रायपुर। केंद्रीय श्रमिक संगठनों के आह्वान पर 12 फरवरी को आयोजित राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल (Worker’s Strike) का छत्तीसगढ़ में व्यापक असर देखने को मिला।
श्रम संहिताओं के विरोध में प्रदेशभर में विभिन्न उद्योगों और सरकारी-निजी क्षेत्रों के कर्मचारियों ने काम बंद कर प्रदर्शन किया, जिससे करोड़ों रुपए का उत्पादन प्रभावित होने का दावा किया गया है।
प्रदेश में बीमा, बैंक, कोयला, इस्पात सहित कई प्रमुख उद्योगों में पूर्ण हड़ताल रही। पोस्ट ऑफिस, टेलीकॉम सेक्टर, बालको, एनएमडीसी, बिजली, परिवहन, आंगनबाड़ी, मध्यान्ह भोजन, दल्लीराजहरा की खदानों सहित अन्य खदानों के कर्मचारी, राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारी तथा बीड़ी मजदूर भी हड़ताल में शामिल रहे। रायपुर में विश्वविद्यालय कर्मचारियों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों ने भी भागीदारी की।
प्रदेशभर में हड़ताली मजदूरों और कर्मचारियों ने अपने-अपने कार्यालयों के समक्ष प्रदर्शन किया और शहरों के प्रमुख स्थलों पर सभाएं आयोजित कीं। सूरजपुर, सरगुजा, बलरामपुर, कोरबा, कांकेर, मरवाही और राजनांदगांव समेत कई जिलों में किसानों ने रैलियां निकालकर चक्का जाम किया।
राजधानी रायपुर के पंडरी में संयुक्त हड़ताली सभा आयोजित की गई।
सभा में ऑल इंडिया इंश्योरेंस एम्प्लाइज एसोसिएशन, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू), ऑल इंडिया बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन, बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन, विश्वविद्यालय शिक्षक संघ, दवा प्रतिनिधि संघ, इंश्योरेंस पेंशनर्स एसोसिएशन, पोस्टल कर्मचारी यूनियन, एम्स ठेका कर्मी यूनियन, नगर निगम सफाई कर्मी संघ और फुटकर व्यापारी संघ सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
सभा की अध्यक्षता बैंक कर्मचारी नेता शिरीष नलगुंडवार ने की। धर्मराज महापात्र, एम.के. नंदी, वी.ए.के. शर्मा, अतुल देशमुख, सुरेंद्र शर्मा, वी.एस. बघेल, गजेंद्र पटेल, अनुसुइया ठाकुर और राजेश पराते सहित अन्य वक्ताओं ने सभा को संबोधित किया। संस्कृति कर्मी रतन गोंडाने ने जनगीत प्रस्तुत किए।
सभा में चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने, एलआईसी समेत सभी सरकारी क्षेत्रों में नई भर्ती शुरू करने, बीमा संशोधन विधेयक और बीमा क्षेत्र में 100% एफडीआई के प्रावधान को रद्द करने, एलआईसी के विनिवेश पर रोक लगाने, बैंकों के निजीकरण को रोकने, सार्वजनिक क्षेत्रों को बचाने, महंगाई और बेरोजगारी पर नियंत्रण, किसानों को फसल का वाजिब मूल्य, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, 8 घंटे के कार्य दिवस को बरकरार रखने, ठेका- संविदा प्रथा समाप्त करने तथा न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये मासिक करने की मांग उठाई गई।
वक्ताओं ने दावा किया कि यह स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे बड़ी आम हड़ताल है, जिसमें देशभर से 35 करोड़ श्रमिकों ने भाग लिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने श्रम संहिताएं वापस नहीं लीं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
हड़ताल को प्रदेश कांग्रेस समिति और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी सहित कई राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया। प्रदेश कांग्रेस की ओर से शैलेश नितिन त्रिवेदी, पूर्व महापौर प्रमोद दुबे, कुमार मेनन, शिव ठाकुर, राजेंद्र पप्पू बंजारे और सुशील सन्नी अग्रवाल ने सभा को संबोधित कर श्रम संहिताओं की वापसी और निजीकरण की नीतियों पर रोक लगाने की मांग की। माकपा जिला सचिव राजेश अवस्थी ने भी आम हड़ताल को समर्थन देते हुए केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की।
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