कॉकरोच मूवमेंट पर कहीं उत्साह कहीं उदासीनता

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश यात्रा शुरू करने से पहले जिस तरह से देशवासियों को सोना ना खरीदने, खाद्य तेल के इस्तेमाल में कमी लाने और विदेशयात्रा ना करने को कहा था उससे देश में या फिर विपक्ष में जिस तरह की प्रतिक्रियाओं की संभावनाओं की अपेक्षा थी। वह तात्कालिक तौर पर नहीं दिखी। लेकिन उनके विदेश यात्रा शुरू होने से उनके लौटने तक दो बड़ी घटनायें घटीं, जिनसे साफ हो गया कि जो चुप्पी खास तौर से युवा वर्ग में, मीडिया में और पढ़े लिखे टैक्स देने वाले समाज में नजर आ रही है वह तात्कालिक है। पीएम मोदी 15 मई को अपने निजी विमान पर उड़ने को तैयार ही हुए थे कि देश के सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने एक मुदकमे की सुनवाई के दौरान युवाओं को कॉकरोच कह डाला। निश्चित तौर पर देश का एक बड़ा तबका जो बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई, न्याय प्रणाली से क्षुब्ध रहता है उसने तात्कालिक तौर पर अपनी प्रतिक्रिया दी।



ट्रोलरों का हमला और प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर बीजेपी आइटीसेल और उसकी ट्रोल आर्मी ने सीजेआई के बयान के खिलाफ प्रतिक्रिया करने पर हमला बोलना शुरू कर दिया। उधर नीदरलैंड और नार्वे में पीएम जब पहुँचे तो भारत में मानवाधिकार, प्रेस स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न से जुड़े सवाल ना केवल वहाँ की मीडिया में तैर रहे थे बल्कि मेजबान राष्ट्राध्यक्ष भी इस पर चर्चा कर रहे थे । द लेंस से बातचीत में राजनैतिक विश्लेषक विभव जोशी कहते हैं यह पीएम मोदी के अब तक के सबसे विवादित दौरों में से एक रहा है। यह विवाद यकीनन नहीं पैदा होता अगर मीडिया सवाल न पूछती।



जनता के आक्रोश की अभिव्यक्ति

नीदरलैंड के पीएम रॉब जोटेन मोदी के पहुंचने से पहले ही प्रेस की स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों पर हमले को लेकर भारत सरकार की आलोचना कर चुके थे।नीदरलैंड और नार्वे की प्रेस खासतौर से महिला पत्रकार हेले के साथ हुए व्यवहार और डिप्लोमेट सीबी जॉर्ज के बेतुके जवाबों ने नाराज भारतीयों को आगबबुला कर दिया। एक तरफ हेले के समर्थन में सोशल मीडिया पर मौजूद लाखों भारतीय युवा, पत्रकार और कांग्रेस आ गई दूसरी तरफ़ “कॉकरोच जनता पार्टी” के नाम से अस्तित्व में आए एक हैंडल ने सोशल मीडिया पर बूम मचा दिया जो सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इस किस्म का विरोध टिकाऊ और किसी किस्म की संभावनाओं से भरा है?

आम आदमी पार्टी के संस्थापकों ने सबसे पहले किया सपोर्ट

दरअसल आम आदमी पार्टी के पूर्व मीडिया वर्कर और बॉस्टन में रह रहे अभिजीत दीपके के “कॉकरोच जनता पार्टी” वाले सोशल मीडिया मूवमेंट से सबसे पहले कनेक्ट होने वालों और उसके प्रचार प्रसार में वही टीम शामिल नजर आई जो पहले अन्ना मूवमेंट में दिख रही थी। प्रशांत भूषण, मनीष सिसोदिया, योगेंद्र यादव ने इस मूवमेंट को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और इस मूवमेंट से जुड़ने की अपील तक कर डाली।

नहीं भूलना चाहिए यह वही टीम थी जिसने लोगों को इंडिया अगेंस्ट करप्शन के बेहद लोकप्रिय हुए मूवमेंट से जोड़ा था। प्रशांत, मनीष समेत आम आदमी पार्टी के प्रमोशन का सीजेपी को फायदा भी मिला। क्योंकि जो बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और न्यायपालिका की स्वेच्छाचारिता से जुड़े मुद्दों पर जनता पहले ही नाराज थी। यह मूवमेंट रंग लाया और सीजेपी के इंस्टा पैर फालोवरों की संख्या बीजेपी और कांग्रेस के हैंडल्स से ज़्यादा हो गई। लेकिन एक चीज चौंकाने वाली रहे कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही इस मूवमेंट पर शुरुआत में खामोश रहे। वैभव पुरोहित कहते हैं युवाओं में परिवर्तन की भूख है इस तरह के मूवमेंट हालांकि बहुत ज्यादा महत्व नहीं रखते लेकिन यह जरूरी है कि हम युवाओं की समस्याओं को सुने और उसका समाधान निकालें ।



कांग्रेस की ओर से दिग्विजय और थरूर का बयान

कांग्रेस संगठन में मौजूद बड़े नेताओं ने कॉक्रोच जनता पार्टी वाले मूवमेंट से ख़ुद को दूर रखा इसकी एक बड़ी वजह अन्ना हजारे के नेतृत्व में हुए आंदोलन की स्मृतियाँ थी जिससे डॉ मनमोहन सिंह जी कि 10 साल पुरानी सरकार को जाना पड़ा था। आम आदमी पार्टी के नेताओं की अचानक इस मूवमेंट से जुड़ी सक्रियता और विदेशों के अलग अलग उन हैंडल से प्रमोशन जिन्होंने आम आदमी पार्टी के लिए काम किया कांग्रेस के खड़े कर देने को काफ़ी थी लेकिन फिर भी शशि थरूर और दिग्विजय सिंह ने अपनी बात कह।
शशि थरूर CJP के उभार को पहेली बताया, युवाओं की सरकार के प्रति नाराजगी और फ्रस्ट्रेशन का प्रतीक माना। X अकाउंट ब्लॉक होने को भयानक कहा और विपक्ष को युवा एनर्जी को सही दिशा में इस्तेमाल करने की सलाह दी। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह सीजेपी के तमाम ट्वीट्स को रीट्वीट भी कर रहे हैं और उन्हें सलाह देते हुए कहा “आपका मैंने घोषणा पत्र भी देखा। एक महत्वपूर्ण विषय छूट गया।

क्या भारत में लोकतंत्र आवश्यक है? यदि आवश्यक है तो क्या निष्पक्ष चुनाव चुनाव नहीं होना चाहिए? यदि निष्पक्ष चुनाव आवश्यक है तो क्या चुनाव आयोग को निष्पक्ष नहीं होना चाहिए? मनीष सिसोदिया को छोड़कर किसी बड़े मौजूदा आप लीडर ने इस पर कोई प्रक्रिया नहीं दी। लेकिन महुआ मोइत्रा, कीर्ति आजाद समेत टीएमसी के तमाम लीडर, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव इस मूवमेंट के समर्थन में दिखे। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेन्द्र राजपूत कहते हैं कि किसी सोशल मीडिया मूवमेंट से यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि युवा किसी बुलबुले की तरह उठे आंदोलन के साथ हैं भारत का युवा गंभीर है।

अन्ना आंदोलन का विस्तार

बीजेपी समर्थित कई हैंडल्स ने इसे पाकिस्तान से लिंक्ड बताकर क्रिटिसाइज किया।अंततः भारत सरकार ने इसे राष्ट्रविरोधी बताते हुए भारत में प्रतिबंधित कर दिया। डाटा साइंटिस्ट नवीन रमन कहते हैं कि ऐसे सोशल मीडिया मूवमेंट किसी भी अच्छे क्रिएटिव सोच वाले SEO के माध्यम से वायरल किए जा सकते हैं। लेकिन नहीं भुलना चाहिए इसमें विचारों से ज़्यादा कंटेंट की मारक क्षमता का रोल होता है, वो कहते हैं “मी टू मूवमेंट” भी सोशल मीडिया पर ऐसी ही चला था और एक मंत्री को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। यह बात इंडिया एग्रेंस्ट करप्शन के साथ हुई। सोशल मीडिया पर अब बड़ी स्नाख्या में हैंडल इस मूवमेंट की यहकहकर अलोचना कर रहे कि यह अन्ना आंदोलन का विस्तार है।


वामपंथी छात्र संगठनों में जोश

जेएनयू (JNU), डीयू (DU), और जामिया जैसी यूनिवर्सिटीज में सक्रिय SFI और AISA के कई छात्र काउंसिल सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया (X और इंस्टाग्राम) पर #CockroachJantaParty और कॉकरोच इमोजी का इस्तेमाल कर इस मुहिम को रीपोस्ट किया है।चूंकि यह मूवमेंट बेरोजगारी, पेपर लीक, और न्यायपालिका के कथित जनविरोधी बयानों के खिलाफ एक तीखा व्यंग्य है, इसलिए वामपंथी छात्र संगठनों के युवाओं ने इसे युवाओं के गुस्से को दर्शाने वाला एक बेहतरीन डिजिटल टूल मानकर हाथों-हाथ लिया है।लेकिन किसी वामपंथी पार्टी ने या उसके किसी नेता ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। अभिनेता प्रकाश राज, कॉमेडियन वीर दास, गायिका चिन्मयी श्रीपदा और अभिनेत्री सनम शेट्टी ने इसके अकाउंट पर लगी पाबंदी का विरोध करते हुए इसे युवाओं की आवाज और अभिव्यक्ति की आजादी से जोड़कर अपनी प्रतिक्रिया दी है ।

काक्रोच आंदोलन के बहाने ही सही GenZ दे रहे दस्तक

सपा प्रवक्ता मनोज सिंह कहते हैं कि Gen Z काक्रोच आंदोलन के बहाने ही सही पर उस दरवाजे पर दस्तक दे रही है जिसे मोदी सरकार ने अब तक बंद करके रखा था। यह नहीं भूलना चाहिए कि बेरोजगार युवाओं की संख्या देश में 45 करोड़ से ज्यादा है।”हालांकि एक अन्य प्रवक्ता अनिल यादव कहते हैं इस आंदोलन पर तात्कालिक टिप्पणी करना ठीक नहीं होगा अभी इंतजार करिए। सच यह है कि सपा, कांग्रेस इस पूरी मुहिम को शक की निगाह से और एक बड़ी साजिश के तौर पर देख रहे हैं।

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