‘भारत के कितने प्लेन गिरे’ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दिया संसद में ये जवाब

July 28, 2025 3:48 PM
rajnath singh parliament

rajnath singh parliament : संसद के मानसून सत्र के छठे दिन, सोमवार को लोकसभा में दोपहर 2:05 बजे ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा शुरू हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सरकार की ओर से इस चर्चा की शुरुआत की। इस मुद्दे पर विचार-विमर्श के लिए लोकसभा में 16 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। हालांकि, इससे पहले विपक्ष ने बिहार के वोटर सत्यापन से जुड़े स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) मुद्दे को लेकर सदन में जमकर हंगामा किया, जिसके चलते कार्यवाही को तीन बार स्थगित करना पड़ा।

रक्षा मंत्री राजनाथ ने अपने 55 मिनट के भाषण में कहा, “ऑपरेशन सिंदूर की लाली शौर्य की कहानी है। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकी और हैंडलर मारे गए। हमने पूरा ऑपरेशन 22 मिनट में पूरा कर लिया। रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र उठाने की आवश्यकता पड़ती है, भारत आतंकवाद के खिलाफ न केवल सीमाओं पर बल्कि वैचारिक स्तर पर भी मजबूती से संघर्ष कर रहा है। भारत का पाकिस्तान के साथ कोई सांस्कृतिक या सभ्यता का टकराव नहीं है बल्कि यह आतंकवाद और बर्बरता के खिलाफ संघर्ष है। विपक्ष का काम होता है- सवाल पूछना। कभी-कभी विपक्ष के लोग ये पूछते हैं कि हमारे कितने विमान गिराए। हमसे कभी ये नहीं पूछा कि हमने दुश्मन के कितने विमान गिराए।” हमसे पूछा जाए कि दुश्मन के ठिकाने नेस्तनाबूद किए। इसका उत्तर है- हां। अगर आपका प्रश्न है, ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा तो इसका उत्तर है- हां। अगर हमने मांओं-बहनों के सिंदूर का बदला लिया, तो उत्तर है- हां। अगर प्रश्न है कि हमारे सैनिकोंं की क्षति हुई, तो उत्तर है-नहीं।”

लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की शुरुआत करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान भारत के कितने लड़ाकू विमान नष्ट हुए, यह सवाल उठाना ही गलत है। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि उसने कभी यह नहीं पूछा कि भारतीय सेना ने दुश्मन के कितने विमानों को मार गिराया। राजनाथ ने विपक्ष पर ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में अप्रासंगिक सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर को तब तक जारी रखा गया, जब तक इसके सैन्य और राजनीतिक उद्देश्य पूरे नहीं हो गए। साथ ही, उन्होंने इस दावे को पूरी तरह निराधार बताया कि ऑपरेशन को किसी बाहरी दबाव में रोका गया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ न केवल सीमाओं पर बल्कि वैचारिक स्तर पर भी मजबूती से संघर्ष कर रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री ने कई प्रतिनिधिमंडलों का गठन किया था, जिसमें ज्यादातर हमारी पार्टी के सांसद शामिल थे। इन समूहों ने वैश्विक मंचों पर भारत का पक्ष प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया और आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजनाथ ने इन सभी सम्मानित सदस्यों के योगदान के लिए सिर झुकाकर आभार व्यक्त किया।

“विपक्ष ने कभी नहीं पूछा हमने दुश्मन के कितने विमान गिराए” – राजनाथ

राजनाथ सिंह ने कहा – “मैंने श्रीनगर, भुज में जाकर खुद देखा कि सुरक्षाबलों की आंखों में विश्वास है। किसी भी देश में जनता सत्ता और विपक्ष को अलग-अलग काम सौंपती है। सत्ता का काम होता है- जनता के लिए काम करना। विपक्ष का काम होता है- सवाल पूछना। कभी-कभी विपक्ष के लोग ये पूछते हैं कि हमारे कितने विमान गिराए। हमसे कभी ये नहीं पूछा कि हमने दुश्मन के कितने विमान गिराए।” हमसे पूछा जाए कि दुश्मन के ठिकाने नेस्तनाबूद किए। इसका उत्तर है- हां। अगर आपका प्रश्न है, ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा तो इसका उत्तर है- हां। अगर हमने मांओं-बहनों के सिंदूर का बदला लिया, तो उत्तर है- हां। अगर प्रश्न है कि हमारे सैनिकोंं की क्षति हुई, तो उत्तर है-नहीं।

पाकिस्तान भारत को नुकसान नहीं पहुंचा सका

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में बताया कि भारत के मजबूत हवाई रक्षा तंत्र, ड्रोन-रोधी प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों ने पाकिस्तान के हमले को पूरी तरह विफल कर दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान किसी भी भारतीय लक्ष्य को नुकसान नहीं पहुंचा सका और न ही किसी महत्वपूर्ण संपत्ति को क्षति हुई। भारत की सुरक्षा व्यवस्था अडिग रही और हर हमले को सफलतापूर्वक रोका गया। राजनाथ ने भारतीय सेना के वीर सैनिकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी बहादुरी ने दुश्मन के सभी इरादों को नाकाम कर दिया।

राजनाथ सिंह ने 1971 के युद्ध में भारत की जीत को किया याद

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 1971 के भारत-पाक युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि जब भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया था, तब हमने तत्कालीन सरकार की सराहना की थी। उन्होंने कहा कि उस समय हमने यह नहीं देखा कि सरकार किस पार्टी की थी या उसकी विचारधारा क्या थी। हमारे नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद में खड़े होकर तत्कालीन सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व की तारीफ की थी। राजनाथ ने जोर देकर कहा कि हमने कभी यह सवाल नहीं उठाया कि पाकिस्तान को सबक सिखाने के दौरान कितने भारतीय विमान खराब हुए या कितने सैन्य उपकरण नष्ट हुए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में कहा कि 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान जाकर मैत्री का संदेश दिया था जो दर्शाता है कि भारत की मूल प्रकृति भगवान बुद्ध की शांति से प्रेरित है, न कि युद्ध से। उन्होंने ये भी कहा की वर्तमान सरकार का रुख पूरी तरह साफ है, आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते। एक ऐसे देश के साथ जहां लोकतंत्र का नामोनिशान नहीं धार्मिक कट्टरता हावी है और गोलियों की गूंज सुनाई देती है, कोई सार्थक बातचीत संभव नहीं। राजनाथ ने तंज कसते हुए कहा कि पाकिस्तान सरकार आतंकवादियों की नर्सरी चलाती है और उनके लिए राजकीय अंतिम संस्कार तक का प्रबंध करती है।

विपक्ष में रहते हुए भी हमने सेना का सम्मान किया : राजनाथ

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि चार दशकों के अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कभी भी दलगत राजनीति को शत्रुता की नजर से नहीं देखा। उन्होंने विपक्ष को संबोधित करते हुए कहा कि आज सत्ता में होने के बावजूद, हमेशा ऐसा नहीं रहेगा। जब जनता ने हमें विपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी तब भी हमने इसे पूरी निष्ठा से निभाया।उन्होंने याद दिलाया कि जब चीन के साथ युद्ध में दुखद परिणाम सामने आए, तब विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने सवाल उठाए कि विदेशी ताकतों ने हमारी जमीन पर कब्जा क्यों किया और हमारे सैनिकों की जान क्यों गई। उस समय उनकी चिंता सैन्य उपकरणों की नहीं, बल्कि देश की भौगोलिक अखंडता की थी। राजनाथ ने बताया कि तत्कालीन नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने संसद में खड़े होकर सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व की सराहना की थी, बिना यह पूछे कि युद्ध में भारत के कितने उपकरण नष्ट हुए।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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