अमेरिकी दबाव के बावजूद जब भारत ने वेनेजुएला से किया समझौता

January 4, 2026 6:09 PM
Venezuela

नई दिल्ली। यह 2005 का वक्त था। केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी। अमेरिका के तमाम विरोध के बावजूद भारत ने वेनेजुएला के वामपंथी राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज की भारत यात्रा में उनका जमकर स्वागत किया। शावेज ने भी कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि वे भारत के साथ तेल आपूर्ति का दीर्घकालिक समझौता कर लेंगे।

भारतीय व्यापारिक नेताओं के साथ एक मंच के दौरान चावेज ने कहा, ‘हम अमेरिका के साथ जिस तरह से पेट्रोलियम की आपूर्ति करते हैं, उसी तरह से स्थायी रूप से पेट्रोलियम की आपूर्ति करना चाहते हैं।’

उस दौर में भारत की तेल जरूरतें भी बढ़ रही थीं। वह नए आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहा था। शावेज की यह यात्रा सफल रही।

उस दौर में एशिया में कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता भारत, अपने तेल का 70% आयात करता था , जिसमें से अधिकांश मध्य पूर्व से आता रहा।लेकिन मध्य पूर्व में संभावित अस्थिरता के जोखिम को कम करने के लिए, भारत अपने तेल स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है।

साथ ही, वह स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने का भी प्रयास कर रहा है। इस बीच, दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश वेनेजुएला अपने निर्यात में विविधता लाने और अमेरिकी बाजार पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा था।

यह मुलाकत रंग लाई वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी पेट्रोलेस डी वेनेजुएला पहले से ही ONGC को देश के उत्तर-पश्चिमी राज्य राजस्थान में तेल निष्कर्षण के संबंध में सलाह दे रही है।

भारत पहुंचने पर चावेज, जो अपनी यात्रा के दौरान जैव प्रौद्योगिकी और रेल उद्योग समझौतों पर भी हस्ताक्षर किया , उन्होंने अमेरिका को तेल की आपूर्ति रोकने की धमकी को दोहराया।

चावेज ने भारत की धरती से साफ कहा, ‘हम अमेरिका को तेल की इस आपूर्ति से तब तक नहीं बचेंगे जब तक कि अमेरिकी सरकार थोड़ी भी मनमानी न करे और हमें नुकसान पहुंचाने की कोशिश न करे। हम भारत से समझौता करके रहेंगे।’

इस मुलाकत के दौरान शावेज पश्चिम बंगाल के तत्कालीन सीएम बुद्धदेब भट्टाचार्य से भी मिले और उन्हें गले लगा लिया।

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