कभी थाईलैंड कभी लंदन, माननीय जजों के बैडमिंटन पर्यटन पर बवाल

नई दिल्ली। युद्ध, महंगाई और देश में विदेशी मुद्रा के भारी संकट के बीच केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय द्वारा लंदन में आयोजित न्यायाधीशों और वकीलों के बीच बैडमिंटन टूर्नामेंट की जमकर आलोचना हो रही है। देश भर में लोगों ने ऐसे आयोजन पर आपत्ति जताई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नागरिकों को पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न संकट से उबरने के लिए विदेश न जाने और मितव्ययिता का पालन करने के लिए कह रहे हैं ।



पूर्व अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी और डेका इवेंट्स की संस्थापक अबंतिका डेका द्वारा आयोजित, केंद्रीय विधि मंत्रालय और कुछ कॉर्पोरेट संस्थाओं द्वारा प्रायोजित यह कार्यक्रम 7 जून को लंदन में संपन्न । खबरों के मुताबिक तक़रीबन 150 न्यायाधीश और वकील दूसरे अंतरराष्ट्रीय बार एंड बेंच बैडमिंटन चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए ब्रिटेन गए थे। दिलचस्प यह है कि पिछले एक साल से भी कम समय में इस टूर्नामेंट के दो अंतरराष्ट्रीय आयोजन हो चुके हैं।

पहला बार एंड बेंच इंटरनेशनल टूर्नामेंट पर्यटकों के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश की पसंदीदा जगह फ़ाकेट थाईलैंड में हुआ था अब दूसरा आयोजन लंदन में संपन्न हुआ है जिसमे संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी पहुंचे थे।

बताया जा रहा है कि इस आयोजन के लिए 1000 रुपये एंट्री फीस रखी गई है सूर्यकांत और रिजिजू के अलावा भारत के 150 जज और वकील इस आयोजन में मौजूद थे और इसके लिए भारी भरकम पुरस्कार राशि रखी गई थी। दिलचस्प है कि अभी नवंबर में दिल्ली में बार एंड बेंच की नेशनल प्रतियोगिता का आयोजन हो चुका है। नाम ना छापने की शर्त पर टूर्नामेंट में मौजूद एक जज ने कहा कि हम लोग दिन रात काम करते हैं ऐसे में अगर साल भर में एक बार अवकाश ले लेते हैं तो इसमें बुराई क्या है?

वरिष्ठ वकील प्रशान भूषण ने इस बात पर सवाल उठाया कि जब सरकार नागरिकों से मितव्ययिता उपायों का पालन करने की अपेक्षा करती है तो इस आयोजन का औचित्य क्या है? प्रशांत भूषण ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा ‘कानून मंत्रालय द्वारा लंदन में आज भारतीय न्यायाधीशों और वकीलों के बीच एक अद्भुत बैडमिंटन टूर्नामेंट प्रायोजित किया जा रहा है! अन्य प्रायोजक विभिन्न कॉर्पोरेट कंपनियां हैं।



मुख्य न्यायाधीश और कानून मंत्री द्वारा उद्घाटन किया जा रहा है! 150 न्यायाधीश और वकील भाग ले रहे हैं! प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील का क्या हुआ? न्यायाधीशों के लिए आचार संहिता का क्या हुआ? न्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्या हुआ? घिनौना!”

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा है ‘जब राष्ट्रीय राजधानी में गर्मी का मौसम है, तब न्यायाधीश और वकील लंदन में बैडमिंटन टूर्नामेंट खेल रहे हैं और मुख्य अतिथि मुख्य न्यायाधीश हैं! लगता है हर किसी को छुट्टी का हक है! सवाल यह है – क्या इस यात्रा में करदाताओं का कोई पैसा शामिल है?’ आम आदमी पार्टी के सौमिक सेनगुप्ता ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा।“

कानून मंत्रालय और कॉरपोरेट जगत द्वारा प्रायोजित बैडमिंटन टूर्नामेंट के लिए भारतीय न्यायाधीश और वकील लंदन जा रहे हैं, जबकि आम नागरिकों को लगातार मितव्ययिता, वित्तीय अनुशासन, त्याग और राष्ट्र निर्माण के उपदेश दिए जा रहे हैं। जाहिर है, मितव्ययिता तो सिर्फ आम करदाताओं के लिए है, नियम, नैतिकता, खर्च में कटौती, मितव्ययिता और ‘कम संसाधनों से अधिक काम करना” जैसी बातें जनता के लिए आरक्षित हैं। विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग – राजनेता, नौकरशाह, न्यायाधीश, वरिष्ठ वकील और अन्य वीआईपी – मानो किसी और ही नियम पुस्तिका के तहत काम कर रहे हैं,’



महत्वपूर्ण है कि पिछले महीने, प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट के प्रभावों को कम करने के लिए ‘सात सूत्री कार्यक्रम’ का सुझाव दिया और नागरिकों को विदेश यात्रा और डेस्टिनेशन वेडिंग रद्द करने, कम से कम एक वर्ष के लिए सोने की खरीदारी से बचने, घर से काम करने को प्रोत्साहित करने, उर्वरक के उपयोग में 50 प्रतिशत की कटौती करने, खाद्य तेल की खपत कम करने, कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने, स्थानीय परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने की सलाह दी।

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