नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिलिमिटेशन और महिला बिल के लिए संसद का सत्र बुलाने के प्लान में नंबर 16 बहुत भारी मतलब रखता है।
राहुल गांधी ने संसद सदस्यों और आम जनता से पूछा कि यह 16 क्या है? इसका जवाब हमें मैसेज और एक्स पर दें।
राहुल के भाषण के बाद से न केवल संसद के गलियारों और आम जनता के बीच, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इस बात की चर्चा जोरों पर है कि इस 16 का मतलब क्या है?
राहुल गांधी ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह भारत की महिलाओं के पीछे छिप रही है। राहुल गांधी ने कहा, “जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में अपनी सरकार के इस प्लान पर बोल रहे थे, तब मैं उन्हें देख रहा था। उनकी एनर्जी कम थी। वे जुड़ नहीं पा रहे थे।”
उन्होंने बताया कि फिर उन्हें तारीख नजर आई – 16 अप्रैल। इस नंबर पर जोर देते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा, “साफ है कि यह बिल संवैधानिक संशोधन पास कराने की कोशिश गलत थी। सबको पता था।”
उन्होंने आगे कहा, “मैंने अपने फोन पर तारीख देखी – 16 अप्रैल और मैंने कहा, ‘माई गॉड, हाउ क्रेजी!’ यही नंबर है। 16। पहेली का जवाब नंबर 16 में है। अब अगर कोई समझ रहा है कि मैं क्या कह रहा हूं, तो कृपया मुझे मैसेज भेजें।”
राहुल ने ट्रेजरी बेंच की ओर इशारा करते हुए कहा कि “आपकी समस्याओं का जवाब नंबर 16 में है”।
एक गणितीय तथ्य यह हो सकता है कि 2024 लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा अपने दम पर बहुमत में नहीं है। भाजपा के पास 240 सांसद हैं। उसके प्रमुख सहयोगियों में बिहार से नीतीश कुमार की JD(U) के 12 सांसद और आंध्र प्रदेश से चंद्रबाबू नायडू की TDP के 16 सांसद शामिल हैं।
गौरतलब है कि सत्र के पहले राहुल गांधी इस बिल को लाने की वजह एपस्टीन फाइलों का डर बता रहे थे। इस मामले को डीकोड करने की कोशश में लगे प्रेक्षकों का ध्यान राहुल गांधी की बॉडी लैंग्वेज पर भी गया जब उन्होंने 16 के साथ अपना भाषण खत्म किया और अपनी सीट बैठ गए।









