लखनऊ। वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को दिए एक इंटरव्यू में महिला पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव द्वारा अपनी आपबीती बताते हुए रो पड़ने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) रेड स्टार की उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी ने इस घटना पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे लोकतंत्र और संविधान पर सीधा हमला करार दिया है।
क्या है पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेस वार्ता के दौरान सवाल पूछने वाली पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव ने इंटरव्यू में घटना के बाद का अनुभव साझा किया। पत्रकार अभिषेक उपाध्याय से बातचीत में पत्रकार दिव्या ने बताया कि वह सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं और प्रदेश में विकास के दावों से जुड़े सवाल पूछना चाहती थीं। हालांकि, उनके मुताबिक मुख्यमंत्री सवाल का जवाब दिए बिना ‘बाय-बाय’ कहकर चले गए। इसके बाद भाजपा समर्थकों ने उन्हें घेरकर सवाल पूछने और कथित तौर पर बदतमीजी करने का आरोप लगाया। दिव्या ने कहा कि बाद में उन्हें वहां से तुरंत निकलने और सुरक्षित रहने की सलाह दी गई। उन्होंने धमकियों को लेकर डर भी जताया।
इस घटना के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) रेड स्टार के राज्य सचिव कन्हैया ने लखनऊ में बयान जारी कर कहा कि सिर्फ मुख्यमंत्री से सवाल पूछने की वजह से एक महिला पत्रकार को भाजपा दफ्तर में घेरकर धमकाना, घर पर बुलडोजर चलवाने की धमकी देना और फिर चैनल प्रबंधन पर दबाव बनाकर नौकरी से निकलवा देना बेहद निंदनीय और फासीवादी काम है।
‘बेटी बचाओ’ का ढोंग बेनकाब
कन्हैया ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार का दोहरा चरित्र अब सबके सामने आ चुका है। एक तरफ ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देते है, वहीं दूसरी तरफ एक निडर पत्रकार बेटी को सिर्फ इसलिए प्रताड़ित करते हैं क्योंकि उसने चाटुकारिता की जगह पत्रकारिता को चुना। उन्होंने चेताया कि आज अगर इस आवाज को दबाया गया, तो कल सत्ता से सवाल पूछने वाली हर बेटी पर इसी तरह निशाना साधा जाएगा।
भाकपा (माले) रेड स्टार की प्रमुख मांगें:
दोषियों पर कार्रवाई: दिव्या श्रीवास्तव को धमकाने वाले भाजपा नेताओं पर तुरंत FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए। बुलडोजर की धमकी देने वालों पर एनएसए (NSA) लगाया जाए।
चैनल प्रबंधन पर केस: भाजपा के दबाव में पत्रकार को नौकरी से निकालने वाले न्यूज चैनल के मालिक और प्रबंधन के खिलाफ श्रम कानून और महिला उत्पीड़न की धाराओं में केस दर्ज हो।
सुरक्षा और पुनर्वास: दिव्या श्रीवास्तव को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराई जाए तथा सरकार उनके पुनर्वास और रोजगार की गारंटी दे।
स्वतः संज्ञान: प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और महिला आयोग इस गंभीर मामले पर तुरंत संज्ञान लें।
भाकपा (माले) रेड स्टार ने राज्य की सभी जनवादी और प्रगतिशील ताकतों से अपील की है कि वे पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव के समर्थन में एकजुट हों। पार्टी ने स्पष्ट किया कि सत्ता से सवाल पूछना कोई अपराध नहीं बल्कि जनता का लोकतांत्रिक अधिकार है, और वे इस लड़ाई में दिव्या के साथ मजबूती से खड़े हैं।









