शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के ब्यौहारी में अधिकारियों के 400 करोड़ रुपए के सरकारी जमीन घोटाले (Government Land Scam) के मामले में बड़ी कार्रवाई करने की तैयारी है। इस घोटाले ने पूरे सरकारी तंत्र को हिलाकर रख दिया है। यहां के खड़हूली गांव में मवेशियों के चरने वाली ‘गैर हकदार चरनोई’ की करीब 10 एकड़ बेशकीमती सरकारी जमीन को राजस्व अधिकारियों ने आपस में बंदरबांट कर अपने ही कुनबे के नाम चढ़ा लिया।
पुलिस की आधिकारिक जांच रिपोर्ट में अब इस महालूट का शब्दशः खुलासा हो चुका है। कोर्ट के कड़े रुख के बाद थाना प्रभारी की चौंकाने वाली जांच रिपोर्ट उजागर हुई है। रिपोर्ट में तत्कालीन एसडीएम, 3 नायब तहसीलदार और पटवारियों पर बीएनएस की संगीन धाराओं में केस की सिफारिश की गई है।
ब्योहारी तहसील के खड़हूली और नौढ़िया क्षेत्र में स्थित यह सरकारी जमीन शासकीय अभिलेखों में ‘मध्य प्रदेश शासन’ के अधीन ‘गैर हकदार चरनोई’ दर्ज थी। वर्तमान बाजार भाव के अनुसार, जो 890 रुपए प्रति स्क्वायर फीट या लगभग 3 लाख रुपए प्रति डिसमिल है, इस महाघोटाले का कुल आकार 400 करोड़ रुपए से कम का नहीं है।
स्वयं सूबे के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने पूर्व में इसकी अनुमानित शासकीय क्षति100 करोड़ रुपए से 200 करोड़ रुपए के बीच स्वीकार करते हुए प्रमुख सचिव को जांच सौंपी थी। लेकिन प्रशासनिक दलालों और रसूखदारों के दबाव में महीनों तक फाइलें सचिवालय में धूल खाती रहीं। आम जनता के मवेशियों के लिए आरक्षित इस चारागाह भूमि की रक्षा करने में पूरा जिला प्रशासन और कलेक्ट्रेट मूकदर्शक बना रहा, जिससे भू-माफियाओं के हौसले बुलंद होते गए।
ऐसे रची है महाघोटाले की पटकथा
इस महाघोटाले के काम करने का तरीका इतना शातिराना है कि कोई भी दंग रह जाए। वर्ष 2023-24 में हल्की पटवारी नौढ़िया के पद पर पदस्थ राजेंद्र कुमार द्विवेदी ने तत्कालीन नायब तहसीलदार अमित मिश्रा, भुवनेश्वर सिंह, अभ्यानंद शर्मा और तत्कालीन अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) नरेंद्र कुमार धुर्वे को अपने प्रभाव में लिया।
इन सबने मिलकर शासकीय राजस्व रिकॉर्ड और खसरे में हेराफेरी की। इन अधिकारियों ने मिलीभगत करके चुपके से सरकारी रिकॉर्ड से ‘मध्य प्रदेश शासन’, ‘गैर हकदार’ और ‘चरनोई’ जैसे शब्दों को विलोपित (हटा) कर दिया।
भूमि को रिकॉर्ड में ‘साफ’ करने के बाद, इसे पहले कुछ डमी पट्टेदारों के नाम दर्ज कराया गया और फिर आनंद-फानन में रजिस्ट्री (विक्रय पत्र) के माध्यम से पटवारी राजेंद्र द्विवेदी ने अपनी पत्नी छाया शुक्ला, माँ मांडवी द्विवेदी और अपने सगे रिश्तेदारों के नाम क्रय करवा लिया।
जमीन का अपने ही परिवार में किया गया बंदरबाट
जांच रिपोर्ट के अनुसार, खड़हूली गांव की आराजी खसरा नंबर 153/1, 40, 119, 117, 113, 108, 164, 112, 52, 54 सहित कुल 15 किता आराजी और खसरा नंबर 199/2/2 (रकबा 1.80 हेक्टेयर जो चरनोई हेतु आरक्षित था) में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया।
इस महालूट को अंजाम देने वाले मुख्य सूत्रधारों में तत्कालीन हल्का पटवारी राजेंद्र कुमार द्विवेदी, तत्कालीन अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) नरेन्द्र कुमार धुर्वे, तथा तीन तत्कालीन नायब तहसीलदार अमित मिश्रा, भुवनेश्वर सिंह व अभ्यानंद शर्मा शामिल हैं। इनके साथ ही तत्कालीन पटवारी प्रदीप तिवारी (हल्का छतैनी, जयसिंहनगर) ने भी इस बहती गंगा में हाथ धोया।
इन अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नियों और परिजनों, जिनमें छाया शुक्ला, मांडवी द्विवेदी, दिवाकर सिंह तिवारी, लक्ष्मी रेशमा तिवारी, संदीप तिवारी, पूर्णिमा तिवारी और राजलली द्विवेदी शामिल हैं, के नाम पर करोड़ों की सरकारी भूमि दर्ज करवा दी और अब यह पूरा कुनबा इस सरकारी जमीन के टुकड़े करके बाजार में धड़ल्ले से बेच रहा है।
न्यायालय के कड़े निर्देश
प्रशासनिक स्तर पर कोई सुनवाई न होने के बाद, क्षेत्र के सजग और निडर नागरिक मुकेश मिश्रा ने तमाम जान-माल के खतरों के बावजूद माननीय प्रथम श्रेणी न्यायालय ब्योहारी में एक निजी परिवाद (इस्तगासा क्रमांक 323 बी.एन.एस.एस.) दायर किया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस को जांच के कड़े निर्देश दिए।
ब्योहारी थाना प्रभारी जो महीनों से इस मामले को टाल रहे थे, उन्हें अंततः झुकना पड़ा। पुलिस ने गहन तकनीकी और दस्तावेजी जांच के बाद 12 मई 2026 को अदालत में अपनी 5 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंप दी। इस रिपोर्ट ने सारे रसूखदार अधिकारियों और भू-माफियाओं के चेहरे से मुखौटा पूरी तरह से हटा दिया है।
पुलिस ने धोखाधड़ी और षड्यंत्र की धाराओं में एफआईआर की तैयार की रिपोर्ट
थाना प्रभारी ब्योहारी द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत की गई अंतिम जांच रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया है कि शिकायतकर्ता मुकेश मिश्रा द्वारा लगाए गए सभी आरोप शब्दशः और पूर्णतः प्रमाणित पाए गए हैं।
पुलिस ने रिपोर्ट के पृष्ठ 5 पर अंतिम निष्कर्ष निकालते हुए सभी 13 नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316, 318, 335, 338, 340 और 344 के तहत मुकदमा दर्ज करने की ठोस सिफारिश की है।
इनमें तत्कालीन एसडीएम नरेंद्र कुमार धुर्वे, तीन तत्कालीन नायब तहसीलदार (अमित मिश्रा, भुवनेश्वर सिंह, अभ्यानंद शर्मा) और पटवारी राजेंद्र कुमार द्विवेदी सहित उनके परिवार के 9 सदस्य शामिल हैं। लोक सेवकों द्वारा शासकीय संपत्ति पर डाका डालने का यह अपनी तरह का सबसे घिनौना और बड़ा मामला बनकर उभरा है।










