छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 13 फरवरी को विश्व रेडियो दिवस 2026 (World Radio Day 2026) के अवसर पर आकाशवाणी रायपुर और यूनेस्को के संयुक्त तत्वावधान में कॉन्क्लेव का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम की थीम थी “रेडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: AI एक टूल है, आवाज़ नहीं” जिसमें AI कंटेंट प्रोडक्शन, आर्काइविंग, अनुवाद, पहुंच और ऑडियंस एनालिटिक्स में मदद कर सकता है, लेकिन यूनेस्को जोर देता है कि यह केवल सहायक माध्यम बने, मानवीय आवाज़, संपादकीय विवेक और विश्वसनीयता को कभी प्रतिस्थापित न करे।
गौरतलब है की विश्व रेडियो दिवस 13 फरवरी को मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत यूनेस्को के 36वें जनरल कॉन्फ्रेंस (2011) में हुई और संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2012 में इसे आधिकारिक रूप से अपनाया। यह तारीख 1946 में यूनाइटेड नेशंस रेडियो की स्थापना की याद दिलाती है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैश्विक सहयोग और सूचना साझा करने का प्रतीक बनी।

रेडियो ने ऐतिहासिक रूप से जनमत निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है; भारत में 14-15 अगस्त 1947 की आधी रात को आजादी की घोषणा ने लाखों लोगों को एकजुट किया। आज भी यह शक्तिशाली सार्वजनिक सेवा माध्यम है, जो शिक्षा, सूचना और आपदा प्रबंधन में अहम योगदान देता है। भारत में आकाशवाणी (AIR) 1936 से सक्रिय है, जो 99% आबादी को कवर करती है, जबकि कम्युनिटी रेडियो स्थानीय भाषाओं में ग्रामीण विकास को मजबूत करता है।
इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आकाशवाणी को देश का सबसे विश्वसनीय संचार माध्यम बताते हुए कहा कि यह निजी चैनलों के बीच भी संतुलित भूमिका निभाता है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के विकास में रेडियो की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की और घोषणा की कि अंबिकापुर तथा सरायपाली में दो नए रेडियो ट्रांसमीटर स्थापित किए जाएंगे, जिससे राज्य की लगभग 95 प्रतिशत आबादी आकाशवाणी की पहुंच में आएगी। उन्होंने कहा कि दूरस्थ अंचलों में भी नए ट्रांसमीटर लगाए जाएंगे और AI की मदद से आपातकालीन सूचनाएं, मौसम अपडेट तथा कंटेंट को और बेहतर बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम में यूनेस्को के रीजनल एडवाइजर ऑफ कम्युनिकेशन एंड इनफॉर्मेशन सुश्री हज़्ज़ाज़ मा’अली ने सभी को विश्व रेडियो दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि रेडियो पूरी दुनिया में सबसे अधिक पहुंच रखता है और सबसे अधिक भरोसे वाला माध्यम है। रेडियो ने कठिन समय में भी अपनी विश्वसनीयता बनाए रखते हुए दुनिया को सही सूचनाएं प्रदान की। सुश्री अली ने कहा कि एआई के माध्यम से रेडियो को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और इस दिशा में ठोस प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आकाशवाणी रायपुर छत्तीसगढ़ी और हिंदी भाषा में पूरे प्रदेश विशेषकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों तक अपनी सेवाएं दे रहा है। सुश्री अली ने कहा कि यूनेस्को रेडियो के विस्तार के लिए आकाशवाणी के साथ मिलकर नवाचार और तकनीकी पहलुओं पर लगातार सहयोग करेगा।
कार्यक्रम में कई अलग-अलग विषयों पर चर्चाएं हुई, आकाशवाणी के महानिदेशक राजीव जैन, यूनेस्को के क्षेत्रीय सलाहकार हज्जाज माले सहित कई विशेषज्ञों ने भाग लिया, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैषणव ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया, इसके अलावा AI इन रेडियो, एथिकल यूज ऑफ AI, न्यू AI टेक्नोलॉजी इन रेडियो, इन्नोवेशंस फॉर रेडियो जैसे प्रमुख विषयों पर एक्स्पर्ट्स ने चर्चा की। इसके अलावा मशहूर रेडियो प्रेमी मनोहर डेंगवानी द्वारा संकलित 852 से ज्यादा रेडियो की प्रदर्शनी भी लगाई गयी जिसे देखकर दर्शकों ने आश्चर्य प्रकट किया और रेडियो के प्रति उनकी दीवानगी को सराहा। यह आयोजन रेडियो की शाश्वत प्रासंगिकता पर केंद्रित रहा खासकर ग्रामीण और दूर-दराज क्षेत्रों में जहां यह सूचना, शिक्षा और आपदा प्रबंधन का प्रमुख माध्यम बना हुआ है।










