर उच्च स्तरों पर यह मामला चर्चा में है।

यह भी पढ़ें: बिजली कंपनी का IPO लाएगी साय सरकार, 26% हिस्सेदारी बेचने की तैयारी; 10 हजार करोड़ के बकाये के बीच फैसले पर उठे सवाल

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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