रायपुर। केंद्रीय बजट 2026-27 को जन-विरोधी और कॉरपोरेट-परस्त करार देते हुए सीपीआई (एमएल) रेड स्टार ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। छत्तीसगढ़ राज्य सचिव कॉमरेड सौरा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह बजट गरीबों, मजदूरों, किसानों, दलितों, आदिवासियों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और युवाओं के हितों के खिलाफ है।
संगठन का आरोप है कि पिछले 10 वर्षों में देश का सार्वजनिक कर्ज 130 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से पेश यह बजट अडानी-अंबानी जैसे बड़े कॉरपोरेट घरानों की सेवा में समर्पित है। “विकसित भारत” के नारे के पीछे असल में “विकसित कॉरपोरेट भारत” की साजिश छिपी है, जबकि भूख, बेरोजगारी, महंगाई और कर्ज से जूझती जनता की कोई प्राथमिकता नहीं है।
बजट में मजदूरों के लिए कोई सकारात्मक प्रावधान नहीं है। न्यूनतम वेतन बढ़ाने, स्थायी रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, ईएसआई-पीएफ विस्तार या ठेका मजदूरी खत्म करने का जिक्र तक नहीं। उल्टे ठेका श्रम की बढ़ोतरी, असंगठित क्षेत्र का दमन और चार श्रम संहिताओं से मजदूर अधिकारों की छीनाझपटी जारी है। कॉरपोरेट को कर रियायतें मिल रही हैं, जबकि मजदूरों को शून्य आश्वासन है।
कृषि संकट गहराने के बावजूद बजट में वैधानिक एमएसपी, व्यापक कर्ज माफी या फसल मूल्य सुरक्षा पर चुप्पी साधी गई है। किसानों की आय दोगुनी करने के वादे महज चुनावी जुमले साबित हुए। मनरेगा (अब नाम बदलकर वीबी रामजी) के आवंटन में कटौती से ग्रामीण गरीबों की आजीविका पर सीधा हमला किया गया है।
एससीएसपी-टीएसपी फंड में कटौती से दलितों और आदिवासियों की शिक्षा, रोजगार, आवास और जमीन के अधिकार छीने जा रहे हैं। यह संविधान के साथ विश्वासघात है और कॉरपोरेट हित में आदिवासी भूमि हड़पने को बढ़ावा दे रहा है।
बजट में महिलाओं के रोजगार, सुरक्षा, पोषण या 14 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं/सहायिकाओं और आशा वर्कर्स के सम्मानजनक वेतन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। युवा भीषण बेरोजगारी से जूझ रहे हैं, लेकिन स्थायी रोजगार की कोई ठोस योजना नहीं।
सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य को मजबूत करने के बजाय निजीकरण को बढ़ावा दिया गया है। गरीबों के इन अधिकारों को कॉरपोरेट बाजार के हवाले करना मानवता के खिलाफ अपराध है।
बजट में ग्रामीण विकास, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, आंगनबाड़ी आदि क्षेत्रों में लाखों करोड़ की कटौती की गई है, जबकि अमीरों और कॉरपोरेट को रियायतें। यह वर्ग युद्ध की घोषणा है, जो समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता, समानता और सामाजिक न्याय के संवैधानिक मूल्यों को रौंदता है।










