Iran New Supreme Leader: ईरान में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ है। अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई Mojtaba Khamenei को देश का नया सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) चुन लिया गया है। यह फैसला उनके पिता की मौत के करीब एक हफ्ते बाद लिया गया, जब अमेरिका-इज़राइल के हमलों में अली खामेनेई की मौत हो गई थी। ईरानी स्टेट मीडिया ने रविवार रात को यह घोषणा की।
कैसे चुना गया मोजतबा खामेनेई?
ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने यह फैसला लिया। यह 88 सदस्यों वाली धार्मिक संस्था है, जो देश के सुप्रीम लीडर को चुनने की जिम्मेदारी रखती है। असेंबली ने कहा कि ‘निर्णायक वोट’ से मोजतबा खामेनेई को तीसरे सुप्रीम लीडर के रूप में चुना गया है। यह 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद पहली बार है जब सत्ता पिता से बेटे को मिली है।मोजतबा खामेनेई की उम्र 56 साल है। वे कभी कोई निर्वाचित पद नहीं संभाले और सार्वजनिक रूप से बहुत कम दिखाई देते हैं। लेकिन लंबे समय से वे पर्दे के पीछे काफी प्रभावशाली माने जाते रहे हैं। खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) और सुरक्षा तंत्र से उनके गहरे संबंध हैं। अमेरिका ने 2019 में उन पर प्रतिबंध भी लगाए थे, आरोप लगाया था कि वे सुरक्षा बलों के साथ मिलकर नीतियां चलाते हैं।
सेना और नेताओं ने ली वफादारी की शपथ
नाम घोषित होते ही ईरान की सेना, IRGC और राजनीतिक नेताओं ने तुरंत मोजतबा खामेनेई के प्रति निष्ठा की शपथ ली। IRGC ने बयान जारी कर कहा कि वे नए नेता के आदेशों का पालन करने और खुद को कुर्बान करने को तैयार हैं। संसद के स्पीकर ने इसे ‘धार्मिक और राष्ट्रीय कर्तव्य’ बताया, जबकि सुरक्षा प्रमुखों ने कहा कि नया नेता मुश्किल वक्त में देश को सही रास्ता दिखा सकता है।
ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस नियुक्ति पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पहले ही मोजतबा को ‘अस्वीकार्य’ और ‘लाइटवेट’ बताया था। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को ईरान के अगले नेता चुनने में भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वाशिंगटन की मंजूरी नहीं मिली तो नया नेता ज्यादा समय तक नहीं टिक पाएगा। हालांकि हालिया बयानों में ट्रंप ने कहा, ‘हम देखेंगे क्या होता है।’
युद्ध के बीच यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण?
अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमलों में हुई थी। तब से ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच युद्ध जारी है। मोजतबा की नियुक्ति से सख्त धड़े का नियंत्रण बरकरार रहने का संकेत मिलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे युद्ध और लंबा खिंच सकता है, क्योंकि नया नेता पिता की नीतियों को जारी रख सकता है।
कौन हैं मोजतबा खामेनेई ?
मोजतबा खामेनेई अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं. शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने धार्मिक शिक्षा की राह चुनी. उन्होंने अपने पिता और दूसरे बड़े धार्मिक विद्वानों से इस्लामी धर्मशास्त्र की पढ़ाई की, बाद में वो मौलवी बने और आज ईरान के प्रसिद्ध धार्मिक शिक्षण केंद्र कुम सेमिनरी में छात्रों को पढ़ाते हैं. धार्मिक दुनिया में उनकी पहचान एक प्रभावशाली शिक्षक और विचारक के रूप में मानी जाती है. पढ़ाई पूरी करने के बाद मोजतबा खामेनेई ने 1987 में ईरान की ताकतवर सुरक्षा संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स में भी सेवाएं दी थी. ये वही दौर था जब ईरान और इराक के बीच युद्ध अपने अंतिम चरण में था.
धीरे-धीरे उन्होंने सुरक्षा तंत्र के भीतर मजबूत संबंध बना लिए. 2000 के दशक की शुरुआत तक उनके संपर्क न सिर्फ सैन्य अधिकारियों से हो चुके थे बल्कि कई बड़े धार्मिक नेताओं से भी बन गए थे. इसी नेटवर्क ने उन्हें ईरान की सत्ता व्यवस्था के बेहद करीब पहुंचा दिया. यही वजह है कि आज उनका नाम देश के सबसे प्रभावशाली शक्ति केंद्रों से जोड़ा जाता है.मोजतबा खामेनेई का पारिवारिक रिश्ता भी ईरान की राजनीति से गहराई से जुड़ा हुआ है. उनकी शादी जहरा हद्दाद आदेल से हुई है. वो ईरान के पूर्व संसद अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता घोलाम अली हद्दाद आदेल की बेटी हैं. दोनों के तीन बच्चे हैं. इस रिश्ते के बाद उनका जुड़ाव राजनीतिक परिवारों से और मजबूत हो गया.
ईरान की सत्ता व्यवस्था में ऐसे रिश्तों को काफी जरूरी माना जाता है. यही कारण है कि मोजतबा खामेनेई को केवल धार्मिक नेता नहीं बल्कि एक मजबूत राजनीतिक चेहरा भी माना जाने लगा. राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा वर्ष 2005 और 2009 के राष्ट्रपति चुनावों के समय हुई. इन चुनावों में उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाई थी. खासतौर पर 2009 के चुनाव के बाद बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए. इन प्रदर्शनों को बाद में ग्रीन मूवमेंट कहा गया है. आरोप लगे कि चुनाव में धांधली हुई थी. कहा जाता है कि मोजतबा खामेनेई ने इन सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने में अहम भूमिका निभाई.
आगे चलकर अहमदीनेजाद से उनके संबंध खराब हो गए. पूर्व राष्ट्रपति ने उन पर सरकारी धन के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप भी लगाए थे.मोजतबा खामेनेई को ईरान की क्षेत्रीय रणनीति में भी एक बड़ा चेहरा माना जाता है. खास तौर पर ईरान समर्थित संगठनों जैसे हिज्बुल्लाह और दूसरे शिया लड़ाकू गुटों के साथ तालमेल में उनकी भूमिका बताई जाती है.











