नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
मद्रास हाइकोर्ट जज जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा कि जो लोग गुरुओं को ईश्वर के समान मानने वालों को मूर्ख, अयोग्य और बर्बर कहते हैं, वही वास्तव में अयोग्य, मूर्ख और बर्बर हैं। जस्टिस स्वामीनाथन ने यह टिप्पणी होसुर सत्संग द्वारा आयोजित गुरु वंदनम् उत्सव में तमिल भाषा में दिए गए संबोधन के दौरान की।
जस्टिस स्वामीनाथन वही हैं जिन्होंने दिसंबर 2025 में उन्होंने मदुरै की तिरुपरंकुंड्रम पहाड़ी पर ‘दीपथून’ पर दीप जलाने का आदेश दिया था। यह स्थान एक दरगाह के पास होने के कारण राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इसका विरोध किया था। इस मामले के बाद उनके खिलाफ लोकसभा में महाभियोग का प्रस्ताव भी लाया गया।
उन्होंने एक ऐतिहासिक फैसले में ट्रांसजेंडर महिला को हिंदू विवाह अधिनियम के तहत ‘दुल्हन’ के रूप में मान्यता दी थी उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि “यदि हम वेदों की रक्षा करेंगे, तो वेद हमारी रक्षा करेंगे,” जिसे लेकर उनकी काफी आलोचना हुई थी।
अपने भाषण में जस्टिस स्वामीनाथन ने एक निजी अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वह और उनकी पत्नी अपनी बेटी के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पंजाब के पटियाला गए। समारोह के बाद सभी ने उन्हें उसी दिन लौटने से मना किया लेकिन चालक के आश्वासन पर उन्होंने उसी रात वापसी का निर्णय लिया। वापसी के दौरान घना कोहरा था और दृश्यता बहुत कम थी। रास्ते में उनकी कार का टायर पंचर हो गया।
जस्टिस ने कहा कि जब उनकी पत्नी और चालक कम दृश्यता में टायर बदल रहे थे तब वह लगभग आधे घंटे तक गुरुनाथा का जाप करते रहे, जिससे उन्हें साहस मिला। सुप्रीम कोर्ट ने “नव केरल नागरिक प्रतिक्रिया कार्यक्रम” पर केरल हाईकोर्ट की रोक पर लगाई अंतरिम स्थगन उन्होंने कहा कि अलग-अलग लोग अलग गुरुओं को मान सकते हैं लेकिन सभी गुरुओं की ओशिक्षाएं एक जैसी होती हैं।
उन्होंने कहा, “ईश्वर एक अमूर्त अवधारणा है लेकिन गुरु ईश्वर की जीवित उपस्थिति हैं। भगवान के चरण स्पर्श नहीं किए जा सकते लेकिन गुरु के चरण स्पर्श किए जा सकते हैं।” उन्होंने जोड़ा कि उस घटना ने उन्हें यह समझाया कि असहाय परिस्थितियों में गुरु के आशीर्वाद से ही शक्ति मिलती है। जस्टिस स्वामीनाथन ने कहा कि कुछ स्वयंभू तर्कवादी ऐसे लोगों को मूर्ख और बर्बर कहते हैं, जो गुरु को ईश्वर मानते हैं लेकिन उनके अनुसार वास्तविक अज्ञान उन्हीं में है, जो गुरु की महिमा को नहीं समझते।









