नहीं मानी मांगें तो 55 हजार किसान पहुंचे मुंबई

farmers Mumbai March

नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली

महाराष्ट्र के नासिक जिले के आदिवासी-बहुल इलाकों के 55 हजार किसानों और खेत मजदूरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मुंबई की ओर लंबी पदयात्रा शुरू कर दी है। अखिल भारतीय किसान सभा और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व में चल रही यह भीड़ मुम्बई पहुंची है और इसके प्रतिनिधिमंडल से सरकार बातचीत करने पर राजी हुई है।

यह मार्च पहले दिंडोरी तहसील कार्यालय के बाहर छह दिनों से जारी विरोध के रूप में था, लेकिन जब उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो प्रदर्शनकारियों ने मंत्रालय तक जाने का फैसला किया। हजारों आदिवासी लोग लाल झंडे और बैनर लेकर नारे लगाते हुए नासिक शहर से मुंबई की ओर बढ़ रहे थे।

पूर्व विधायक कॉमरेड जे. पी. गावित के नेतृत्व में आदिवासी किसान त्र्यंबकेश्वर, पिथ, कलवान, सुर्गणा और दिंडोरी जैसे तालुकों से पिछले छह दिनों से मार्च कर रहे थे। आंदोलनकारी किसानों की मांगों को देख जाए तो ज्यादातर मांगे ऐसी हैं। जिन्हें पूरा करने में कोई ज्यादा मुश्किल नहीं आने वाली है। प्रदर्शनकारी मनरेगा के कार्यदिवसों को भी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

किसान सभा और सीपीआई(एम) के नेताओं का कहना है कि इन मांगों को कई वर्षों से अनदेखा किया गया है तथा सरकार केवल आश्वासन देती है लेकिन असली काम नहीं करती। इसलिए यह लंबी पदयात्रा मंत्रालय पर दबाव बनाने के लिए आयोजित की गई है। अध्यक्ष जे. पी. गावित ने कहा, “आदिवासी किसान देश की रीढ़ हैं। जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता हम रुकेंगे नहीं। यह मार्च सिर्फ मांगों के लिए नहीं बल्कि आदिवासी समुदाय के अस्तित्व के लिए है।”

इस मार्च में महिलाओं की भी बड़ी भागीदारी है, कई महिलाएँ अपने बच्चों के साथ पैदल चल रही हैं। पदयात्रा नासिक–मुंबई राजमार्ग के रास्ते आगे बढ़ेगी और स्थानीय कार्यकर्ताओं तथा संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। जब वे मुंबई पहुँचेंगे, तो मंत्रालय (राज्य सचिवालय) के सामने धरना देंगे।

किसान क्या क्या मांग कर रहे हैं?

  • भूमि अधिकारों के लिए 7/12 रिकॉर्ड में नाम शामिल करना
  • वन अधिकार अधिनियम को लागू करना और व्यक्तिगत/सामुदायिक वन अधिकार प्रमाण पत्र जारी करना
  • आदिवासी इलाकों में कृषि के लिए सिंचाई की सुविधा और ऋण माफी
  • मनरेगा के तहत 365 दिनों के काम की गारंटी
  • आदिवासी इलाकों में सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार
  • पुलिस अत्याचार और झूठे मामलों के खिलाफ कार्रवाई
  • जल जीवन मिशन के तहत दूरदराज के गाँवों में नल के पानी की सुविधाएँ लागू करना

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