लेंस डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश दिया है। कोर्ट का कहना है कि निर्धारित वैधानिक योग्यता पूरी किए बिना किसी शिक्षक या ट्यूटर को स्कूल-कॉलेज में नियुक्त नहीं किया जा सकता इसके अलावा उन्हें सरकारी नौकरी में समायोजित भी नहीं किया जा सकता।
क्या है मामला ?
यह आदेश असम सरकार की उस योजना को चुनौती देने वाली याचिका पर आया है, जिसमें बिना तय योग्यता वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को सरकारी सेवा में शामिल करने का प्रावधान था। याचिकाकर्ता राजेश चौहान ने कहा कि निजी संस्थानों के शिक्षकों को बिना पारदर्शी और प्रतियोगी भर्ती प्रक्रिया के सीधे सरकारी सेवा में लेना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।
CJI की सख्त टिप्पणी
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच ने सुनवाई की। चीफ जस्टिस ने सवाल किया, ‘बिना योग्यता वाले लोगों को शिक्षक क्यों नियुक्त किया जा रहा है?’ याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि नियुक्तियों को ‘ट्यूटर’ कहकर स्वरूप बदलने की कोशिश हो रही है। इस पर चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि ऐसी व्यवस्था आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बर्बाद कर सकती है।
कोर्ट का निर्देश
बेंच ने कहा कि आरटीई एक्ट, एनसीटीई एक्ट और यूजीसी एक्ट के तहत तय योग्यता का पालन जरूरी है। बच्चों को अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलना संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत मौलिक अधिकार है। शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। असम सरकार और शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया कि बिना वैधानिक योग्यता वाले किसी भी शिक्षक या ट्यूटर को नियुक्त न करें और न ही उन्हें सरकारी सेवा में समायोजित करें।











