नई दिल्ली। Supreme Court ने मंगलवार को कहा कि खतरनाक और बीमार आवारा कुत्तों को इंजेक्शन लगाकर इंसानी जान बचाने के लिए euthanize (दया-मृत्यु) किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि लोगों की सुरक्षा सबसे ऊपर है और गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार में कुत्तों के हमलों से मुक्त रहने का अधिकार भी शामिल है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए डॉग लवर्स और एनजीओ द्वारा दायर सभी आवेदनों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने पहले के निर्देशों को वापस लेने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि जो अधिकारी अदालत के आदेशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। लोगों की जान पर बन रहे खतरे को देखते हुए राज्य सरकारों को पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) के नियमों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। कुत्तों के हमलों के आंकड़ेअदालत ने सुनवाई के दौरान आवारा कुत्तों के हमलों के तीन बड़े उदाहरण दिए:
राजस्थान के श्री गंगानगर में एक महीने के अंदर 1084 कुत्तों के काटने के मामले दर्ज हुए। कई छोटे बच्चों के चेहरे पर गहरे घाव हुए।
तमिलनाडु में साल के पहले चार महीनों में लगभग 2 लाख कुत्ते काटने की घटनाएं दर्ज की गईं।
सूरत में एक विदेशी पर्यटक (जर्मन यात्री) को कुत्ते ने काट लिया।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि इन घटनाओं से आम लोगों का स्थानीय प्रशासन पर भरोसा कम हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के 9 महत्वपूर्ण निर्देश
कोर्ट ने इस मामले में कई साफ निर्देश जारी किए:
हर जिले में कम से कम एक पूरी तरह काम करने वाला ABC सेंटर (Animal Birth Control Centre) बनाया जाए।
ज्यादा आबादी वाले इलाकों में ABC सेंटरों की संख्या बढ़ाई जाए।
नसबंदी और टीकाकरण के बाद भी कुत्तों को सार्वजनिक जगहों पर छोड़ने पर सख्ती बरती जाए।
एंटी-रेबीज दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए NHAI जरूरी कदम उठाए।
रेबीज से संक्रमित या बेहद खतरनाक कुत्तों को कानून के तहत euthanize किया जा सकता है।
कुत्तों को हटाने वाले अधिकारियों और नगर निगम कर्मचारियों को कानूनी सुरक्षा दी जाए, बिना वजह उनके खिलाफ FIR न दर्ज हो।
स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों जैसी जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के पहले दिए गए आदेश बरकरार रहेंगे।
सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर लगाए गए प्रतिबंध जारी रहेंगे।
यह मामला जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद शुरू हुआ था। नवंबर 2025 में कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम में रखने के निर्देश दिए थे। बाद में डॉग फीडर्स और एनजीओ के विरोध के बाद कुछ संशोधन किए गए थे, लेकिन मूल व्यवस्था को कोर्ट ने अब मजबूत कर दिया है।29 जनवरी को हुई पिछली सुनवाई में कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि वह इस मामले में पूरी गंभीरता से काम कर रहा है और जिम्मेदारी तय करने से पीछे नहीं हटेगा।











