नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों को झटका देते हुए, मलेशिया ने कहा है कि अमेरिका के साथ उसका व्यापार समझौता अब अमान्य हो गया है। यह फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आया है जिसमें पारस्परिक टैरिफ को रद्द कर दिया गया था।

मलेशिया के निवेश, व्यापार और उद्योग मंत्री जोहारी घानी ने 15 मार्च को बताया कि अमेरिका के साथ पारस्परिक व्यापार समझौता अब अमान्य हो गया है, क्योंकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि टैरिफ लगाने के लिए अमेरिका के पास उचित कारण होने चाहिए।
मलेशिया और अमेरिका ने 26 अक्टूबर 2025 को ART पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत टैरिफ पहले 47 फीसदी से घटाकर 24 फीसदी और फिर 19 फीसदीकर दिए गए थे, साथ ही कुछ उत्पादों पर शून्य ड्यूटी लगाई गई थी। बदले में मलेशिया ने अमेरिका को गहरी बाजार पहुंच और नीतिगत रियायतें देने पर सहमति जताई थी।
बाद में, 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पारस्परिक टैरिफ को रद्द कर दिया। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने सभी देशों पर 150 दिनों के लिए 10 फीसदी टैरिफ लगा दिया और कहा कि जल्द ही इसे 15 फीसदी से बदल दिया जाएगा। अमेरिका ने चेतावनी भी दी है कि जो देश व्यापार समझौतों से बाहर निकलेंगे, उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका उम्मीद करता है कि भारत और अन्य व्यापारिक देश अपने समझौतों का सम्मान करेंगे।ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दो कारणों से कई देश अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों से बाहर निकल सकते हैं:
पहला सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इन समझौतों की आर्थिक वैल्यू खत्म हो गई है.इन समझौतों से मिलने वाला विशेष लाभ अब गायब हो गया है। दूसरा समझौते होने के बाद भी अमेरिका से व्यापारिक दबाव जारी है, जिसमें नई जांचें शुरू की जा रही हैं। इससे पता चलता है कि समझौता करने वाले देश भी नई जांचों और संभावित टैरिफ के जोखिम में बने रहते हैं।
आर्थिक विशेषज्ञ अजय श्रीवास्तव ने कहा: “कई सरकारों के लिए यह सवाल उठता है कि अगर समझौते के बिना भी वही टैरिफ व्यवहार मिल रहा है और व्यापारिक दबाव जारी है, तो राजनीतिक रूप से महंगी रियायतें क्यों बनाए रखी जाएं? मलेशिया का समझौते को अमान्य घोषित करना कई अन्य देशों के लिए उदाहरण बन सकता है।
भारत और अमेरिका ने 1 फरवरी को शुरुआती व्यापार समझौते की घोषणा की थी, जिसमें 25 फीसदी पेनल्टी टैरिफ हटाया गया और पारस्परिक टैरिफ 18 फीसदी कर दिया गया। अभी दोनों देश आपसी लाभ वाले समझौते के लिए बातचीत में जुड़े हुए हैं, लेकिन समयसीमा या विवरण स्पष्ट नहीं है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा कहते हैं कि भारत अपने भविष्य का फैसला करने में मलेशिया जितना सक्रिय क्यों नहीं है? मोदी अमेरिका के लिए इतना कष्ट क्यों सह रहे हैं? क्या इसका कारण यह है कि अमेरिका को 1993 से ही उनके रहस्यों की जानकारी है।









