पश्चिम बंगाल में SIR पर सवाल खड़ा करने के बावजूद सुप्रीम अदालत खामोश

Supreme Court

नेशनल ब्यूरो। नईदिल्ली

सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया से संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान जस्टिस जोयमलया बागची ने मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की।

जस्टिस बागची ने चुनाव आयोग से कहा कि उम्मीदवार के रूप में भाग लेने से अनुचित इनकार चुनाव रद्द करने का आधार है। लेकिन वोट देने के अधिकार को लेकर, जब तक कि यह मतदाताओं की बहुत बड़ी संख्या न हो, धारा 100 के तहत चुनाव रद्द करने का आधार नहीं बनता।

उन्होंने कहा कि मान लीजिए जीत का अंतर 2% है और 15 फीसदी मतदाता जो मैप किए गए थे वोट नहीं दे पाए, तो शायद हम कोई राय नहीं दे रहे हैं, लेकिन हमें निश्चित रूप से अपने दिमाग लगाना पड़ेगा। कृपया ध्यान रखें कि एक सतर्क मतदाता की चिंता, जिसका नाम सही या गलत तरीके से सूची में नहीं है, हमारे दिमाग में नहीं है।

जस्टिस बागची ने यह भी टिप्पणी की कि अगर जीत का अंतर बाहर किए गए मतदाताओं के प्रतिशत से कम है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है।

क्‍या था मामला

याचिकाकर्ता कुरैशा यामिन और अन्य ने अपनी अपीलों पर फैसला होने तक मतदाता सूची फ्रीज करने की तारीख बढ़ाने की मांग की थी, ताकि अगर उनकी अपील मंजूर होती है तो वे आगामी विधानसभा चुनाव में वोट दे सकें।वे 2002 की मतदाता सूची में मैप किए गए थे और उनके पास आधार कार्ड तथा पासपोर्ट थे।बेंच में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत और जस्टिस जोयमलया बागची शामिल थे।

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ नामक नई श्रेणी शुरू की, जो बिहार जैसे अन्य राज्यों से अलग था।बिहार SIR मामले में आयोग ने कहा था कि 2002 की सूची में मैप किए गए लोगों को दस्तावेज अपलोड करने की जरूरत नहीं है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इस पर विचलन किया गया।

अदालत की अन्य महत्वपूर्ण टिप्पणियां

जस्टिस बागची ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों से 100% सटीकता की उम्मीद नहीं की जा सकती, क्योंकि उन्हें एक दिन में 1000 से ज्यादा दस्तावेज देखने पड़ रहे हैं। 70% सटीकता को भी उत्कृष्ट0माना जाना चाहिए। इसलिए मजबूत अपीलीय तंत्र की जरूरत है।

वोट देने का अधिकार सिर्फ संवैधानिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी है। “जिस देश में आप पैदा हुए हैं, वहाँ वोट देना लोकतंत्र का हिस्सा बनना है।”

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और याचिकाकर्ताओं को अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने अपनी अपील आगे बढ़ाने को कहा। साथ ही कहा कि अगर अपील मंजूर होती है तो आवश्यक परिणाम निकलेंगे।

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