नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के रिटायर्ड आईएएस Anil Tuteja को भ्रष्टाचार के एक मामले में जमानत दे दी है। इस मामले में जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) से जुड़े मल्टी-करोड़ रुपये के सिविल वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट्स में कथित हस्तक्षेप का आरोप है, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने अनिल टुटेजा को छत्तीसगढ़ से बाहर रहने का निर्देश दिया है, ताकि वे मामले के गवाहों को प्रभावित न कर सकें। उन्हें एक सप्ताह के अंदर नया पता देने और हर सुनवाई की तारीख पर अदालत में हाजिर होने का भी निर्देश दिया गया है।
राज्य सरकार ने जमानत दिए जाने का विरोध करते हुए कहा कि अनिल टुटेजा आदतन अपराधी हैं और शराब, कोयला, सट्टेबाजी आदि से जुड़े कई घोटालों में शामिल हैं।
राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता रवि शर्मा ने कहा, ‘सभी घोटालों में उनका हाथ है।’
टुटेजा की ओर से वरिष्ठ वकील शोएब आलम ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल पिछले ढाई साल से जेल में बंद हैं। मामले में 85 गवाह हैं और 9 आरोपी अभी ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि टुटेजा उद्योग विभाग में संयुक्त सचिव थे और कॉन्ट्रैक्ट्स संबंधित जिला कलेक्टरों द्वारा जारी किए गए थे। उनके मुवक्किल की इसमें कोई भूमिका नहीं थी।
शोएब आलम ने यह भी कहा कि सितंबर 2024 में राज्य ने अदालत में उन्हें ‘किंगपिन’ बताया था, लेकिन गिरफ्तारी फरवरी 2026 में की गई। उन्होंने ‘ऑफेंसेज का एवरग्रीनिंग’ यानि बार-बार नए मामले दर्ज करके जमानत रोकने की रणनीति का भी आरोप लगाया।अपने मुवक्किल की ओर से उन्होंने कहा, ‘मैं रिटायर्ड हो चुका हूं। मुझे छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रखें। मैं अपने परिवार के साथ रहना चाहता हूं।’









