नई दिल्ली।पश्चिम बंगाल में चुनाव उपरांत हो रही राजनीतिक हिंसा के सारे रिकार्ड ध्वस्त कर रही है। पुलिस की मौजूदगी में प्रदेश के कोने कोने से तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को पीटे जाने उनके गले में जूते पहनाने उन पर सड़े गले अंडे फेंके जाने के मामले सामने आ रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट फिलहाल इस मामले में खामोश है वहीं कोलाकाता हाईकोर्ट ने इसे सामाजिक बुराई कहा है। ताजा घटनाक्रम में तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा के कोलकाता स्थित टॉलीगंज आवास पर पुलिस की मौजूदगी में अंडे फेंके जाने और काले झंडे दिखाये जाने का मामला सामने आया है।
महुआ मोइत्रा ने इसकी शिकायत पश्चिम बंगाल के डीजीपी से की है।नहीं भुला जाना चाहिए कि पीएम नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के चुनावों की समाप्ति के बाद कहा था कि पहली बार एक भी निर्दोष की जान नहीं गई। लेकिन अब जो हिंसा का दौर चल रहा है उस पर ना केवल पीआईएम मोदी बल्कि गृहमंत्री अमित शाह पूरी तरह से ख़ामोश है।
चुनाव पूर्व बयानों ने किया आग में घी का काम
पश्चिम बंगाल में चुनाव उपरांत हिंसा की आशंका पहले से थी लेकिन इसे रोकने के कोई फौरी उपाय नहीं किए गए ना तो बीजेपी के किसी बड़े नेता ने हिंसा ना करने को लेकर कोई बयान दिया। चुनाव के दौरान तृणमूल नेता अभिषेक बैनर्जी और गृहमंत्री अमित शाह के भाषणों में संभावित हिंसा की आहट साफ़ सुनाई दे रही थी।
अभिषेक ने कहा था कि “पिछली बार हम उदार थे, इस बार नहीं होंगे” वहीं अमित शाह ने कहा था कि “दीदी के गुंडे पहले चरण में नहीं निकले, दूसरे चरण में भी न निकलें,उन्हें उल्टा लटकाकर सीधा कर देंगे।” मतगणना खत्म होने के तत्काल बाद एक के बाद एक करके विपक्षी नेताओं पर हमले शुरू कर दिए गए।इन हमलों की शुरुआत में सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हमले के साथ हुई। जब भीड़ ने उन्हें पूरी तरह से घेर लिया उन पर अंडों की बरसात कर दी गई। वो जैसे तैसे हेलमेट पहन कर निकले।
फाल्टा से तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर ख़ान को गिरफ्तारी के बाद फाल्टा की सड़कों पर पुलिस द्वारा तीन बार कमर में रस्सी बांधकर, हाथ जोड़े और स्थानीय लोगों से से माफी मांगते हुए घुमाया गया। यह काफी विवादास्पद रहा।कोलकाता हाईकोर्ट ने इस परेडिंग की प्रैक्टिस पर पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी।उनकी पत्नी सरीना बीबी को भी बाद में गिरफ्तार किया गया।आरोप था कि उन्होंने समर्थकों को फाल्टा पुलिस स्टेशन पर हमला कराने और खान को छुड़ाने की कोशिश की।इसके बाद एक के बाद एक नेताओं पर हमले शुरू हो गए यहाँ तक कि ममता बनर्जी भी सुरक्षित नहीं रहीं। उनके घर के आस पास से सुरक्षा भी हटा ली गई थी।
शुभेंदु अधिकारी खामोश ममता हमलावर
हिंसा के इस ताजा दौर में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की चुप्पी के मायने निकाले जा रहे हैं उन्होंने कहा कि कानून हाथ में ने लें लेकिन जहाँगीर ख़ान पर कार्रवाई का उन्होंने समर्थन किया है । पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी पर “rulers became killers” का आरोप लगाया। अभिषेक बनर्जी पर हमले को भी उन्होंने भाजपा बताया।
उन्होंने कहा कि BJP विपक्ष को कमजोर करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। पोस्ट-पोल हिंसा को “BJP का मॉडल” करार दिया और केंद्र में बीजेपी सरकार हटाने की बात कही।तृणमूल कांग्रेस ने अंडा फेंके जाने और हमलों पर कोलकाता हाईकोर्ट में PIL दायर की है। सांसद महुआ मोइत्रा के साथ चुनाव परिणाम आने के बाद कोलकाता दिल्ली फ्लाइट में बदसलूकी की गई, फिर वहीं आज उनके घर पर हमला बोला गया।
महुआ का कहना था कि पुलिस की निगरानी में, भाजपा की भीड़ ने हमला बोला है। मैं पिछले एक घंटे से यहां खड़ी हूं। मैंने डीजीपी और बाकी सभी को फोन किया है, लेकिन पुलिस बैठी देख रही है। सीआरपीएफ भी देख रही है,”यह मेरा इलाका है। मैं यहाँ की सांसद हूँ। मैं अपने कार्यालय में हूँ। मैं यहाँ से नहीं हिलने वाली। कृपया उनके चेहरे देखिए।
कल पश्चिम बंगाल सरकार इससे इनकार करेगी। कोई पुलिस संज्ञान नहीं लेगी। कोई अदालत संज्ञान नहीं लेगी। सीआरपीएफ सब देख रही है,”।
कोलकाता हाईकोर्ट ने क्या कहा
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को आपराधिक मामलों में गिरफ्तार या आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ अंडा फेंकने, सार्वजनिक हिंसा और भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने की घटनाओं को रोकने के लिए दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया | ऐसी घटनाओं की आलोचना करते हुए न्यायालय ने कहा,”राज्य का यह दायित्व है कि वह अभियुक्तों को अमानवीयता और बर्बरता से बचाए। आम जनता कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकती। अभियुक्तों पर अंडे फेंकने और उन्हें घिनौने धोखेबाज करार देने जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाना आवश्यक है और अभियुक्तों को उचित सुरक्षा प्रदान करना राज्य का कर्तव्य है।
“न्यायालय ने डीजीपी को आदेश दिया कि वे टीएमसी नेताओं सहित आरोपी व्यक्तियों पर इस तरह के हमलों को रोकने के लिए तत्काल दिशानिर्देश जारी करें।आदेश में कहा गया “हम पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को निर्देश देते हैं कि वे आरोपियों पर अंडे फेंकने और किसी भी प्रकार का उपद्रव करने से रोकने के लिए तत्काल उचित दिशानिर्देश जारी करें, ताकि सार्वजनिक हिंसा और भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने जैसी घटनाओं को रोका जा सके।
ये दिशानिर्देश सभी पुलिस थानों को भेजे जाएं… राज्य के अधिकारी कड़ी निगरानी रखें और यह सुनिश्चित करें कि ऐसी किसी भी घटना की सूचना मिलते ही उचित कदम उठाए जाएं,” ।न्यायालय ने डीजीपी से इन निर्देशों के अनुपालन के लिए उठाए गए कदमों पर 20 जुलाई तक एक रिपोर्ट भी मांगी है
प्रमुख घटनाओं का विवरण
यहां कुछ प्रमुख और बार-बार रिपोर्ट की गई घटनाएं हैं
- 28 मई 2026: सौगत रॉय (वरिष्ठ TMC नेता) — डम डम (उत्तर 24 परगना) क्षेत्र में निर्वाचन क्षेत्र दौरे के दौरान कार पर अंडे फेंके गए और नारे लगाए गए।
- 30 मई 2026: अभिषेक बनर्जी (TMC महासचिव, सांसद) — सोनारपुर (दक्षिण 24 परगना) में मृतक पार्टी समर्थक के परिवार से मिलने गए थे। भीड़ ने अंडे और जूते फेंके, शर्ट फटी, सुरक्षा कर्मियों ने हेलमेट पहनाया और उन्हें शारीरिक रूप से बचाया। यह सबसे हाई-प्रोफाइल घटना मानी जाती है।
- 6 जून 2026: मदन मित्रा (वरिष्ठ TMC नेता, MLA) — कामरहाटी निर्वाचन क्षेत्र में उनके काफिले पर अंडे फेंके गए।
- 31 मई 2026: कल्याण बैनर्जी( वरिष्ठ TMC नेता, सांसद)- पोस्ट-पोल हिंसा के खिलाफ ज्ञापन देने जाते वक्त हमला,सिर फटा |
- 6-7 जून 2026: बप्पादित्य दासगुप्ता (TMC काउंसिलर) — कोर्ट जाते समय पुलिस एस्कॉर्ट के बावजूद अंडे फेंके गए।
- जून 2026 (लगभग): सुजॉय हाजरा — मिदनापुर में वाहन पर अंडे फेंके गए।
- जून 2026: सौकत मोल्ला और सभ्यसाची दत्ता (गिरफ्तार TMC नेता) — कोर्ट जाते समय भीड़ ने अंडे फेंके।
- 15 जून 2026: कुणाल घोष (TMC MLA और प्रवक्ता) — ममता बनर्जी के कलकत्ता निवास (कलिघाट) के बाहर मीडिया से बात करते समय एक युवक ने अंडा फेंका। दो व्यक्ति गिरफ्तार।
- 16 जून 2026: सौमित्र बनर्जी (TMC युवा नेता) — रानीगंज में कोर्ट जाते समय पुलिस एस्कॉर्ट के साथ आक्रामक रूप से अंडे फेंके गए और “चोर-चोर” के नारे लगाए गए।








