रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड IAS अधिकारी और पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास (IAS Niranjan Das) को जमानत दे दी है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह माना कि मामले के कई सह-आरोपी पहले ही जमानत पर बाहर हैं और ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है।
जमानत के साथ कोर्ट ने शर्त रखी है कि निरंजन दास को छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा और वे केवल जांच या कोर्ट में पेशी के लिए ही राज्य में आ सकेंगे।
ईओडब्ल्यू (EOW) के मुताबिक, निरंजन दास कथित शराब सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने आईटीएस अधिकारी एपी त्रिपाठी के साथ मिलकर तीन साल तक पूरे आबकारी सिस्टम को संचालित किया।
किस जिले में कौन अधिकारी तैनात होगा, किस कंपनी की शराब बिकेगी और किस ब्रांड की सप्लाई होगी, यह सब तय करने में उनकी अहम भूमिका थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क से उन्हें 30 करोड़ रुपए से ज्यादा का कमीशन मिला।
सुनवाई के दौरान कोर्ट में यह भी बताया गया कि निरंजन दास ने आबकारी नीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उससे कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाया गया। इन्हीं आरोपों के आधार पर उन्हें 18 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए उन्हें जमानत दे दी।
अनवर ढेबर ने भी दाखिल की जमानत याचिका
दूसरी तरफ शराब घोटाले में कारोबारी अनवर ढेबर ने भी सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार से 3 जून तक जवाब मांगा है। इससे पहले 13 मई को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनवर ढेबर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
ईडी के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में करीब 3200 करोड़ रुपए का शराब घोटाला हुआ था। इस मामले में अब तक कई बड़े अधिकारी, कारोबारी और नेता जांच के दायरे में आ चुके हैं।
हाल ही में अनवर ढेबर की जमानत याचिका को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने खारिज किया था।
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