चुनावी नतीजों के बाद CPI(M) का मंथन शुरू, केरल में हार को बताया बड़ा झटका, बंगाल में बीजेपी की जीत के लिए TMC को ठहराया जिम्मेदार

CPI (M)

नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी कि CPI(M) ने आत्ममंथन शुरू कर दिया है। पार्टी ने एक ओर जहां केरल में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) की हार को गंभीर झटका बताया है, वहीं पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत के लिए उसकी सांप्रदायिक और विभाजनकारी राजनीति के साथ ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) को भी जिम्मेदार ठहराया है।

पार्टी की पोलित ब्यूरो की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी को भ्रष्ट TMC सरकार के खिलाफ बने भारी एंटी-इंकंबेंसी का फायदा मिला। साथ ही बीजेपी के सांप्रदायिक और विभाजनकारी और जहरीले नफरत भरे अभियान, चुनाव में भारी धनबल, और चुनाव आयोग सहित केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग और SIR प्रक्रिया ने उनकी जीत में भूमिका निभाई।

सीपीआई(एम) ने तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में असीमित भ्रष्टाचार और अधिनायकवादी शासन के कारण जनता में भारी नाराजगी थी, जिसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला।

पोलित ब्यूरो ने यह भी कहा कि बंगाल, असम और पुडुचेरी के नतीजे देश में दक्षिणपंथी ताकतों के उभार को दर्शाते हैं, जो धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक शक्तियों के लिए चिंता का विषय है। असम में बीजेपी ने सत्ता बरकरार रखी, जबकि पुडुचेरी में भी सहयोगियों के साथ जीत हासिल की।

केरल में 10 साल सत्ता में रहने के बाद LDF की हार पर पार्टी ने कहा कि वित्तीय बाधाओं के बावजूद सरकार ने जनता के हित में काम किया, लेकिन नतीजे उम्मीद के अनुरूप नहीं रहे।

तमिलनाडु में भी डीएमके गठबंधन को झटका लगा, जहां अभिनेता विजय के नेतृत्व वाली TVK एक बड़ी ताकत के रूप में उभरी।

सीपीआई(एम) ने कहा कि वह जनता के जनादेश का सम्मान करती है और केरल में हार के कारणों की गंभीर समीक्षा करेगी। पार्टी ने भरोसा दिलाया कि वह जरूरी सुधारात्मक कदम उठाएगी और जनता के अधिकारों, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति की बैठकों में चुनाव परिणामों का व्यापक विश्लेषण कर नई राजनीतिक परिस्थितियों से निपटने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी।

जनता TMC सरकार को हटाना चाहती थी, जिसे BJP ने भुनाया : मोहम्मद सलीम

पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम ने भी कहा कि जनता TMC सरकार को हटाना चाहती थी और बीजेपी ने इसी गुस्से को भुनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान मतदाता सूची संशोधन (SIR) के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए, केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग हुआ और भारी केंद्रीय बलों की तैनाती से डर का माहौल बनाया गया।

मोहम्मद सलीम ने आगे कहा कि इस चुनाव में व्यापक वाम एकता बनाई गई थी, जिसमें इंडियन सेकुलर फ्रंट भी सहयोगी के रूप में शामिल था। हालांकि पार्टी ने माना कि ईमानदार प्रयासों के बावजूद बीजेपी राज्य में ‘विकल्प’ की जगह कब्जाने में सफल रही।

सीपीआई(एम) ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के अनुभव के आधार पर यह स्पष्ट है कि पार्टी ‘अधिनायकवादी और अलोकतांत्रिक’ नीतियों पर चलती है। पार्टी ने राज्य की जनता से आह्वान किया कि वे ऐसी नीतियों के खिलाफ संघर्ष के लिए तैयार रहें।

पार्टी सचिव ने यह भी कहा कि लंबे समय बाद वाम गठबंधन के विधायक अब विधानसभा में मौजूद रहेंगे, जो लोकतांत्रिक बहस के लिए अहम है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वह जनता के हितों के लिए विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह संघर्ष जारी रखेगी और हर परिस्थिति में आम लोगों के साथ खड़ी रहेगी।

पार्टी सचिव ने सभी राजनीतिक दलों और प्रशासन से अपील की है कि चुनाव के बाद राज्य में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखी जाए और किसी भी तरह की राजनीतिक हिंसा या सांप्रदायिक तनाव को सख्ती से रोका जाए।

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