नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने परिसीमन के आधार पर लोकसभा सीटें कम होने का खतरा जताया है। इसके बाद परिसीमन को लेकर पूरे देश में चर्चा छिड़ गई है। यदि परिसीमन के आधार पर राज्यों की लोकसभा सीटें तय होती हैं, तो संसदीय प्रतिनिधित्व पर उसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
स्टालिन ने राज्य के लोगों से तुरंत बच्चे पैदा करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि तमिलनाडु में परिवार नियोजन को सफलतापूर्वक लागू करना नुकसान का सौदा साबित हुआ। स्टालिन ने चेतावनी देते हुए कहा कि जनसंख्या आधारित परिसीमन तमिलनाडु के संसदीय प्रतिनिधित्व को कम कर सकता है। स्टालिन का कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो राज्य में लोकसभा की मौजूदा सीटें 39 से घटकर 31 रह जाएंगी।
उत्तर बनाम दक्षिण के हक की लड़ाई
अगर परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ तो इससे दक्षिण के राज्यों में लोकसभा सीटें घट सकती हैं और उत्तर के राज्यों में सीटें बढ़ सकती हैं। दक्षिण के राज्य इसका विरोध कर रहे हैं। दक्षिण भारत के पांच राज्य आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु से कुल 129 सांसद लोकसभा में आते हैं। उत्तर भारत के सिर्फ दो राज्य यूपी और बिहार को ही मिला लिया जाए तो 120 लोकसभा सीटें हैं। उत्तर प्रदेश में कुल 80, पश्चिम बंगाल में 42, महाराष्ट्र की में 48 लोकसभा सीटें हैं। जाहिर है अगर परिसीमन को जनसंख्या आधार बनाया जाता है तो उत्तर भारत के राज्यों को फायदा होगा और दक्षिण के राज्यों को नुकसान। हालांकि स्टालिन के आशंकाओं पर गृहमंत्री अमित शाह प्रतिक्रिया दे चुके हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि परिसीमन के बाद भी दक्षिण के किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी।
प्रधानमंत्री ने क्या कहा था
28 मई, 2023 को संसद के नए भवन का के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था, “भविष्य में हम संसद की कुल सीटों और सांसदों की संख्या में वृद्धि देखेंगे, इसलिए, नई संसद का निर्माण समय की मांग थी।” नई संसद की लोकसभा में 888 सीटें और राज्य सभा में 384 सीटें हैं।
2019 में शोधकर्ताओं मिलन वैष्णव और जेमी हिंटसन ने ‘भारत में प्रतिनिधित्व का उभरता संकट’ नामक लेख में लोकसभा सीटों के बारे में बताया था।
शोध के अनुसार, 2026 तक अगर सीटों की संख्या अपरिवर्तित रहती है, तो दक्षिणी राज्यों की सीटों में कमी देखी जाएगी। अनुमान के मुताबिक।
- तमिलनाडु – 31 सीटें
- आंध्र प्रदेश व तेलंगाना – कुल 34 सीटें
- केरल – 12 सीटें
इसके विपरीत, उत्तर भारत में सीटों की संख्या में वृद्धि होगी।
- उत्तर प्रदेश – 91 सीटें
- बिहार – 50 सीटें
- राजस्थान – 31 सीटें
- मध्य प्रदेश – 33 सीटें
अगर सीटों का वितरण जनसंख्या वृद्धि के आधार पर होता है, तो लोकसभा की कुल सीटें 848 तक बढ़ सकती हैं। ऐसे में :-
- उत्तर प्रदेश – 143 सीटें
- बिहार – 79 सीटें
- मध्य प्रदेश – 52 सीटें
- पश्चिम बंगाल – 60 सीटें
- तमिलनाडु – 49 सीटें
- आंध्र प्रदेश व तेलंगाना – कुल 54 सीटें
- केरल – 20 सीटें
क्या होता है परिसीमन
परिसीमन का अर्थ है किसी क्षेत्र, निर्वाचन क्षेत्र या प्रशासनिक सीमा का पुनर्निर्धारण। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से चुनावों और प्रशासनिक सुधारों के लिए की जाती है, ताकि जनसंख्या में बदलाव के अनुसार सीटों का पुनर्वितरण किया जा सके। परिसीमन के लिए “परिसीमन आयोग” का गठन किया गया है, जो केंद्र सरकार द्वारा गठित एक स्वतंत्र निकाय है। देश में अब तक चार बार परिसीमन हो चुका है – 1952, 1963, 1973 और 2002 में। 2002 के बाद 2026 तक परिसीमन रोक दिया गया है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में विशेष परिसीमन 2022 में किया गया था।









