रायपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर (Balrampur) जिले के हंसपुर गांव में आदिवासी राम नरेश राम की हत्या के आरोप में कुसमी एसडीएम करूण डहरिया, भाजपा के युवा मोर्चा के नेता अजय प्रताप सिंह, मंजीत कुमार यादव और सुदीप को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
इस केस में नायब तहसीलदार पारस शर्मा के खिलाफ एफआईआर नहीं हुई है। जांच में पता चला है कि नायब तहसीलदार पारस शर्मा विवाद बढ़ने की जानकारी मिलने पर मौके पर पहंचे थे। वे मारपीट में शामिल नहीं थे।
इस घटना के विरोध में मंगलवार को कुसमी बंद किया गया है। आज म़ृतक का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
कांग्रेस ने इस मामले पर कहा कि सरकार पर खनन माफियाओं के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है। दूसरी तरफ ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि एसडीएम के संरक्षण में अवैध खनन हो रहा था। जब ग्रामीणों ने शिकायत की तो एसडीएम ने नाराज होकर ग्रामीणों की पिटाई की।
ग्रामीणों ने गिरफ्तार एसडीएम की तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है।
एसडीएम 2022 में रिश्वत लेते पकड़े गए थे, तब उन्हें निलंबित किया गया था।
आपको बता दें कि हंसपुर में रविवार की शाम बक्साइट के अवैध उत्खनन करने वालों की गाड़ी ग्रामीणों ने पकड़ी थी। सूचना पर एसडीएम स्थानीय युवकों के साथ मौके पर पहुंचे थे और वारदात को अंजाम दिया।
मामले में बलरामपुर एसपी वैभव बैंकर ने कहा कि आरोपियों को अरेस्ट कर कोर्ट में पेश किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का भी बयान सामने आया है, उन्होंने कहा कि मामले की जांच जारी है। जो भी दोषी होगा, सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से आई एक खबर ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। सवाल सिर्फ एक मौत का नहीं है… सवाल है सिस्टम की जवाबदेही का।
आपको बता दें कि एसडीएम करुण डहरिया सहित चार लोगों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 115(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है।
अब तक की जांच के मुताबिक, राजस्व की टीम सरकारी वाहन की बजाय निजी कार में पहुंची थी वो भी थार है। थार के इस तरह के कई किस्से भी हैं। गाड़ी में कथित तौर पर कुछ बाहरी लोग भी थे।
मारपीट करने वाले एसडीएम का पुराना रिकॉर्ड निकलने लगता है। कुसमी एसडीएम करुण डहरिया वर्ष 2019 बैच के अधिकारी बताए जाते हैं। पहले भी इनका नाम विवादों में आ चुका है। साल 2022 में एंटी करप्शन ब्यूरो ने इन्हें कथित तौर पर 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। आरोप था कि बोरवेल खनन का बिल पास कराने के एवज में पैसे मांगे गए थे।
उस मामले में गिरफ्तारी के बाद निलंबन की कार्रवाई भी हुई थी।
विपक्ष ने सरकार पर हमला बोलते हुए इसे जंगलराज करार दिया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है, खनन माफिया को संरक्षण देने के लिए प्रशासन आम लोगों पर अत्याचार कर रहा है।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा है कि भाजपा सरकार में प्रशासनिक आतंकवाद चरम पर है। तस्कर को बचाने किसान की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई है। इसके अलावा दीपक बैज ने मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने इस घटना को सरकार और तस्करों के बीच सांठ-गांठ का परिणाम बताया है।
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस की सरकार के दौर में बड़ी बड़ी घटनाएं हुई हैं।
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