रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण केयर अस्पताल (Ramkrishna Care Hospital) में हुई घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता और लापरवाही की एक दर्दनाक मिसाल बनकर सामने आई है।
सीवरेज टैंक की सफाई के लिए उतरे तीन मजदूर गोविंद सेंद्रे, अनमोल मचकन और प्रशांत कुमार—शायद यह नहीं जानते थे कि वे मौत के मुंह में जा रहे हैं। आरोप है कि बिना किसी सुरक्षा उपकरण के उन्हें जहरीली गैस से भरे टैंक में उतार दिया गया।
कुछ ही पलों में तीनों बेहोश हुए और फिर कभी उठ नहीं सके। अगर सुरक्षा के न्यूनतम मानकों का पालन किया जाता, तो शायद ये तीनों आज जिंदा होते।
सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि हादसे के बाद अस्पताल प्रबंधन का कोई जिम्मेदार व्यक्ति पीड़ित परिवारों के पास नहीं पहुंचा।
जिन परिवारों ने अपने कमाने वाले सदस्य खो दिए, वे अस्पताल के बाहर न्याय और जवाब का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें सिर्फ खामोशी मिली।
हादसे के बाद जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए, उन्होंने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया।
आरोप है कि मृतकों के शवों को सम्मानपूर्वक संभालने के बजाय, उन्हें जल्दबाजी में कचरे की तरह उठाकर वाहन में डाल दिया गया।
इन शवों को पोस्टमार्टम के लिए अंबेडकर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन जिस तरह से यह प्रक्रिया हुई, उसने कई सवाल खड़े कर दिए – क्या मजदूरों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं? क्या मौत के बाद भी उन्हें सम्मान नहीं मिल सकता?
जब परिजनों और स्थानीय लोगों ने यह सब देखा, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। हंगामा हुआ, पुलिस से झूमाझटकी हुई, और पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। यह सिर्फ गुस्सा नहीं था, बल्कि उस दर्द और अपमान का विस्फोट था, जो उन्होंने महसूस किया।
यह घटना सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई गंभीर सवाल खड़े करती है— क्यों बिना सुरक्षा के मजदूरों को खतरनाक टैंक में उतारा गया? हादसे के बाद प्रबंधन ने संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखाई? और सबसे बड़ा सवाल—क्या गरीब मजदूरों की जान इतनी सस्ती है?
यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि लापरवाही सिर्फ जान नहीं लेती, बल्कि इंसानियत को भी शर्मसार कर देती है।
सीएम साय ने बुलाई उच्च स्तरीय बैठक
घटना सामने आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तुरंत सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में सीएम ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि अब से किसी भी सेप्टिक टैंक की सफाई नगर निगम की अनुमति के बिना नहीं होगी।
सफाई का काम केवल प्रशिक्षित कर्मचारी ही करेंगे। सफाई के लिए हाईटेक मशीनों और उचित सुरक्षा उपकरणों का अनिवार्य इस्तेमाल होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सफाई कर्मचारियों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि है और ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कांग्रेस का आरोप: साक्ष्य मिटाने का प्रयास
इस मामले में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की सफाई के लिए निर्धारित मानकों के पालन न करने और आवश्यक सुरक्षा उपकरण के बिना सफाई कर्मियों को गटर में उतारने के जिम्मेदार कौन है, इसकी तत्परता से पारदर्शिता पूर्वक जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिन्होंने मामले को छुपाने, लीपापोती करने का प्रयास किया है, उन पर भी कठोर कार्रवाई होना चाहिए। ये सफाई कर्मचारी किसी ठेका कंपनी के थे या सीधे अस्पताल प्रबंधन के थे इसकी भी जांच होनी चाहिए। पूरे मामले में एक बड़ा सवाल यह भी है कि घटना के बाद मृतक सफाई कर्मियों के शव को घटनास्थल से किसने हटाया? क्यों साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया? बिना पुलिस की जांच के मामले को छुपाने, लीपापोती करने वाले कौन थे?









