रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित तुता धरना प्रदर्शन स्थल पर संयुक्त मसीही समाज ने शुक्रवार 27 मार्च को लोकभवन घेराव के लिए निकले। मसीही समाज ने विशाल रैली निकाली। इसमें 19 मार्च 2026 को विधानसभा द्वारा पारित ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ (Chhattisgarh Freedom of Religion Bill, 2026) का तीखा विरोध किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए अनुरोध किया कि वे इस विधेयक को अनुमति न दें और इसे पुनर्विचार के लिए विधानसभा को वापस भेजें।

ईसाई समाज ने आरोप लगाया कि यह विधेयक मुख्य रूप से मसीही (ईसाई) समुदाय को निशाना बनाता है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 तथा 25 का उल्लंघन करता है। उन्होंने भेदभावपूर्ण प्रावधानों, जिला मजिस्ट्रेट को अत्यधिक शक्ति देने और सभी धर्मों पर समान रूप से लागू न होने जैसी आपत्तियां उठाईं। ईसाई संगठनों का कहना है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार को गंभीर रूप से प्रभावित करेगा।
प्रदर्शन को मूलनिवासी संघ, मसीह समाज और भीम आर्मी ने भी अपना समर्थन दिया। रैली में सैकड़ों लोग शामिल हुए, जिन्होंने नारेबाजी की और विधेयक को ‘काला कानून’ बताया। इस प्रदर्शन में शामिल होने प्रदेश के कई जगहों से ईसाई समुदाय को मानने वाले लोग मौजूद थे।

मसीही समुदाय के लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा बावजूद कहीं अराजकता नहीं थी लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया और प्रशासन को भीड़ नियंत्रण करने में पूरा सहयोग दिया अमूमन किसी भी आंदोलन में इतनी भीड़ के बावजूद इतने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन नहीं देखा जाता। संयुक्त मसीह समाज ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुए त्वरित कार्रवाई करने की बात कही प्रशासन की ओर से तहसीलदार ने ज्ञापन लिया।

पिछले सप्ताह भी रायपुर शहर में संयुक्त मसीही समाज ने नए धर्मांतरण कानून यानी ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ के विरोध में विशाल रैली निकाली। यह रैली बुढ़ातालाब से अंबेडकर चौक तक निकाली गई थी। समाज के नेताओं ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और संविधान हर नागरिक को अपने धर्म का पालन, प्रचार और प्रसार करने की पूर्ण स्वतंत्रता प्रदान करता है। उन्होंने ‘लालच’ शब्द की स्पष्ट परिभाषा की मांग की और कहा कि स्वेच्छा से किसी भी धर्म को अपनाने या प्रचार करने पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगनी चाहिए।
इस प्रदर्शन से समाज के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस कानून में जरूरी सुधार नहीं करती, तो वे न्यायालय का रुख करेंगे। साथ ही उन्होंने राज्यभर में मशाल रैलियां और विरोध प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है।










