Tehsildar started a hunger strike: छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में एक सरकारी अधिकारी की घटना ने प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। कोरबा-दीपका में पदस्थ नायब तहसीलदार बंदे राम भगत सिटी कोतवाली थाने के सामने आमरण अनशन पर बैठ गए थे। उनका आरोप है कि 20 जनवरी को उनके बेटे राहुल भगत के साथ जिले के कलेक्टर के गनमैन ने मारपीट की और गाली-गलौज की।
तहसीलदार ने मीडिया को बताया कि इस हमले में उनके बेटे के कान का पर्दा फट गया है, जिसकी वजह से गंभीर चोट आई है। उन्होंने कहा कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद पुलिस कार्रवाई में देरी कर रही है और उन्हें टालमटोल जवाब दिए जा रहे हैं। तहसीलदार बंदे राम भगत ने बताया कि घटना के बाद वे दोपहर 3 बजे से सिटी कोतवाली थाने में बैठे रहे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने थाना प्रभारी को कई बार फोन किया, लेकिन कॉल नहीं उठाई गई। जब मुश्किल से कॉल उठी, तो भी सिर्फ गोलमोल जवाब मिले।
जांच अधिकारी से मिलने पर पता चला कि फाइल आरक्षक को दी गई है, लेकिन वहां से भी कोई संतोषजनक जानकारी नहीं मिली। इससे आक्रोशित होकर तहसीलदार ने थाने के सामने आमरण अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक FIR दर्ज नहीं होती और उन्हें उसकी कॉपी नहीं मिल जाती, तब तक वे न पानी पिएंगे और न कुछ खाएंगे।
खबर लिखे जाने तक की जानकारी के अनुसार, सिटी कोतवाली पुलिस ने कलेक्टर के गनमैन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। FIR दर्ज होने के बाद तहसीलदार ने अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। इस घटना से थाने में काफी हड़कंप मचा रहा और आला अधिकारियों को सूचना दी गई।
यह मामला प्रशासनिक अमले में चर्चा का विषय बन गया है। एक सरकारी अधिकारी को अपनी ही शिकायत पर FIR दर्ज कराने के लिए थाने के बाहर अनशन करना पड़ रहा है, तो आम नागरिक की स्थिति क्या होगी? यह सवाल अब उठने लगा है। पुलिस ने अब कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन घटना ने न्याय व्यवस्था और पुलिस की त्वरित कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। मामले की आगे की जांच जारी है।







