औंधे मुंह गिरा शेयर बाजार, डूब गए 6लाख करोड़ रुपये, जानिए कैसे आया भूचाल?

Share Market Today

मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में आज, 21 जनवरी को शुरुआती कारोबार में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। बाजार की शुरुआत कमजोर हुई, लेकिन जल्द ही गिरावट तेज हो गई। सुबह करीब 11 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 1000 अंकों से ज्यादा टूट चुका था, जबकि NSE निफ्टी में 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।

इस दौरान निवेशकों के करीब 6 लाख करोड़ रुपये डूब गए और BSE पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर 449.76 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। शुरुआती डेढ़ घंटे में ही 4.50 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका था। हालांकि, दोपहर होते-होते स्थिति में सुधार आया और सेंसेक्स 200 अंकों से ज्यादा चढ़ गया, जबकि निफ्टी भी 25,000 के स्तर से ऊपर लौट आया।

दोपहर डेढ़ बजे तक सेंसेक्स 82,168.93 पर कारोबार कर रहा था, जो कल के बंद से 11.54 अंक नीचे था। निफ्टी 25,174.80 पर था, जिसमें 57.71 अंकों की गिरावट थी। दिन के दौरान सेंसेक्स का निचला स्तर 81,631 तक पहुंचा, जबकि निफ्टी 24,919.80 तक फिसला।

गिरावट के प्रमुख कारण

बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट तीन दिनों से जारी है, लेकिन दोपहर में शॉर्ट-कवरिंग, ओवरसोल्ड स्थिति और घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की खरीदारी से समर्थन मिला। ब्रॉडर मार्केट में भी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5% तक की गिरावट आई, लेकिन रिकवरी ने कुछ राहत दी।

वैश्विक अनिश्चितताएं और ट्रेड वॉर की आशंका: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड अधिग्रहण की धमकी और यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की चेतावनी ने वैश्विक बाजारों में जोखिम बढ़ा दिया है। वॉल स्ट्रीट में 2% से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि एशियाई बाजार जैसे निक्केई और हैंग सेंग भी नीचे कारोबार कर रहे थे। इसने भारतीय बाजार पर भी दबाव डाला।

रुपये की कमजोरी: भारतीय रुपया आज रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जो डॉलर के मुकाबले 91.28 पर बंद हुआ। यह 31 पैसे की गिरावट थी, जो लगातार छठे सत्र में जारी रही। वैश्विक अनिश्चितता, कैपिटल आउटफ्लो और अमेरिका-भारत ट्रेड समझौते की कमी ने इसे प्रभावित किया। इससे आयातित महंगाई बढ़ने की चिंता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) लगातार 11वें सत्र में नेट सेलर बने रहे। कल उन्होंने 2,938 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची। जनवरी में सिर्फ एक दिन खरीदारी हुई, जबकि बाकी समय बिकवाली हावी रही।

कमजोर घरेलू अर्निंग्स: रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईसीआईसीआई बैंक जैसी कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों ने वैल्यूएशन चिंताएं बढ़ाईं। इससे बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में बिकवाली तेज हुई।

भू-राजनीतिक तनाव और अन्य कारक: ट्रंप की यूरोप पर टैरिफ धमकी से ट्रेड वॉर की आशंका बढ़ी, जिससे निवेशक सुरक्षित एसेट्स जैसे सोना-चांदी की ओर मुड़े। इसके अलावा, बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली और ब्रॉडर मार्केट्स की गिरावट ने दबाव बढ़ाया।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now